कमियों के बावजूद लोकतंत्र अन्य सभी गैर-लोकतांत्रिक विकल्पों (राजतंत्र, सैनिक तानाशाही, कुलीनतंत्र) की तुलना में कहीं बेहतर और मानवीय शासन प्रणाली है। इसके पक्ष में अकाट्य तर्क निम्नलिखित हैं:
1. अधिक जवाबदेह शासन प्रणाली (Accountable Governance):
लोकतांत्रिक सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। इसे अगले चुनाव में जनता की अदालत में जाना होता है।
ऐतिहासिक प्रमाण: 1958-1961 का चीनी अकाल बनाम भारत की स्थिति
1958 से 1961 के दौरान चीन में पड़ा अकाल विश्व इतिहास का सबसे भयानक अकाल था, जिसमें लगभग 3 करोड़ लोग भूख से मारे गए। उन दिनों भारत की आर्थिक स्थिति चीन से बहुत बेहतर नहीं थी, फिर भी भारत में चीन जैसा अकाल कभी नहीं पड़ा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसका मूल कारण दोनों देशों की सरकारी नीतियां और राजनीतिक व्यवस्था थी। भारत में बहुदलीय लोकतंत्र, स्वतंत्र प्रेस और विपक्षी दल मौजूद थे जो भुखमरी पर सरकार की कड़ी आलोचना कर सकते थे, जिससे भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा के त्वरित उपाय किए। इसके विपरीत चीन में कोई विपक्षी दल नहीं था, न ही स्वतंत्र मीडिया था जो सरकार की विफलताओं को उजागर कर सके।
2. बेहतर और गुणवत्तापूर्ण निर्णय लेने की संभावना:
लोकतंत्र व्यापक चर्चा, बहस और परामर्श पर आधारित होता है। जब अनेक लोग मिलकर किसी समस्या पर विचार करते हैं, तो संभावित गलतियों और खामियों की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदाराना फैसलों की गुंजाइश कम होती है।
3. मतभेदों और टकरावों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का तरीका:
भारत जैसे विशाल देश में जहाँ विभिन्न भाषाओं, धर्मों, जातियों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, हितों का टकराव स्वाभाविक है। लोकतंत्र में कोई भी स्थायी विजेता या स्थायी पराजित नहीं होता। यह विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में बांधने की शांतिपूर्ण युक्ति प्रदान करता है।
4. नागरिकों के आत्मसम्मान और गरिमा में वृद्धि:
लोकतंत्र राजनीतिक समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यहाँ सबसे गरीब और अनपढ़ व्यक्ति को भी वही मताधिकार और सम्मान प्राप्त है जो सबसे अमीर और शिक्षित व्यक्ति को। नागरिक शासक की प्रजा नहीं, बल्कि स्वयं अपने शासक हैं।
5. अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर (Scope to Correct Mistakes):
ऐसा कोई शासन नहीं है जिसमें गलतियां न हों। परंतु लोकतंत्र का सबसे बड़ा गुण यह है कि यहाँ गलतियों को छुपाया नहीं जा सकता; उन पर खुली सार्वजनिक बहस होती है और यदि शासक अपने फैसलों में सुधार न करें, तो जनता अगले चुनाव में उन्हें सत्ता से बेदखल कर सकती है।