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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जलवायु

भारत की जलवायु को 'मानसूनी' जलवायु (Monsoon Climate) कहा जाता है। 'मानसून' शब्द की व्युत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द 'मौसिम' (Mausim) से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'ऋतु' (Season) है। यह अध्याय मौसम (Weather) और जलवायु (Climate) के मध्य अंतर, जलवायु को नियंत्रित करने वाले 6 प्रमुख कारकों (अक्षांश, ऊंचाई, वायुदाब व पवनें, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएं तथा उच्चावच), भारतीय मानसून की उत्पत्ति की जटिल प्रक्रिया (ITCZ, जेट धाराएं, तिब्बती पठार, तथा एल नीनो व दक्षिणी दोलन - ENSO), भारत की चार प्रमुख ऋतुओं—शीत ऋतु (महावट सहित), ग्रीष्म ऋतु (लू और काल बैसाखी), वर्षा ऋतु (दक्षिण-पश्चिम मानसून, मानसून प्रस्फोट व मौसिनराम की सर्वाधिक वर्षा), तथा लौटते मानसून (क्वार की उमस व तटीय चक्रवात) का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अंत में यह अध्याय सिद्ध करता है कि किस प्रकार मानसून पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक सांस्कृतिक और कृषि सूत्र में पिरोने वाला 'एकता का परिचायक' (Unifying Bond) है। झारखंड बोर्ड (CBSE) परीक्षा में 'भारतीय मानसून की उत्पत्ति के कारक', 'मौसम और जलवायु में अंतर', 'लू, महावट तथा आम्र वर्षा की परिभाषा', तथा 'तमिलनाडु तट पर शीतकालीन वर्षा का कारण' से जुड़े प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

द्रास में -45°C और थार में 50°C: भारत की जलवायु का हैरतअंगेज विस्तार

जरा सोचिए कि एक ही समय में एक ही देश के दो कोनों में क्या हो सकता है? दिसंबर की रात में लद्दाख के 'द्रास' (Dras) में तापमान शून्य से 45 डिग्री नीचे (-45°C) गिर जाता है जहाँ पानी तुरंत बर्फ की चट्टान बन जाता है; जबकि उसी रात केरल के तिरुवनंतपुरम में तापमान 22°C का सुखद अहसास दे रहा होता है! इसी प्रकार जून की दोपहर में राजस्थान के थार मरुस्थल में पारा 50°C को छू लेता है, जबकि कश्मीर के पहलगाम में तापमान मात्र 20°C रहता है। और तो और, मेघालय के मौसिनराम (Mawsynram) में वर्ष भर में 1,141 सेमी बारिश होती है, जबकि जैसलमेर में साल भर में 10 सेमी पानी भी नहीं गिरता! भारत की यह अविश्वसनीय जलवायु विविधता मानसून के जादुई तंत्र से कैसे संचालित होती है, यही इस अध्याय की विषयवस्तु है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ 140 करोड़ लोगों का भोजन और अर्थव्यवस्था मानसून पर टिकी है। समय पर मानसूनी वर्षा होने पर खेत लहलहाते हैं, उद्योग चलते हैं और जीडीपी में उछाल आता है; जबकि मानसून की विफलता या सूखा देश को संकट में डाल देता है। झारखंड की कृषि (विशेषकर धान की खेती) पूरी तरह मानसूनी फुहारों पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव को समझने के लिए इस अध्याय का ज्ञान जीवन भर काम आता है। CBSE बोर्ड परीक्षा में भूगोल खंड का यह सर्वाधिक अवधारणात्मक और महत्वपूर्ण अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • मौसम (Weather - अल्पकालिक वायुमंडलीय दशा) और जलवायु (Climate - 30+ वर्षों का औसत) में अंतर।
  • तापमान और वायुदाब का व्युत्क्रमानुपाती संबंध (उच्च तापमान = निम्न वायुदाब)।
  • पवन की गति की दिशा: हमेशा उच्च दाब (High Pressure) से निम्न दाब (Low Pressure) की ओर।
  • भारत के मानचित्र पर विभिन्न दिशाओं और मानसूनी पवनों के मार्ग का ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • मौसम और जलवायु की सटीक परिभाषा व अंतर को स्पष्ट करना।
  • विश्व के किसी भी स्थान की जलवायु को नियंत्रित करने वाले 6 मूलभूत कारकों की विवेचना करना।
  • कोरियोलिस बल (फेरेल का नियम) और जेट धाराओं (Jet Streams) की कार्यप्रणाली को समझना।
  • भारतीय मानसून की उत्पत्ति के प्रमुख कारकों—ITCZ का खिसकना, तिब्बत का पठार, सोमाली जेट, तथा एल नीनो (ENSO)—का विश्लेषण करना।
  • भारत की चारों ऋतुओं (शीत, ग्रीष्म, वर्षा, और शरद/लौटता मानसून) की मौसमी विशेषताओं व स्थानीय पवनों (लू, महावट, काल बैसाखी, आम्र वर्षा) का वर्णन करना।
  • मानसून को भारतीय जनजीवन, कृषि और त्योहारों के 'एकता के परिचायक' (Unifying Bond) के रूप में सिद्ध करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मौसम बनाम जलवायु और जलवायु नियंत...
2 2. कोरियोलिस बल, जेट धाराएं और पश्च...
3 3. भारतीय मानसून की उत्पत्ति और इसक...
4 4. भारत की चार प्रमुख ऋतुएं और मौसम...
5 5. मानसून: एक एकता का परिचायक (A Un...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मौसम बनाम जलवायु और जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक

मौसम (Weather): किसी स्थान की एक विशेष समय में वायुमंडल की क्षणिक अवस्था को मौसम कहते हैं। मौसम के तत्व—तापमान, वायुमंडलीय दबाव, पवन, आर्द्रता और वर्षण—दिन में कई बार बदल सकते हैं (जैसे सुबह धूप और दोपहर में बारिश)।

जलवायु (Climate): एक विशाल क्षेत्र में लंबी कालावधि (कम से कम 30 वर्ष से अधिक) के मौसम की दशाओं के कुल योग और औसत को जलवायु कहते हैं। भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु है।

जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक (Climatic Controls):

  1. अक्षांश (Latitude): पृथ्वी की गोलाई के कारण भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सौर ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है, अतः तापमान घटता है। भारत के मध्य से कर्क रेखा (23°30' N) गुजरती है, जिससे इसका दक्षिणी भाग उष्णकटिबंधीय और उत्तरी भाग उपोष्णकटिबंधीय है।
  2. तुंगता या ऊंचाई (Altitude): जैसे-जैसे हम समुद्र तल से वायुमंडल में ऊपर उठते हैं, वायु विरल होती जाती है और तापमान घटता है (प्रति 165 मीटर पर 1°C की कमी)। यही कारण है कि गर्मियों में भी शिमला, दार्जिलिंग और नैनीताल जैसे पहाड़ी स्थान ठंडे रहते हैं।
  3. वायुदाब एवं पवन तंत्र (Pressure and Wind System): किसी क्षेत्र का वायुदाब और पवनें उस स्थान के अक्षांश और ऊंचाई पर निर्भर करती हैं, जो तापमान और वर्षा के वितरण को निर्धारित करती हैं।
  4. समुद्र से दूरी (महाद्वीपीयता - Continentality): समुद्र तापमान पर समकारी (Moderating) प्रभाव डालता है। जैसे-जैसे समुद्र से दूरी बढ़ती है, यह प्रभाव घटता है और मौसम चरम (Extreme) हो जाता है—अर्थात गर्मियों में बहुत अधिक गर्मी और सर्दियों में भीषण ठंड। इसे महाद्वीपीय अवस्था कहते हैं (उदा. दिल्ली बनाम मुंबई)।
  5. महासागरीय धाराएं (Ocean Currents): गर्म या ठंडी महासागरीय धाराएं तटीय पवनों के साथ मिलकर तट के तापमान को गर्म या ठंडा कर देती हैं।
  6. उच्चावच लक्षण (Relief Features): ऊंचे पर्वत ठंडी या गर्म हवाओं के लिए प्राकृतिक अवरोधक का कार्य करते हैं। यदि पर्वत मानसूनी हवाओं के मार्ग में हों, तो वे उन्हें ऊपर उठने पर विवश करते हैं और पर्वतीय वर्षा (Orographic Rain) कराते हैं (जैसे पश्चिमी घाट और मेघालय की पहाड़ियां); जबकि पर्वत का दूसरा भाग वृष्टि छाया क्षेत्र (Rain Shadow Area) रह जाता है।

2. कोरियोलिस बल, जेट धाराएं और पश्चिमी विक्षोभ

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले तीन विशिष्ट वायुमंडलीय तंत्र निम्नलिखित हैं:

1. कोरियोलिस बल एवं फेरेल का नियम (Coriolis Force):

पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूर्णन (Rotation) के कारण उत्पन्न आभासी बल को कोरियोलिस बल कहते हैं।

फेरेल का नियम (Ferrel's Law): इस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्ध में चलने वाली सभी पवनें अपनी मूल दिशा से दाहिनी ओर (Right) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Left) विक्षेपित (Deflect) हो जाती हैं। दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें जब भूमध्य रेखा को पार करती हैं, तो कोरियोलिस बल के कारण दाहिनी ओर मुड़कर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें बन जाती हैं।

2. जेट धाराएं (Jet Streams):

क्षोभमंडल (Troposphere) की ऊपरी परत में (लगभग 12,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर) संकरी पट्टी में अत्यधिक तीव्र गति से चलने वाली पश्चिमी पवनों को जेट धारा कहते हैं। इनकी गति गर्मियों में 110 किमी/घंटा तथा सर्दियों में लगभग 184 किमी/घंटा होती है।

  • उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा: 27° से 30° उत्तरी अक्षांश के बीच चलती है। गर्मियों को छोड़कर यह वर्ष भर हिमालय के दक्षिण में बहती है।
  • उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा: गर्मियों के महीनों में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर लगभग 14° उत्तरी अक्षांश पर बहती है और भारतीय मानसून को शक्ति प्रदान करती है।

3. पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ (Western Cyclonic Disturbances):

शीत ऋतु में भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के ऊपर उत्पन्न होने वाले चक्रवात उपोष्ण पश्चिमी जेट धाराओं के साथ भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में पहुंचते हैं। इनके कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकालीन हल्की वर्षा होती है तथा कश्मीर व हिमाचल में हिमपात होता है। यह वर्षा रबी की फसलों (गेहूं) के लिए वरदान साबित होती है और इसे स्थानीय रूप से 'महावट' (Mahawat) कहा जाता है।

3. भारतीय मानसून की उत्पत्ति और इसकी क्रियाविधि

भारतीय मानसून की उत्पत्ति एक जटिल वायुमंडलीय प्रक्रिया है। इसके मुख्य वैज्ञानिक कारक निम्नलिखित हैं:

1. स्थल और जल का विभेदी तापन (Differential Heating of Land and Sea):

ग्रीष्म ऋतु में भारत का विशाल भूभाग (विशेषकर थार मरुस्थल और उत्तर-पश्चिमी मैदान) अत्यधिक गर्म हो जाता है, जिससे वहाँ तीव्र निम्न वायुदाब (Low Pressure) का केंद्र बन जाता है। इसके विपरीत, चारों ओर फैले हिंद महासागर का जल धीरे-धीरे गर्म होता है, जिससे समुद्र पर उच्च वायुदाब (High Pressure) बना रहता है। इस भारी दाबांतर के कारण नमी से लदी समुद्री पवनें समुद्र से स्थल की ओर खिंचती हैं।

2. अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का खिसकना:

विषुवतीय अक्षांशों पर स्थित निम्न वायुदाब का चौड़ा गर्त (Trough), जहाँ उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें मिलती हैं, ITCZ कहलाता है। गर्मियों में सूर्य के उत्तरायण होने से यह गर्त खिसककर गंगा के मैदान (लगभग 20°-25° N) पर आ जाता है, जिसे 'मानसून गर्त' कहा जाता है।

3. तिब्बती पठार का अत्यधिक गर्म होना:

गर्मियों में तिब्बत का विशाल पठार समुद्र तल से 4,500 मीटर ऊंचा होने के कारण भीषण रूप से गर्म हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वहाँ तीव्र ऊर्ध्वाधर वायु धाराएं उठती हैं और पठार के ऊपर 9 किमी की ऊंचाई पर निम्न वायुदाब बन जाता है।

4. दक्षिणी दोलन और एल नीनो (ENSO - Southern Oscillation & El Niño):

सामान्यतः जब दक्षिणी प्रशांत महासागर में उच्च वायुदाब होता है, तो हिंद महासागर में निम्न वायुदाब होता है। परंतु कुछ वर्षों में यह स्थिति उलट जाती है। इस दाबांतर के चक्रीय उलटफेर को दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation - SO) कहते हैं।

  • एल नीनो (El Niño): यह एक गर्म समुद्री जलधारा है जो पेरू के तट पर सामान्यतः बहने वाली ठंडी धारा के स्थान पर अस्थायी रूप से (हर 2 से 5 साल में) प्रकट होती है। 'एल नीनो' स्पैनिश शब्द है जिसका अर्थ है 'शिशु' (ईसा मसीह के बाल रूप का प्रतीक क्योंकि यह क्रिसमस के समय शुरू होती है)।
  • एल नीनो की उपस्थिति भारतीय मानसून को कमजोर कर देती है और देश में सूखे की स्थिति पैदा करती है। इस पूरी परिघटना को ENSO (El Niño Southern Oscillation) कहा जाता है।

4. भारत की चार प्रमुख ऋतुएं और मौसमी विशेषताएं

मानसून पवनों की लयबद्धता के आधार पर भारत के मौसम विज्ञानी वर्ष को चार प्रमुख ऋतुओं में बांटते हैं:

1. शीत ऋतु (The Cold Weather Season - मध्य नवंबर से फरवरी):

  • उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं। तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर घटता जाता है (चेन्नई में 24°-25°C जबकि उत्तर भारत में 10°-15°C)।
  • उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं, अतः देश के अधिकांश भागों में मौसम शुष्क रहता है।
  • अपवाद: तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर ये पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से नमी ग्रहण करके आती हैं और वहाँ शीतकाल में भारी वर्षा कराती हैं।
  • पश्चिमी विक्षोभों द्वारा उत्तर भारत में 'महावट' की वर्षा होती है जो रबी फसलों (गेहूं) के लिए अत्यंत लाभकारी है।

2. ग्रीष्म ऋतु (The Hot Weather Season - मार्च से मई):

  • सूर्य के उत्तरायण होने से तापमान तेजी से बढ़ता है। मार्च में दक्कन पठार पर 38°C, अप्रैल में म.प्र. व गुजरात में 42°C और मई में उत्तर-पश्चिमी भारत में 45°C तापमान दर्ज होता है।
  • लू (Loo): मई और जून में उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में दिन के समय चलने वाली धूल भरी, प्रचंड, गर्म और शुष्क पवनों को 'लू' कहते हैं। इसका सीधा प्रभाव जानलेवा (हीट स्ट्रोक) हो सकता है।
  • काल बैसाखी (Kaal Baisakhi): ग्रीष्म ऋतु के अंत में पश्चिम बंगाल में मूसलाधार बारिश, गरज और ओलावृष्टि वाले विनाशकारी स्थानीय तूफानों को 'काल बैसाखी' (बैसाख महीने का विनाशक) कहा जाता है।
  • आम्र वर्षा (Mango Showers): ग्रीष्म ऋतु के अंत में केरल और कर्नाटक के तटीय भागों में होने वाली पूर्व-मानसूनी फुहारों को 'आम्र वर्षा' कहते हैं क्योंकि यह आमों को जल्दी पकने में सहायता करती है।

3. वर्षा ऋतु या दक्षिण-पश्चिम मानसून (The Advancing Monsoon - जून से सितंबर):

  • जून के आरंभ में निम्न दाब का गर्त इतना गहरा हो जाता है कि दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार कर मुड़ती हैं और भारत में अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी की दो शाखाओं के रूप में प्रवेश करती हैं।
  • मानसून प्रस्फोट (Burst of Monsoon): मानसूनी पवनों के आगमन के साथ सामान्य वर्षा में अचानक तीव्र वृद्धि हो जाती है और यह कई दिनों तक लगातार जारी रहती है। इसे 'मानसून का टूटना' या 'प्रस्फोट' कहते हैं।
  • मौसिनराम (Mawsynram): मेघालय की खासी पहाड़ियों में स्थित मौसिनराम अपनी कीपाकार पहाड़ियों की स्थिति के कारण विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा (1,141 सेमी) प्राप्त करता है।
  • वर्षा में विराम (Breaks in Monsoon): मानसून के दौरान वर्षा लगातार नहीं होती; वर्षा वाले दिनों के बीच कई शुष्क अंतराल (Wet and Dry Spells) आते हैं। जब मानसून गर्त हिमालय की तलहटी में खिसक जाता है, तो मैदानों में सूखा पड़ता है और पहाड़ों में भीषण बाढ़ आती है।

4. मानसून की वापसी या शरद ऋतु (Retreating Monsoon - अक्टूबर और नवंबर):

  • अक्टूबर के आरंभ में सूर्य के दक्षिणायन होने से गंगा के मैदान पर निम्न दाब का गर्त कमजोर पड़ जाता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून पीछे हटना शुरू कर देता है। आसमान साफ हो जाता है और तापमान बढ़ जाता है।
  • क्वार की उमस (October Heat): उच्च तापमान और दिन की अत्यधिक आर्द्रता (नमी) के कारण दिन का मौसम अत्यंत कष्टकारी और बेचैन करने वाला हो जाता है। इस दशा को सामान्यतः 'क्वार की उमस' कहते हैं।
  • अंडमान सागर पर उत्पन्न होने वाले चक्रवाती अवदाब (Cyclonic Depressions) पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) पर भारी तबाही मचाते हैं। गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में ये चक्रवात जान-माल का अपार नुकसान करते हैं।

5. मानसून: एक एकता का परिचायक (A Unifying Bond)

यद्यपि भारत के विभिन्न क्षेत्रों के तापमान और वर्षा की मात्रा में भारी प्रादेशिक विविधता पाई जाती है, फिर भी मानसून पूरे देश को एक सूत्र में बांधने वाली एक सार्वभौमिक शक्ति है:

  • ऋतु चक्र की लयबद्धता: हिमालय भारत को ठंडी मध्य एशियाई हवाओं से बचाकर एक विशिष्ट उष्णकटिबंधीय जलवायु स्वरूप प्रदान करता है। पूरा देश वर्ष भर मानसूनी पवनों के आने, वर्षा होने और उनके लौटने के नियमित चक्र की प्रतीक्षा करता है।
  • कृषि चक्र का आधार: भारत के करोड़ों किसान अपनी बुआई और फसलों का पूरा चक्र मानसूनी फुहारों के अनुसार तय करते हैं। मानसूनी वर्षा ही देश की नदियों, झीलों, जलाशयों और भूजल को रिचार्ज करती है।
  • सांस्कृतिक व सामाजिक उत्सव: भारत के विभिन्न भागों में मनाए जाने वाले अधिकांश लोकगीत, संगीत और प्रमुख त्योहार—जैसे ओणम, पोंगल, बिहू, सावन के झूले, तीज, हरियाली—मानसून के आगमन और अच्छी फसल की खुशी से ही जुड़े हैं।

अतः हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर असम तक पूरा देश मानसूनी वर्षा के इस ताने-बाने से भावनात्मक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक अविभाज्य राष्ट्र के रूप में बंधा हुआ है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

फेरेल का नियम (Ferrel's Law)
उत्तरी गोलार्ध = दाईं ओर | दक्षिणी गोलार्ध = बाईं ओर
कोरियोलिस बल के प्रभाव से पवनों के विक्षेपण की दिशा।
मौसिनराम (Mawsynram)
1,141 सेमी औसत वार्षिक वर्षा (मेघालय)
खासी पहाड़ियों में स्थित; विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान।
महावट (Mahawat)
पश्चिमी विक्षोभ द्वारा उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा
रबी की फसलों (गेहूं) की वृद्धि के लिए संजीवनी।
क्वार की उमस (October Heat)
अक्टूबर में उच्च तापमान + उच्च आर्द्रता
लौटते मानसून के समय दिन का असहनीय कष्टप्रद मौसम।
एल नीनो (El Niño)
पेरू तट पर 2-5 वर्षों में प्रकट होने वाली गर्म समुद्री धारा
भारतीय मानसून को कमजोर करती है और सूखा लाती है।
ITCZ
अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र
विषुवतीय निम्न दाब का गर्त जहाँ व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): 'मौसम' (Weather) और 'जलवायु' (Climate) के बीच मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए। भारत की जलवायु किस प्रकार की है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: मौसम और जलवायु के बीच मूलभूत अंतर निम्नलिखित हैं:

  • मौसम (Weather): किसी स्थान की अल्पकालिक (एक दिन, कुछ घंटे या सप्ताह) वायुमंडलीय दशाओं—जैसे तापमान, वर्षा, हवा और धूप—को मौसम कहते हैं। यह एक ही दिन में कई बार बदल सकता है।
  • जलवायु (Climate): किसी विस्तृत भूभाग में एक लंबी अवधि (कम से कम 30 वर्ष या अधिक) के मौसम की दशाओं और विविधताओं के कुल औसत को जलवायु कहते हैं। यह अपेक्षाकृत स्थायी होती है।

भारत की जलवायु: भारत की जलवायु को 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु' (Tropical Monsoon Climate) कहा जाता है।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): भारतीय मानसून की उत्पत्ति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारतीय मानसून की उत्पत्ति और गतिशीलता के लिए निम्नलिखित प्रमुख कारक उत्तरदायी हैं:

1. स्थल और जल का विभेदी तापन:

ग्रीष्मकाल में भारत के उत्तरी मैदानी भूभाग पर अत्यधिक गर्मी के कारण तीव्र निम्न वायुदाब बनता है, जबकि आसपास के हिंद महासागर पर उच्च वायुदाब रहता है। इस दाबांतर से समुद्री पवनें नमी लेकर भारत की ओर खिंचती हैं।

2. ITCZ (मानसून गर्त) की स्थिति में परिवर्तन:

गर्मियों में सूर्य की सीधी किरणें पड़ने से अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) विषुवत रेखा से उत्तर की ओर खिसककर गंगा के मैदान (20°-25° N) पर आ जाता है, जिससे मानसूनी हवाओं का मार्ग प्रशस्त होता है।

3. तिब्बती पठार का तापन:

गर्मियों में तिब्बत का पठार अत्यधिक गर्म हो जाता है, जिससे तीव्र ऊर्ध्वाधर वायु धाराएं उत्पन्न होती हैं और ऊपरी वायुमंडल में निम्न दाब बनता है।

4. जेट धाराओं की भूमिका:

गर्मियों में पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में खिसक जाती है तथा 14° N अक्षांश पर प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा सक्रिय होकर मानसून को प्रचंड बनाती है।

5. दक्षिणी दोलन और एल नीनो (ENSO):

प्रशांत और हिंद महासागर के बीच वायुदाब का चक्रीय बदलाव (दक्षिणी दोलन) और पेरू तट पर गर्म धारा 'एल नीनो' का आविर्भाव मानसून की तीव्रता को निर्धारित करता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): निम्नलिखित मौसमी परिघटनाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए: (क) लू (Loo), (ख) काल बैसाखी, (ग) महावट।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  • (क) लू (Loo): ग्रीष्म ऋतु में (मई-जून) उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत (राजस्थान, पंजाब, यूपी, बिहार) में दोपहर के समय चलने वाली धूल भरी, प्रचंड, गर्म और शुष्क पवनों को 'लू' कहते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होती है।
  • (ख) काल बैसाखी (Kaal Baisakhi): ग्रीष्म ऋतु के अंत में पश्चिम बंगाल में गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ होने वाली मूसलाधार विनाशकारी वर्षा को 'काल बैसाखी' कहा जाता है। यद्यपि यह फसलों को नुकसान पहुंचाती है, पर चाय और जूट के लिए उपयोगी होती है।
  • (ग) महावट (Mahawat): शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी) में होने वाली हल्की वर्षा को स्थानीय रूप से 'महावट' कहते हैं। यह रबी की फसल (गेहूं) के लिए अमृत समान होती है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): 'तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर शीतकाल में वर्षा क्यों होती है?' तथा 'क्वार की उमस' (October Heat) क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा का कारण:

  • शीत ऋतु में पूरे भारत में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं, अतः वे शुष्क होती हैं और देश में वर्षा नहीं करातीं।
  • परंतु जब ये उत्तर-पूर्वी पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरती हैं, तो वहाँ से प्रचुर मात्रा में नमी ग्रहण कर लेती हैं।
  • जब ये नमी युक्त पवनें तमिलनाडु के कोरोमंडल तट से टकराती हैं, तो वहाँ अक्टूबर-दिसंबर के शीतकालीन महीनों में भारी वर्षा कराती हैं।

2. क्वार की उमस (October Heat):

अक्टूबर के महीने में लौटते मानसून के समय वर्षा बंद हो जाती है, आसमान साफ हो जाता है और दिन का तापमान बढ़ जाता है। जमीन में वर्षा के कारण नमी बनी रहती है। इस उच्च तापमान और भारी आर्द्रता के कारण दिन का मौसम अत्यधिक चिपचिपा और कष्टकारी हो जाता है। इस असहनीय मौसम को 'क्वार की उमस' (October Heat) कहा जाता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत की संपूर्ण वर्षा को केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून से हुआ मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत की अधिकांश वर्षा (80%) दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, परंतु तमिलनाडु के तट पर शीतकालीन वर्षा उत्तर-पूर्वी लौटते मानसून से तथा पंजाब-हरियाणा में शीतकालीन वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (महावट) से होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चेरापूंजी को आज भी सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वर्तमान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मेघालय का 'मौसिनराम' (Mawsynram - 1,141 सेमी) विश्व का सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा वाला स्थान है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एल नीनो को भारतीय मानसून के लिए अच्छा समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एल नीनो एक गर्म समुद्री धारा है जो सामान्यतः भारतीय मानसून को कमजोर करती है और भारत में सूखे या कम वर्षा की स्थिति पैदा करती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कोरियोलिस बल के विक्षेपण की दिशा भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

फेरेल के नियमानुसार कोरियोलिस बल पवनों को उत्तरी गोलार्ध में 'दाहिनी ओर' (Right) और दक्षिणी गोलार्ध में 'बाईं ओर' (Left) विक्षेपित करता है।

भारतीय मानसून की क्रियाविधि एवं चारों ऋतुओं का चक्र

भारत की जलवायु: मानसूनी तंत्र, चार ऋतुएं एवं एकता का परिचायक 1. मानसून की उत्पत्ति के कारक • स्थल-जल दाबांतर: ग्रीष्मकाल में उत्तर मैदान पर निम्न दाब हिंद महासागर पर उच्च दाब (हवाएं खिंचती हैं) • ITCZ व तिब्बत का पठार: विषुवतीय गर्त गंगा मैदान पर खिसकना तिब्बती पठार का अत्यधिक गर्म होना • कोरियोलिस बल व जेट धाराएं: पवनों का दाईं ओर मुड़ना (फेरेल नियम) उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा (14° N) एल नीनो (ENSO प्रभाव): पेरू तट की गर्म धारा → मानसून कमजोर 2. भारत की 4 प्रमुख ऋतुएं 1. शीत ऋतु (नवंबर - फरवरी): - उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (शुष्क) - महावट: गेहूं हेतु अमृत (पश्चिमी विक्षोभ) - तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा 2. ग्रीष्म ऋतु (मार्च - मई): - लू: शुष्क गर्म पवनें (उत्तर मैदान) - काल बैसाखी (प. बंगाल), आम्र वर्षा (केरल) 3. वर्षा ऋतु (जून - सितंबर): - मानसून प्रस्फोट (Burst of Monsoon) - मौसिनराम: विश्व में सर्वाधिक वर्षा (1141 सेमी) 4. लौटता मानसून (अक्टूबर - नवंबर): - क्वार की उमस (October Heat) - पूर्वी तटीय चक्रवात (ओडिशा, आंध्रा) 3. एकता का परिचायक • कृषि अर्थव्यवस्था की धुरी: - खरीफ फसलें (धान, मक्का, दलहन) - जलस्रोतों व भूजल का पुनर्भरण झारखंड में धान बुआई का आधार • सांस्कृतिक व पर्व एकीकरण: - तीज, सावन के झूले, कर्मा (झारखंड) - ओणम (केरल), पोंगल, बिहू (असम) - लोकगीतों व संगीत में वर्षा का उल्लास • हिमालय का सुरक्षा चक्र: - साइबेरियाई ठंडी हवाओं से रक्षा - मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराना कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक अखंड मानसूनी लय

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
मौसम अल्पकालिक वायुमंडलीय दशा है, जबकि जलवायु 30 से अधिक वर्षों के मौसम का औसत योग है; भारत की जलवायु 'उष्णकटिबंधीय मानसूनी' है।
मुख्य बिंदु 2
जलवायु नियंत्रण के 6 प्रमुख कारक हैं: अक्षांश, ऊंचाई (तुंगता), वायुदाब व पवनें, समुद्र से दूरी (महाद्वीपीयता), महासागरीय धाराएं और उच्चावच।
मुख्य बिंदु 3
कोरियोलिस बल (फेरेल का नियम) पवनों को उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है।
मुख्य बिंदु 4
जेट धाराएं ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से बहती हैं; भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा 'महावट' कराते हैं जो गेहूं के लिए वरदान है।
मुख्य बिंदु 5
ग्रीष्मकाल में भारत के भूभाग पर निम्न दाब और हिंद महासागर पर उच्च दाब बनने से दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित होती हैं।
मुख्य बिंदु 6
गर्मियों में उत्तर-पश्चिम भारत में दिन में चलने वाली गर्म, शुष्क व प्रचंड धूल भरी हवाओं को 'लू' (Loo) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 7
पश्चिम बंगाल के आंधी-तूफानों को 'काल बैसाखी' और केरल-कर्नाटक की पूर्व-मानसूनी वर्षा को 'आम्र वर्षा' कहते हैं।
मुख्य बिंदु 8
मेघालय के मौसिनराम में कीपाकार पहाड़ियों के कारण विश्व की सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा (1,141 सेमी) दर्ज होती है।
मुख्य बिंदु 9
अक्टूबर-नवंबर में मानसून वापसी के समय उच्च तापमान और भारी उमस को 'क्वार की उमस' (October Heat) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 10
तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर शीतकाल में वर्षा उत्तर-पूर्वी लौटते मानसून से होती है जो बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मेघालय में स्थित विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाले स्थान का क्या नाम है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
मेघालय की खासी पहाड़ियों में स्थित मौसिनराम (Mawsynram) 1,141 सेमी औसत वार्षिक वर्षा के साथ विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।
2
ग्रीष्म ऋतु में उत्तर भारत के मैदानी भागों में दोपहर के समय चलने वाली धूल भरी, प्रचंड और शुष्क पवनों को क्या कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मई-जून में उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क स्थानीय पवनों को 'लू' कहा जाता है।
3
शीत ऋतु में तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर मुख्य रूप से किन पवनों के कारण वर्षा होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
शीत ऋतु में चलने वाली उत्तर-पूर्वी पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके तमिलनाडु के तट पर भारी वर्षा कराती हैं।
4
पेरू के तट पर सामान्य ठंडी धारा के स्थान पर 2 से 5 वर्षों के अंतराल पर प्रकट होने वाली गर्म समुद्री जलधारा का क्या नाम है जो भारतीय मानसून को कमजोर करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
'एल नीनो' एक गर्म समुद्री जलधारा है जो पेरू तट पर प्रकट होकर प्रशांत महासागर के दबाव को बदलती है और भारतीय मानसून को कमजोर कर सूखा लाती है।
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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