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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अपवाह

'अपवाह' शब्द एक क्षेत्र के नदी तंत्र (River System) की व्याख्या करता है। भारत की नदियां न केवल देश की जीवनरेखा हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, कृषि, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी की आधारशिला हैं। यह अध्याय भारत के अपवाह तंत्र के वर्गीकरण—हिमालय की नदियां (The Himalayan Rivers) तथा प्रायद्वीपीय नदियां (The Peninsular Rivers) के बीच मूलभूत अंतर, सिंधु (Indus), गंगा (Ganga) और ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) के विशाल नदी तंत्रों, सुंदरवन डेल्टा (Sundarban Delta), माजुली द्वीप (Majuli - विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप), पश्चिम वाहिनी नदियों (नर्मदा व तापी) के ज्वारनदमुख (Estuaries), तथा पूर्व वाहिनी नदियों (गोदावरी - 'दक्षिण गंगा', महानदी, कृष्णा, कावेरी) के डेल्टाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही यह अध्याय झारखंड की प्रमुख नदियों—दामोदर (Damodar - बंगाल का शोक व DVC), स्वर्णरेखा (Subarnarekha - हुंडरू जलप्रपात), और बराकर का स्थानीय भौगोलिक अध्ययन, भारत की प्रमुख मीठे व खारे पानी की झीलों (वूलर, सांभर, चिल्का), तथा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP / नमामि गंगे) का समग्र विवरण प्रस्तुत करता है। झारखंड बोर्ड (CBSE) परीक्षा में 'हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों में अंतर', 'गंगा नदी तंत्र की विशेषताएं', 'गोदावरी को दक्षिण गंगा क्यों कहते हैं', तथा मानचित्र आधारित प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

देवप्रयाग का दिव्य संगम और सुंदरवन: 2,500 किलोमीटर लंबी गंगा की यात्रा

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में देवप्रयाग (Devprayag) वह पवित्र बिंदु है जहाँ भागीरथी की उफनती मटमैली धारा और अलकनंदा का शांत गहरा नीला जल आपस में मिलकर 'गंगा' के नाम से प्रवाहित होता है। हिमालय की संकरी घाटियों को चीरते हुए यह हरिद्वार में पहली बार मैदानों में उतरती है और यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी व सोन जैसी विशाल नदियों को अपने आगोश में समेटती हुई बंगाल की खाड़ी में विश्व के सबसे बड़े, सबसे उपजाऊ और तेजी से बढ़ते डेल्टा—'सुंदरवन डेल्टा' का निर्माण करती है, जो मैंग्रोव वनों और 'रॉयल बंगाल टाइगर' का प्राकृतिक घर है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

जल ही जीवन है। भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ 60% से अधिक कृषि मानसूनी वर्षा और नदियों की नहरों पर निर्भर है। सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन, नौसंचालन और मत्स्य पालन के लिए नदियां प्राकृतिक वरदान हैं। परंतु आज अनियंत्रित औद्योगिक कचरे और घरेलू सीवेज ने हमारी नदियों को प्रदूषित कर दिया है। झारखंड के संदर्भ में दामोदर और स्वर्णरेखा नदियों का औद्योगिक प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। इस अध्याय का अध्ययन हमें जल संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के प्रति जागरूक बनाता है। CBSE बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय विस्तृत उत्तरीय और मानचित्र कार्य दोनों में अनिवार्य रूप से आता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • अपवाह द्रोणी (Drainage Basin) और जल विभाजक (Water Divide) की मूल परिभाषा।
  • हिमानी (Glacier) से निकलने वाली सदानीरा और मौसमी वर्षा-निर्भर नदियों में अंतर।
  • डेल्टा (Delta) और ज्वारनदमुख (Estuary) की भौगोलिक बनावट।
  • भारत के मानचित्र पर प्रमुख राज्यों और जलस्रोतों की अवस्थिति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जल विभाजक की अवधारणा और अम्बाला (Ambala) नगर की जल विभाजक के रूप में भूमिका को समझना।
  • हिमालय की सदानीरा नदियों और प्रायद्वीपीय भारत की मौसमी नदियों के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करना।
  • सिंधु नदी तंत्र (1960 की सिंधु जल संधि सहित) और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (माजुली द्वीप सहित) की मुख्य विशेषताओं का विश्लेषण करना।
  • गंगा नदी तंत्र, उसकी प्रमुख सहायक नदियों (यमुना, सोन, गंडक, कोसी) और सुंदरवन डेल्टा का विस्तृत विवरण देना।
  • प्रायद्वीपीय नदियों (नर्मदा, तापी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) के उद्गम, बेसिन और अपवाह प्रतिरूप को रेखांकित करना।
  • झारखंड की प्रमुख नदियों—दामोदर, स्वर्णरेखा और बराकर के महत्व तथा झीलों के आर्थिक लाभ और नदी प्रदूषण नियंत्रण को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अपवाह की मूल अवधारणाएं और जल विभ...
2 2. हिमालयी नदियां बनाम प्रायद्वीपीय...
3 3. हिमालयी नदी तंत्र: सिंधु, गंगा औ...
4 4. प्रायद्वीपीय नदियां (Peninsular...
5 5. झीलें, अर्थव्यवस्था में नदियों क...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अपवाह की मूल अवधारणाएं और जल विभाजक (Water Divide)

एक निश्चित नदी तंत्र द्वारा सिंचित क्षेत्र को अपवाह द्रोणी (Drainage Basin) कहा जाता है। विश्व की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी अमेज़न नदी (Amazon River) की है, जबकि भारत में सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी गंगा नदी की है।

जल विभाजक (Water Divide):

कोई भी ऊंचा क्षेत्र—जैसे पर्वत या उच्चभूमि—जब दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को एक-दूसरे से अलग करता है, तो उसे जल विभाजक कहते हैं। उदाहरण के लिए, अम्बाला नगर (Ambala) सिंधु तथा गंगा नदी तंत्रों के बीच जल विभाजक पर स्थित है। यहाँ से मैदान की ढाल इतनी मंद है कि अम्बाला से सुंदरवन तक 1,800 किमी की दूरी में ढाल में कुल गिरावट मात्र 300 मीटर है (अर्थात प्रत्येक 6 किमी पर मात्र 1 मीटर ढाल)।

अपवाह प्रतिरूप (Drainage Patterns):

  • द्रुमाकृतिक (Dendritic): जब नदी अपने सहायक नदियों के साथ वृक्ष की शाखाओं जैसी आकृति बनाती है (उदा. गंगा मैदान)।
  • जालीनुमा (Trellis): जब सहायक नदियां मुख्य नदी से लगभग समकोण पर मिलती हैं।
  • आयताकार (Rectangular): अत्यधिक संधित (Jointed) चट्टानी भूभाग पर बनता है।
  • अरीय (Radial): जब नदियां किसी केंद्रीय गुंबद या चोटी से निकलकर सभी दिशाओं में प्रवाहित होती हैं (उदा. अमरकंटक से नर्मदा व सोन)।

2. हिमालयी नदियां बनाम प्रायद्वीपीय नदियां: तुलनात्मक अध्ययन

भारत की नदियों को दो प्रमुख भौगोलिक वर्गों में विभाजित किया गया है:

लक्षणहिमालय की नदियां (Himalayan Rivers)प्रायद्वीपीय नदियां (Peninsular Rivers)
जल प्रवाह की प्रकृतिबारहमासी / सदानीरा (Perennial); इनमें वर्ष भर पानी रहता है क्योंकि इन्हें वर्षा के साथ-साथ ऊंचे पर्वतों से पिघलने वाली बर्फ से जल मिलता है।मौसमी (Seasonal); इनका प्रवाह पूर्णतः वर्षा पर निर्भर है। शुष्क मौसम में बड़ी नदियों का जल भी घटकर छोटी धाराओं में बदल जाता है।
लंबाई व मार्गलंबी नदियां हैं और स्रोत से समुद्र तक का इनका मार्ग बहुत लंबा है। ये तीव्र अपरदन करती हैं और विशाल गाद-बालू ढोती हैं।मार्ग उथले और अपेक्षाकृत छोटे हैं। कठोर चट्टानों के कारण अपरदन की दर कम होती है।
अवस्था व आकृतियांयुवावस्था में हैं; पर्वतों में गहरे गॉर्ज (महाखड्ड - V-shaped Valleys) बनाती हैं और मैदानों में विसर्प (Meanders), गोखुर झीलें (Ox-bow Lakes) तथा विशाल डेल्टा बनाती हैं।प्रौढ़ावस्था में हैं; नदियां अपनी घाटियों को चौड़ा व समतल कर चुकी हैं। पश्चिम वाहिनी नदियां ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।
प्रमुख उदाहरणसिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, कोसी, गंडक।नर्मदा, तापी, गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी, दामोदर।

3. हिमालयी नदी तंत्र: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र

1. सिंधु नदी तंत्र (The Indus River System):

  • उद्गम: तिब्बत में मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) के निकट से। यह पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में लद्दाख में प्रवेश करती है जहाँ एक दर्शनीय गॉर्ज बनाती है।
  • सहायक नदियां: कश्मीर क्षेत्र में जास्कर, नूब्रा, श्योक और हुंजा; पाकिस्तान में मिठानकोट के पास पंचनद—सतलुज, ब्यास, रावी, चेनाब और झेलम आपस में मिलकर सिंधु में मिलती हैं। अंत में कराची के पूर्व में अरब सागर में गिरती है।
  • लंबाई: कुल लंबाई 2,900 किलोमीटर है। इसका एक तिहाई से कुछ अधिक भाग भारत (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, पंजाब) में तथा शेष पाकिस्तान में स्थित है।
  • सिंधु जल संधि (1960): इस संधि के अनुसार भारत सिंधु नदी तंत्र के कुल जल का केवल 20 प्रतिशत उपयोग कर सकता है (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में सिंचाई हेतु)।

2. गंगा नदी तंत्र (The Ganga River System):

  • उद्गम: मुख्य धारा 'भागीरथी' (Bhagirathi) गंगोत्री हिमानी से निकलती है तथा अलकनंदा (Alaknanda) उत्तराखंड के देवप्रयाग में इससे मिलती है, जिसके बाद इसे गंगा कहा जाता है। हरिद्वार में गंगा पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदान में प्रवेश करती है।
  • प्रमुख सहायक नदियां:
    • यमुना: यमुनोत्री हिमानी से निकलती है, गंगा के समानांतर बहती है और प्रयागराज (इलाहाबाद) में दाहिने किनारे पर मिलती है।
    • नेपाल हिमालय की नदियां: घाघरा, गंडक और कोसी (बिहार का शोक) जो बाढ़ लाती हैं पर भूमि को उपजाऊ बनाती हैं।
    • प्रायद्वीपीय पठार की नदियां: चंबल, बेतवा और सोन (सोन नदी झारखंड व बिहार की सीमा के पास गंगा में मिलती है)।
  • लंबाई व विस्तार: गंगा की लंबाई 2,500 किलोमीटर से अधिक है। पश्चिम बंगाल के फरक्का में यह दो धाराओं में बंटती है: हुगली (भागीरथी-हुगली) दक्षिण की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है, जबकि मुख्य धारा बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहाँ इसे पद्मा और बाद में ब्रह्मपुत्र से मिलकर मेघना कहा जाता है।
  • सुंदरवन डेल्टा (Sundarban Delta): गंगा और ब्रह्मपुत्र द्वारा निर्मित डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला डेल्टा है। यहाँ सुंदरी वृक्षों के कारण इसे सुंदरवन कहते हैं। यह रॉयल बंगाल टाइगर का घर है।

3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (The Brahmaputra River System):

  • उद्गम: तिब्बत में मानसरोवर झील के पूर्व से (सिंधु और सतलुज के स्रोतों के निकट)। तिब्बत में इसे सांगपो (Tsangpo - शुद्ध करने वाली) कहा जाता है।
  • नामचा बरवा का यू-टर्न: नामचा बरवा शिखर (7,757 मी.) के पास पहुंचकर यह अंग्रेजी के 'U' अक्षर जैसा मोड़ बनाकर अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है, जहाँ इसे दिहांग कहा जाता है। असम में दिबांग, लोहित और केनुला से मिलकर यह ब्रह्मपुत्र बनती है।
  • माजुली द्वीप (Majuli Island): असम में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित माजुली द्वीप विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप (Inhabited River Island) है।
  • तिब्बत के शुष्क और शीत इलाके में इसमें जल और गाद की मात्रा कम होती है, परंतु भारत में भारी वर्षा वाले क्षेत्र से गुजरने पर इसमें जल और सिल्ट की अपार मात्रा बढ़ जाती है, जिससे असम और बांग्लादेश में प्रतिवर्ष विनाशकारी बाढ़ आती है।

4. प्रायद्वीपीय नदियां (Peninsular Rivers) एवं झारखंड की नदियां

प्रायद्वीपीय भारत में मुख्य जल विभाजक का निर्माण पश्चिमी घाट करता है। अधिकांश नदियां (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी) पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरकर डेल्टा बनाती हैं; जबकि केवल दो बड़ी नदियां—नर्मदा और तापी—पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं और ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।

1. नर्मदा बेसिन:

मध्य प्रदेश में अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलती है। यह एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है। जबलपुर के पास भेड़ाघाट में संगमरमर की चट्टानों (Marble Rocks) में यह गहरे गॉर्ज से बहती है तथा धुआंधार जलप्रपात (Dhuandhar Falls) बनाती है। इसकी लंबाई 1,312 किमी है।

2. तापी बेसिन:

मध्य प्रदेश के बेतूल जिले में सतपुड़ा की शृंखलाओं (मुलताई) से निकलती है। यह नर्मदा के समानांतर भ्रंश घाटी में बहती है। इसकी लंबाई 724 किमी है।

3. गोदावरी बेसिन (दक्षिण गंगा - Dakshin Ganga):

यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट की ढालों (त्र्यंबकेश्वर) से निकलती है। इसकी कुल लंबाई 1,500 किलोमीटर है। इसका 50% बेसिन महाराष्ट्र में, और शेष म.प्र., ओडिशा व आंध्र प्रदेश में है। इसके बड़े आकार और विस्तार के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' कहा जाता है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां पूर्णा, वर्धा, प्रानहिता, मांजरा, वेनगंगा और पेनगंगा हैं।

4. अन्य पूर्व वाहिनी नदियां:

  • महानदी: छत्तीसगढ़ की उच्चभूमि से निकलकर ओडिशा से बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है (लंबाई 860 किमी)।
  • कृष्णा नदी: महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के निकट से निकलती है (लंबाई 1,400 किमी)। तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मूसी और भीमा इसकी सहायक नदियां हैं।
  • कावेरी नदी: पश्चिमी घाट के ब्रह्मगिरि शृंखला से निकलती है (लंबाई 760 किमी)। अमरावती, भवानी, हेमावती और काबिनी इसकी सहायक नदियां हैं। यह शिवसमुद्रम जलप्रपात (Shivanasamudra Falls) बनाती है जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात है (पहला कुंचिकल)।

झारखंड की प्रमुख नदियां:

  • दामोदर नदी: छोटानागपुर पठार (लातेहार के टोरी क्षेत्र) से निकलती है। इसे अतीत में बाढ़ के कारण 'बंगाल का शोक' (Sorrow of Bengal) कहा जाता था। 1948 में भारत की पहली बहुउद्देशीय परियोजना दामोदर घाटी निगम (DVC) इसी पर बनी (तिलैया, मैथन, कोनार, पंचेत बांध)।
  • स्वर्णरेखा नदी: रांची के नगड़ी गांव से निकलती है। यह स्वतंत्र रूप से बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इस पर प्रसिद्ध हुंडरू जलप्रपात (Hundru Falls - 98 मी.) स्थित है। इसकी रेत में सोने के कण पाए जाने के कारण इसे स्वर्णरेखा कहा गया।
  • बराकर नदी: हजारीबाग के पद्मा से निकलती है और दामोदर की सबसे बड़ी सहायक नदी है (मैथन बांध इसी पर है)।

5. झीलें, अर्थव्यवस्था में नदियों की भूमिका एवं प्रदूषण

भारत में अनेक झीलें हैं जो आकार और अन्य लक्षणों में भिन्न हैं।

झीलों के प्रकार और प्रमुख उदाहरण:

  • मीठे पानी की प्राकृतिक झीलें (ग्लेशियल व विवर्तनिक): अधिकांश हिमालय क्षेत्र में हैं जो हिमानियों (Glaciers) द्वारा निर्मित हैं। जम्मू-कश्मीर की वूलर झील (Wular Lake) विवर्तनिक क्रिया (Tectonic Activity) से बनी है और यह भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है। डल झील, भीमताल, नैनीताल, लोकताक (मणिपुर) और बड़ापानी अन्य प्रमुख मीठे पानी की झीलें हैं।
  • खारे पानी की लैगून झीलें (तटीय): समुद्र तटीय स्पिट और रोधिका द्वारा निर्मित लैगून—ओडिशा की चिल्का झील (Chilika Lake), आंध्र प्रदेश की पुलीकट झील (Pulicat Lake) तथा कोलेरू झील।
  • लवण झीलें (मरुस्थलीय): राजस्थान की सांभर झील (Sambhar Lake) एक अंतर्देशीय खारे पानी की झील है, जिसके जल का उपयोग नमक बनाने के लिए किया जाता है।
  • मानव निर्मित जलाशय: जल-विद्युत उत्पादन हेतु बनाए गए बांध—जैसे भाखड़ा नांगल परियोजना की गोविंद सागर झील, तथा झारखंड में तिलैया और मैथन जलाशय।

नदी प्रदूषण और संरक्षण (NRCP व नमामि गंगे):

नदियों के जल की घरेलू, औद्योगिक और कृषि मांग बढ़ने से जल की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। बिना उपचारित किए शहरों का सीवेज और कारखानों का विषैला रासायनिक अपशिष्ट नदियों में बहाया जा रहा है।

  • गंगा कार्य योजना (GAP): 1985 में शुरू की गई थी। 1995 में इसका विस्तार करके राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP) बनाई गई।
  • नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange): 2014 में केंद्र सरकार द्वारा एक एकीकृत संरक्षण मिशन के रूप में स्वीकृत किया गया जिसका उद्देश्य गंगा के प्रदूषण को समाप्त करना और नदी का कायाकल्प करना है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

सिंधु नदी
लंबाई: 2,900 किमी | उद्गम: मानसरोवर (तिब्बत)
1960 की सिंधु जल संधि द्वारा भारत 20% जल उपयोग कर सकता है।
गंगा नदी
लंबाई: 2,500+ किमी | उद्गम: गंगोत्री (भागीरथी)
देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है; भारत की सबसे बड़ी द्रोणी।
ब्रह्मपुत्र नदी
तिब्बत में सांगपो, असम में ब्रह्मपुत्र
विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप 'माजुली' (असम) इसी में स्थित है।
गोदावरी नदी
लंबाई: 1,500 किमी | 'दक्षिण गंगा'
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी; नासिक (त्र्यंबकेश्वर) से उद्गम।
सुंदरवन डेल्टा
गंगा-ब्रह्मपुत्र द्वारा निर्मित
विश्व का सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता डेल्टा; रॉयल बंगाल टाइगर का आवास।
वूलर झील
जम्मू और कश्मीर (विवर्तनिक उत्पत्ति)
भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): हिमालय की नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों के बीच किन्हीं तीन मुख्य अंतरों को स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के बीच तीन प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. जल प्रवाह की निरंतरता: हिमालय की नदियां बारहमासी (सदानीरा) होती हैं क्योंकि उन्हें वर्षा के अलावा ग्लेशियरों के पिघलने से जल मिलता है। इसके विपरीत, प्रायद्वीपीय नदियां मौसमी होती हैं और केवल वर्षा पर निर्भर करती हैं।
  2. मार्ग एवं अपरदन: हिमालयी नदियां बहुत लंबी हैं और पहाड़ों को काटकर गहरे 'गॉर्ज' बनाती हैं तथा भारी मात्रा में गाद बहाती हैं। प्रायद्वीपीय नदियों का मार्ग अपेक्षाकृत छोटा, उथला और स्थिर होता है।
  3. मुहाने पर आकृति: अधिकांश हिमालयी नदियां (गंगा, ब्रह्मपुत्र) मुहाने पर विशाल डेल्टा बनाती हैं; जबकि प्रायद्वीपीय पश्चिम वाहिनी नदियां (नर्मदा, तापी) ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): गंगा नदी तंत्र का सविस्तार वर्णन कीजिए। इसकी प्रमुख सहायक नदियों और सुंदरवन डेल्टा के महत्व को समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे विशाल और महत्वपूर्ण अपवाह तंत्र है:

1. उद्गम एवं संगम:

गंगा की मुख्य धारा 'भागीरथी' गंगोत्री हिमानी से निकलती है। उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी भागीरथी से मिलती है और यहाँ से यह संयुक्त धारा 'गंगा' कहलाती है। हरिद्वार में गंगा पहली बार मैदानों में प्रवेश करती है। इसकी कुल लंबाई 2,500 किमी से अधिक है।

2. प्रमुख सहायक नदियां:

  • दाहिने किनारे की नदियां: यमुना (यमुनोत्री से निकलकर प्रयागराज में मिलती है) और सोन नदी (मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलकर पटना के पास मिलती है)।
  • बाएं किनारे की नदियां: घाघरा, गंडक और कोसी जो नेपाल हिमालय से निकलती हैं और अत्यधिक उपजाऊ जलोढ़ मृदा लाती हैं।

3. पश्चिम बंगाल में विभाजन और सुंदरवन डेल्टा:

पश्चिम बंगाल के फरक्का में गंगा दो भागों में बंटती है—हुगली और पद्मा। बांग्लादेश में पद्मा ब्रह्मपुत्र (जमुना) से मिलकर 'मेघना' बनाती है।

4. सुंदरवन डेल्टा का महत्व:

गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियां मिलकर विश्व के सबसे बड़े डेल्टा—'सुंदरवन डेल्टा' का निर्माण करती हैं। यह सुंदरी मैंग्रोव वृक्षों, समृद्ध जैव विविधता और रॉयल बंगाल टाइगर का विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक वास स्थल है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): गोदावरी नदी को 'दक्षिण गंगा' क्यों कहा जाता है? इसके बेसिन की मुख्य विशेषताएं बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

'दक्षिण गंगा' कहे जाने का कारण:

गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी (1,500 किलोमीटर) है। इसके विशाल जल-ग्रहण क्षेत्र (अपवाह द्रोणी), विशाल लंबाई और धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के कारण इसकी तुलना उत्तर भारत की गंगा से की जाती है और इसे 'दक्षिण गंगा' (Dakshin Ganga) कहा जाता है।

बेसिन की मुख्य विशेषताएं:

  • उद्गम: महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट के त्र्यंबकेश्वर से।
  • विस्तार: इसका लगभग 50% बेसिन महाराष्ट्र में, और शेष मध्य प्रदेश, ओडिशा व आंध्र प्रदेश में है।
  • सहायक नदियां: पूर्णा, वर्धा, प्रानहिता, मांजरा, वेनगंगा और पेनगंगा। अंत में यह बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाती है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): झारखंड की प्रमुख नदियों—दामोदर और स्वर्णरेखा के उद्गम, प्रवाह और आर्थिक व पर्यावरणीय महत्व की समीक्षा कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. दामोदर नदी:

  • उद्गम व प्रवाह: छोटानागपुर पठार (लातेहार के टोरी क्षेत्र) से निकलकर झारखंड (हजारीबाग, रामगढ़, धनबाद, बोकारो) से होते हुए पश्चिम बंगाल में हुगली नदी में मिलती है।
  • महत्व: 1948 में स्थापित दामोदर घाटी निगम (DVC) के तहत तिलैया, मैथन, कोनार और पंचेत बांध बने जिससे बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल-विद्युत का विकास हुआ।
  • चुनौती: कोयला खदानों और उद्योगों के कचरे के कारण यह अत्यधिक प्रदूषित नदी बन गई है।

2. स्वर्णरेखा नदी:

  • उद्गम व प्रवाह: रांची जिले के नगड़ी गांव से निकलती है और झारखंड, ओडिशा व पश्चिम बंगाल से बहते हुए स्वतंत्र रूप से बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • महत्व: रांची के निकट इस पर प्रसिद्ध हुंडरू जलप्रपात (98 मीटर) स्थित है। जमशेदपुर का विशाल औद्योगिक नगर इसी के तट पर बसा है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नर्मदा और तापी नदियों को बंगाल की खाड़ी में गिरते हुए बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नर्मदा और तापी दोनों पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां हैं जो भ्रंश घाटी से होकर अरब सागर (खंभात की खाड़ी) में गिरती हैं और डेल्टा नहीं बल्कि ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

'दक्षिण गंगा' (गोदावरी) और 'दक्षिण भारत की गंगा' (कावेरी) में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के अनुसार गोदावरी को उसके विशाल आकार व विस्तार के कारण 'दक्षिण गंगा' कहा जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भागीरथी और अलकनंदा के संगम स्थल को हरिद्वार लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भागीरथी और अलकनंदा का संगम 'देवप्रयाग' में होता है, जहाँ से इसे गंगा कहा जाता है। हरिद्वार वह स्थान है जहाँ गंगा पहली बार मैदानों में उतरती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

माजुली द्वीप को समुद्र का द्वीप समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

माजुली असम में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित एक 'नदीय द्वीप' (Riverine Island) है जो विश्व का सबसे बड़ा आबाद नदी द्वीप है।

भारत का अपवाह तंत्र: हिमालयी एवं प्रायद्वीपीय नदी बेसिन

भारत का अपवाह तंत्र: हिमालयी एवं प्रायद्वीपीय नदियां, डेल्टा एवं झीलें 1. हिमालयी नदी तंत्र (सदानीरा) • सिंधु तंत्र (2,900 किमी): - मानसरोवर झील (तिब्बत) से उद्गम - पंचनद (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) - 1960 सिंधु जल संधि (भारत = 20% जल) • गंगा तंत्र (2,500+ किमी): - देवप्रयाग: भागीरथी + अलकनंदा - सहायक: यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन - सुंदरवन डेल्टा (विश्व का सबसे बड़ा) • ब्रह्मपुत्र तंत्र (सांगपो): - नामचा बरवा के पास U-टर्न गॉर्ज - माजुली: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप अम्बाला: सिंधु व गंगा का जल विभाजक बर्फ व वर्षा दोनों से जल की आपूर्ति 2. प्रायद्वीपीय नदियां (मौसमी) • पश्चिम वाहिनी (अरब सागर - Estuary): 1. नर्मदा (1312 किमी, अमरकंटक, धुआंधार) 2. तापी (724 किमी, बेतूल मुलताई भ्रंश) • पूर्व वाहिनी (बंगाल खाड़ी - Delta): - गोदावरी (1500 किमी - 'दक्षिण गंगा') त्र्यंबकेश्वर नासिक से उद्गम, सबसे बड़ी - महानदी (860 किमी - ओडिशा) - कृष्णा (1400 किमी - महाबलेश्वर) - कावेरी (760 किमी - शिवसमुद्रम प्रपात) झारखंड की नदियां • दामोदर (बंगाल का शोक, DVC बांध) • स्वर्णरेखा (हुंडरू जलप्रपात, स्वर्ण कण) • बराकर (मैथन व तिलैया जलाशय) 3. भारत की झीलें व संरक्षण • मीठे पानी की झीलें: - वूलर झील (J&K - सबसे बड़ी मीठी झील) - डल, नैनीताल, भीमताल, लोकताक • खारे पानी की झीलें: - चिल्का झील (ओडिशा - सबसे बड़ी लैगून) - सांभर झील (राजस्थान - नमक निर्माण) - पुलीकट व कोलेरू (पूर्वी तट) • नदी प्रदूषण व संरक्षण योजनाएं: - सीवेज व रासायनिक अपशिष्ट का खतरा - 1985: गंगा कार्य योजना (GAP) - 1995: राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP) - 2014: नमामि गंगे एकीकृत मिशन जीवनदायिनी नदियों का संरक्षण अनिवार्य

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
एक नदी तंत्र द्वारा सिंचित क्षेत्र को 'अपवाह द्रोणी' (Drainage Basin) कहते हैं; अम्बाला नगर सिंधु और गंगा तंत्र के बीच 'जल विभाजक' है।
मुख्य बिंदु 2
हिमालय की नदियां (सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र) बर्फ पिघलने के कारण बारहमासी (सदानीरा) हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियां केवल मौसमी वर्षा पर निर्भर हैं।
मुख्य बिंदु 3
सिंधु नदी मानसरोवर के निकट से निकलकर पाकिस्तान होते हुए अरब सागर में गिरती है; 1960 की संधि के तहत भारत इसके 20% जल का उपयोग करता है।
मुख्य बिंदु 4
भागीरथी और अलकनंदा देवप्रयाग में मिलकर गंगा बनती हैं; गंगा की लंबाई 2,500 किमी से अधिक है और यमुना इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी है।
मुख्य बिंदु 5
गंगा और ब्रह्मपुत्र मिलकर विश्व के सबसे बड़े 'सुंदरवन डेल्टा' का निर्माण करती हैं, जो मैंग्रोव वनों और रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास है।
मुख्य बिंदु 6
ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांगपो कहा जाता है; असम में स्थित 'माजुली' विश्व का सबसे बड़ा आबाद नदीय द्वीप है।
मुख्य बिंदु 7
नर्मदा (अमरकंटक) और तापी (बेतूल) पश्चिम की ओर भ्रंश घाटी में बहकर अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।
मुख्य बिंदु 8
गोदावरी (1,500 किमी) प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और इसके विशाल आकार के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 9
झारखंड की दामोदर नदी (बंगाल का शोक, 1948 DVC परियोजना) और स्वर्णरेखा नदी (हुंडरू जलप्रपात) राज्य की प्रमुख नदियां हैं।
मुख्य बिंदु 10
जम्मू-कश्मीर की वूलर झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है, जबकि ओडिशा की चिल्का झील सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भागीरथी और अलकनंदा नदियां किस स्थान पर आपस में मिलकर 'गंगा' के नाम से प्रवाहित होती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
उत्तराखंड के देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा नदियों का संगम होता है, जहाँ से संयुक्त धारा को गंगा कहा जाता है।
2
प्रायद्वीपीय भारत की किस सबसे लंबी नदी को उसके विशाल आकार और विस्तार के कारण 'दक्षिण गंगा' (Dakshin Ganga) कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
गोदावरी नदी की कुल लंबाई 1,500 किमी है और इसके विशाल अपवाह बेसिन के कारण इसे 'दक्षिण गंगा' कहा जाता है।
3
असम में ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित विश्व के सबसे बड़े आबाद नदीय द्वीप (Riverine Island) का क्या नाम है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित माजुली द्वीप (Majuli Island) विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप है जहाँ मानव आबादी निवास करती है।
4
भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील (Freshwater Lake) कौन-सी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
जम्मू-कश्मीर में स्थित वूलर झील (Wular Lake) विवर्तनिक क्रिया से निर्मित भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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