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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

फ्रांसीसी क्रांति

14 जुलाई 1789 की सुबह पेरिस नगर में आतंक का माहौल था। बास्तील के किले (Bastille Fort) के पतन के साथ ही आधुनिक विश्व इतिहास की सबसे युगांतरकारी घटना—फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution) का सूत्रपात हुआ। यह अध्याय 18वीं सदी के उत्तरार्ध में फ्रांसीसी समाज की विषम सामाजिक-आर्थिक संरचना, प्राचीन राजतंत्र (Old Regime) के निरंकुश लुई 16वें (Louis XVI) के शासन, एस्टेट्स जनरल (Estates General) के बहिष्कार, नेशनल असेंबली द्वारा 'मनुष्य और नागरिक अधिकारों की घोषणा', रोबेसपियर (Maximilien Robespierre) के आतंक के राज (Reign of Terror), डायरेक्टरी के शासन और अंततः नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) के उदय का सांगोपांग ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और बंधुत्व (Fraternity) के जिन आदर्शों को इस क्रांति ने जन्म दिया, वे आज आधुनिक विश्व के लोकतांत्रिक संविधानों की आधारशिला हैं। झारखंड बोर्ड (CBSE) परीक्षा में इस अध्याय से दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जैसे 'फ्रांसीसी क्रांति के सामाजिक एवं आर्थिक कारण', 'बास्तील के पतन का महत्व', 'आतंक के राज की समीक्षा' तथा मानचित्र कार्य प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

बास्तील का विध्वंस: एक जेल का पतन जिसने राजशाही की जड़ें हिला दीं

कल्पना कीजिए 14 जुलाई 1789 के उस ऐतिहासिक प्रभात की जब लगभग 7,000 पेरिसवासियों की एक सशस्त्र भीड़ बास्तील के भयानक मध्यकालीन किले की ओर कूच कर रही थी। बास्तील केवल ईंट-पत्थर की कोई साधारण जेल नहीं थी; वह बोरबॉन राजवंश के निरंकुश अत्याचार, अन्याय और स्वेच्छाचारिता का सबसे घृणित प्रतीक थी। भीड़ ने कमांडर को मौत के घाट उतार दिया, कैदियों को मुक्त कराया और किले के एक-एक पत्थर को ढहाकर बाजार में स्मृति-चिह्न (Souvenirs) के रूप में बेच दिया। एक किले के पतन ने उस राजवंश का अंत तय कर दिया जिसने फ्रांस पर शताब्दियों तक एकछत्र शासन किया था।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

फ्रांसीसी क्रांति केवल फ्रांस के इतिहास का एक अध्याय नहीं है, अपितु यह आधुनिक विश्व की राजनीतिक चेतना की जननी है। सामंतवाद (Feudalism) का अंत, धर्मनिरपेक्ष राज्य की अवधारणा, मताधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता, और मानव अधिकारों का सार्वभौमिकरण—ये सभी मूल्य इसी क्रांति की देन हैं। भारत के स्वाधीनता संग्राम में टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) और राजा राममोहन राय (Raja Ram Mohan Roy) जैसे दिग्गजों ने फ्रांसीसी क्रांति के विचारों से अत्यधिक प्रेरणा प्राप्त की थी। CBSE बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय का भारांक (Weightage) इतिहास खंड में 5 से 8 अंकों का होता है, जिसमें विश्लेषणात्मक व स्रोत-आधारित प्रश्न शामिल होते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 18वीं सदी के यूरोप में सामंतवादी समाज की तीन श्रेणियों (Three Estates) की बुनियादी समझ।
  • राजशाही (Monarchy) और निरंकुश शासन (Autocracy) की मूल अवधारणा।
  • दार्शनिकों जैसे जॉन लॉक, रूसो और मॉन्टेस्क्यू के लोकतांत्रिक विचारों का प्राथमिक ज्ञान।
  • यूरोप के मानचित्र पर फ्रांस, पेरिस, वर्साय, बोर्दो और नान्तेस की भौगोलिक स्थिति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • 18वीं सदी के उत्तरार्ध में फ्रांसीसी समाज के तीनों एस्टेट्स (पादरी, कुलीन एवं जनसाधारण) के विशेषाधिकारों व कर-प्रणाली का तुलनात्मक विश्लेषण करना।
  • 1789 की क्रांति के तात्कालिक, आर्थिक (जीविका संकट), सामाजिक तथा बौद्धिक कारणों को क्रमबद्ध रूप से स्पष्ट करना।
  • टेनिस कोर्ट की शपथ (Tennis Court Oath) और नेशनल असेंबली द्वारा फ्रांस को संवैधानिक राजतंत्र बनाने की प्रक्रिया को समझना।
  • रोबेसपियर के नेतृत्व में जैकोबिन शासन (आतंक का राज - 1793-1794) की नीतियों, गिलोटिन के प्रयोग और उसके पतन का मूल्यांकन करना।
  • फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका, दास प्रथा का उन्मूलन (Abolition of Slavery) तथा आम जनजीवन पर क्रांति के प्रभाव को रेखांकित करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में फ्...
2 2. जीविका संकट और दार्शनिकों का वैच...
3 3. क्रांति की शुरुआत: एस्टेट्स जनरल...
4 4. फ्रांस संवैधानिक राजतंत्र बनता ह...
5 5. राजतंत्र का उन्मूलन, गणतंत्र की...
6 6. डायरेक्टरी का शासन, महिलाओं की भ...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में फ्रांसीसी समाज और प्राचीन व्यवस्था (Old Regime)

1774 में बोरबॉन राजवंश (Bourbon Dynasty) का 20 वर्षीय युवा लुई 16वाँ (Louis XVI) फ्रांस के राजसिंहासन पर आसीन हुआ। उसका विवाह ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी आंतवानेत (Marie Antoinette) से हुआ था। गद्दी संभालने पर उसे राजकोष पूरी तरह खाली मिला।

राजकोष रिक्त होने के प्रमुख ऐतिहासिक कारण:

  • दीर्घकालीन युद्ध: फ्रांस लंबे समय से ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय शक्तियों के साथ युद्धों में उलझा रहा, जिसने वित्तीय संसाधनों को निचोड़ दिया था।
  • अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में सहायता: लुई 16वें के शासनकाल में फ्रांस ने ब्रिटेन के विरुद्ध अमेरिका के 13 उपनिवेशों को स्वतंत्रता दिलाने में आर्थिक व सैन्य मदद दी, जिससे फ्रांस पर 10 अरब लिव्रे (Livre) से अधिक का नया कर्ज चढ़ गया। कुल कर्ज 2 अरब लिव्रे से अधिक पहुंच चुका था।
  • शान-शौकत का बेहिसाब खर्च: वर्साय (Versailles) के विशाल राजमहल और राजदरबार के विलासितापूर्ण रख-रखाव पर अपार धन व्यय होता था।
  • ऋणदाताओं की ब्याज दर: राज्य को कर्ज देने वाले अब 10 प्रतिशत ब्याज की मांग करने लगे थे, जिससे बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में ही चला जाता था।

फ्रांसीसी समाज का तीन एस्टेट्स में विभाजन:

एस्टेट (Estate)वर्ग / श्रेणीजनसंख्या व भूमि अनुपातविशेषाधिकार व कर दायित्व
प्रथम एस्टेट (First Estate)पादरी वर्ग (Clergy - चर्च के अधिकारी)जनसंख्या 1% से कम; लगभग 10% भूमि पर स्वामित्वजन्मना सभी करों से पूर्ण मुक्ति; किसानों से 'टाइद' (Tithe) नामक धार्मिक कर वसूलने का अधिकार।
द्वितीय एस्टेट (Second Estate)कुलीन वर्ग (Nobility - सामंत, दरबारी, सेनापति)जनसंख्या 2% से कम; कुलीनों, चर्च और अमीरों के पास 60% भूमिराज्य को प्रत्यक्ष करों से छूट; किसानों से सामंती शुल्क (Feudal Dues) वसूलना तथा बेगार कराना।
तृतीय एस्टेट (Third Estate)बड़े व्यवसायी, वकील, डॉक्टर, मध्यम वर्ग, किसान, शिल्पी, छोटे किसान व भूमिहीन मजदूरजनसंख्या का 90% हिस्सा किसान थे, किंतु अधिकांश के पास अपनी भूमि नहीं थीकोई विशेषाधिकार नहीं; राज्य का संपूर्ण वित्तीय बोझ इसी वर्ग पर! प्रत्यक्ष कर 'ताइल' (Taille) और नमक-तंबाकू पर अप्रत्यक्ष कर।

2. जीविका संकट और दार्शनिकों का वैचारिक योगदान

18वीं सदी के दौरान फ्रांस में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई। 1715 में जो आबादी 2.3 करोड़ थी, वह 1789 में बढ़कर 2.8 करोड़ हो गई। अनाज उत्पादन मांग की तुलना में पिछड़ गया।

जीविका संकट (Subsistence Crisis) की शृंखला:

पावलोटी (Bread), जो जनसाधारण का मुख्य आहार थी, की कीमतें आसमान छूने लगीं। कारखानों में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी महंगाई की दर से नहीं बढ़ रही थी। जब भी सूखे या ओले का प्रकोप होता, फसल बर्बाद हो जाती थी। इससे जीविका संकट उत्पन्न हो जाता था—अर्थात ऐसी चरम स्थिति जब जीवित रहने के न्यूनतम साधन भी खतरे में पड़ जाते थे। भुखमरी और दंगों ने जनता के असंतोष को विस्फोट की सीमा तक पहुंचा दिया।

दार्शनिकों के क्रांतिकारी विचार:

18वीं सदी के मध्यम वर्ग—जिसमें व्यापारी, रेशम व ऊनी वस्त्र निर्माता, वकील और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे—ने शिक्षित होकर सामाजिक विशेषाधिकारों पर प्रहार किया। प्रमुख विचारकों ने जनता को नए विकल्प दिए:

  • जॉन लॉक (John Locke): अपनी पुस्तक 'टू ट्रीटाइजेज़ ऑफ़ गवर्नमेंट' (Two Treatises of Government) में लॉक ने राजा के दैवी और निरंकुश अधिकारों के सिद्धांत (Doctrine of the Divine and Absolute Right of the Monarch) का खंडन किया।
  • जीन जैक्स रूसो (Jean Jacques Rousseau): रूसो ने अपनी अमर कृति 'सामाजिक अनुबंध' (The Social Contract) में एक ऐसी सरकार का प्रस्ताव रखा जो जनता और उसके प्रतिनिधियों के बीच सामाजिक समझौते पर आधारित हो। उन्होंने 'एक व्यक्ति, एक वोट' का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
  • मॉन्टेस्क्यू (Montesquieu): अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ़ द लॉज़' (The Spirit of the Laws) में मॉन्टेस्क्यू ने सरकार के भीतर शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) का सिद्धांत दिया—अर्थात विधायिका (Legislature), कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका (Judiciary) के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन। इसी मॉडल को अमेरिका के स्वतंत्र संविधान ने अपनाया था।

इन विचारों पर पेरिस के सैलूनों (Salons) और कॉफी-घरों में गर्मागर्म बहसें होती थीं और इन्हें अनपढ़ लोगों के लाभ के लिए अखबारों व पुस्तकों से जोर-जोर से पढ़कर सुनाया जाता था।

3. क्रांति की शुरुआत: एस्टेट्स जनरल से नेशनल असेंबली तक

फ्रांसीसी प्राचीन व्यवस्था के नियमानुसार राजा अपनी मर्जी से नया कर नहीं लगा सकता था। इसके लिए उसे एस्टेट्स जनरल (Estates General) की बैठक बुलानी पड़ती थी, जिसकी पिछली बैठक 1614 में हुई थी।

5 मई 1789: एस्टेट्स जनरल की ऐतिहासिक बैठक:

लुई 16वें ने नए करों के प्रस्ताव हेतु वर्साय के शीशमहल (Hall of Mirrors) में बैठक बुलाई। प्रथम एस्टेट के 300 और द्वितीय एस्टेट के 300 प्रतिनिधि आमने-सामने की कतारों में बैठे, जबकि तृतीय एस्टेट के 600 प्रतिनिधि पीछे खड़े रहे। तृतीय एस्टेट का प्रतिनिधित्व समृद्ध और शिक्षित वर्ग कर रहा था; किसानों, औरतों व कारीगरों का सभा में प्रवेश वर्जित था, हालांकि उनकी शिकायतें 40,000 पत्रों के माध्यम से लाई गई थीं।

मतदान प्रणाली पर विवाद और बहिष्कार:

प्राचीन परंपरा के अनुसार प्रत्येक एस्टेट को केवल एक वोट (One Estate = One Vote) देने का अधिकार था। इसका अर्थ था कि प्रथम और द्वितीय एस्टेट मिलकर 2-1 से तृतीय एस्टेट को पराजित कर देते। परंतु इस बार तृतीय एस्टेट ने मांग की कि पूरी सभा द्वारा सामूहिक मतदान कराया जाए और प्रत्येक सदस्य को एक वोट का अधिकार मिले (रूसो के लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुरूप)। जब राजा ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो तृतीय एस्टेट के सदस्य विरोध स्वरूप सभा छोड़कर बाहर चले गए।

20 जून 1789: टेनिस कोर्ट की शपथ (Tennis Court Oath):

तृतीय एस्टेट के प्रतिनिधि वर्साय के एक इंडोर टेनिस कोर्ट में एकत्रित हुए। उन्होंने स्वयं को नेशनल असेंबली (National Assembly) घोषित कर दिया और शपथ ली कि जब तक वे फ्रांस के लिए ऐसा संविधान तैयार नहीं कर लेंगे जो राजा की निरंकुश शक्तियों को सीमित करे, तब तक वे अलग नहीं होंगे। उनका नेतृत्व मिराब्यो (Mirabeau) (जो कुलीन परिवार में जन्मा था पर सामंती विशेषाधिकारों का विरोधी था) और आबे सिएए (Abbé Sieyès) (एक पादरी, जिसने प्रसिद्ध पैम्फलेट 'तीसरा एस्टेट क्या है?' (What is the Third Estate?) लिखा था) ने किया।

14 जुलाई 1789: बास्तील का पतन और महान भय (Great Fear):

कड़ाके की ठंड के कारण फसल नष्ट हो चुकी थी, पावलोटी के दाम बढ़ गए थे और बेकर्स जमाखोरी कर रहे थे। घंटों कतारों में खड़ी गुस्साई औरतों की भीड़ ने दुकानों पर धावा बोल दिया। दूसरी तरफ राजा ने सेना को पेरिस में प्रवेश का आदेश दिया था। अफवाह उड़ी कि सेना नागरिकों पर गोलियां चलाने वाली है। इसी आक्रोश में 14 जुलाई को बास्तील के किले को ध्वस्त कर दिया गया। देहाती इलाकों में 'महान भय' (The Great Fear) फैल गया कि सामंतों के भाड़े के लठैत पकी फसलें तबाह करने आ रहे हैं। किसानों ने अन्न भंडारों को लूट लिया और लगान संबंधी अभिलेखों को जलाकर खाक कर दिया। विवश होकर लुई 16वें ने नेशनल असेंबली को मान्यता दी।

4 अगस्त 1789 की रात्रि का ऐतिहासिक आदेश:

नेशनल असेंबली ने एक ऐतिहासिक डिक्री पारित करके सामंती व्यवस्था, विशेषाधिकारों और धार्मिक कर (Tithe) को समाप्त कर दिया। चर्च की लगभग 20 अरब लिव्रे मूल्य की संपत्ति राज्य के अधिकार में आ गई।

4. फ्रांस संवैधानिक राजतंत्र बनता है और नागरिक अधिकारों की घोषणा

नेशनल असेंबली ने 1791 में संविधान का प्रारूप पूरा किया। इसका मुख्य उद्देश्य राजा की शक्तियों को सीमित करना और शक्तियों को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में विभाजित करना था। फ्रांस अब संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) बन गया।

सक्रिय और निष्क्रिय नागरिक (Active vs Passive Citizens):

  • सक्रिय नागरिक (Active Citizens): 25 वर्ष से अधिक आयु के वे पुरुष जो कम से कम 3 दिन की मजदूरी के बराबर प्रत्यक्ष कर चुकाते थे। केवल इन्हीं को वोट देने का अधिकार था (लगभग 2.8 करोड़ की आबादी में केवल 40 लाख पुरुष)।
  • निष्क्रिय नागरिक (Passive Citizens): शेष सभी पुरुष और समस्त महिलाएं निष्क्रिय नागरिक थीं, जिन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं था।

मनुष्य एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा (Declaration of the Rights of Man and Citizen):

1791 के संविधान की प्रस्तावना इस ऐतिहासिक घोषणा से शुरू हुई। प्रमुख नैसर्गिक और अहरणीय अधिकार (Natural and Inalienable Rights) निम्नलिखित थे:

  1. जीवन का अधिकार (Right to Life)।
  2. अभिव्यक्ति व विचार की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Opinion)।
  3. कानून के समक्ष समानता (Equality before Law)।
  4. राज्य का यह परम कर्तव्य घोषित किया गया कि वह प्रत्येक नागरिक के इन नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा करे।

5. राजतंत्र का उन्मूलन, गणतंत्र की स्थापना और आतंक का राज (Reign of Terror)

यद्यपि लुई 16वें ने संविधान पर हस्ताक्षर कर दिए थे, किंतु उसने गुप्त रूप से प्रशिया (Prussia) के राजा के साथ षड्यंत्र रचा। ऑस्ट्रिया और अन्य पड़ोसी देश भी फ्रांस की घटनाओं से भयभीत थे। इससे पहले कि वे हमला करते, नेशनल असेंबली ने अप्रैल 1792 में प्रशिया और ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। हजारों स्वयंसेवी सेना में भर्ती हुए और देशभक्ति का गीत 'मार्सीले' (Marseillaise) गाते हुए कूच किया (जिसे कवि रोजेट डि लायल ने लिखा था, जो आज फ्रांस का राष्ट्रगान है)।

जैकोबिन क्लब (The Jacobin Club) और सॉ-कुलॉत:

राजनीतिक क्लबों में सबसे सफल था जैकोबिन क्लब, जिसका नाम पेरिस के भूतपूर्व कॉन्वेंट ऑफ सेंट जेकब के नाम पर पड़ा। इसके सदस्य मुख्य रूप से समाज के कम समृद्ध तबकों से आते थे—जैसे छोटे दुकानदार, कारीगर, जूता बनाने वाले, पेस्ट्री बनाने वाले, दिहाड़ी मजदूर। इनका नेता मैक्सिमिलियन रोबेसपियर (Maximilien Robespierre) था। जैकोबिनों ने घुटने तक पहने जाने वाले ब्रिचेस (घुटन्ना) के स्थान पर बिना घुटने वाली लंबी धारीदार पतलून पहनी, इसलिए उन्हें 'सॉ-कुलॉत' (Sans-culottes - बिना घुटने वाले) कहा गया। वे लाल टोपी भी पहनते थे जो स्वतंत्रता का प्रतीक थी।

1792: राजतंत्र का अंत और गणतंत्र की घोषणा:

10 अगस्त 1792 को जैकोबिनों ने ट्यूलरी के महल पर धावा बोला, राजा के अंगरक्षकों को मार डाला और राजा को बंधक बना लिया। नए चुनाव कराए गए जिसमें 21 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पुरुषों को, चाहे उनके पास संपत्ति हो या न हो, मतदान का अधिकार मिला। नवनिर्वाचित सभा को कन्वेंशन (Convention) कहा गया। 21 सितंबर 1792 को राजतंत्र का पूर्ण उन्मूलन कर फ्रांस को एक गणतंत्र (Republic) घोषित किया गया। 21 जनवरी 1793 को लुई 16वें को देशद्रोह (Treason) के आरोप में सार्वजनिक रूप से 'प्लेस डे ला कॉनकॉर्ड' पर फांसी दे दी गई। बाद में रानी मेरी आंतवानेत का भी वही हश्र हुआ।

आतंक का राज (1793 से 1794 - The Reign of Terror):

रोबेसपियर ने नियंत्रण और दंड की अत्यधिक सख्त नीति अपनाई। जो भी गणतंत्र के शत्रु समझे जाते—कुलीन, पादरी, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य या उसकी कार्यशैली से असहमत जैकोबिन—उन्हें गिरफ्तार किया जाता, क्रांतिकारी न्यायाधिकरण द्वारा मुकदमा चलाया जाता और दोषी पाए जाने पर गिलोटिन (Guillotine) पर चढ़ा दिया जाता। (गिलोटिन दो खंभों के बीच लटकते आरे वाला यंत्र था, जिसका आविष्कार डॉ. गिलोटिन ने किया था)।

रोबेसपियर द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधार व कठोर नियम:

  • मजदूरी और कीमतों की अधिकतम सीमा (Ceiling) तय कर दी गई।
  • मांस और पावलोटी की राशनिंग की गई। किसानों को अपना अनाज शहरों में तय कीमतों पर बेचने के लिए बाध्य किया गया।
  • महंगे सफेद आटे के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई; सभी के लिए साबुत गेहूं की 'समता रोटी' (Pain d'égalité) खाना अनिवार्य कर दिया गया।
  • सर (Monsieur) और मैडम (Madame) जैसे पारंपरिक संबोधनों के स्थान पर 'सिटॉयन' (Citoyen - नागरिक) और 'सिटॉयेन' (Citoyenne - नागरिक महिला) शब्द अनिवार्य किए गए।
  • चर्चों को बंद कर दिया गया और उनके भवनों को बैरक या दफ्तर बना दिया गया।

रोबेसपियर की नीतियां इतनी क्रूर हो गईं कि उसके समर्थक भी त्राहि-त्राहि करने लगे। अंततः जुलाई 1794 में न्यायालय द्वारा उसे दोषी ठहराया गया और अगले ही दिन उसे गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया।

6. डायरेक्टरी का शासन, महिलाओं की भूमिका और दास प्रथा का उन्मूलन

जैकोबिन सरकार के पतन के बाद मध्यम वर्ग के संपन्न तबके के पास सत्ता आ गई। नया संविधान बना जिसने संपत्तिहीन तबके को फिर मताधिकार से वंचित कर दिया। दो चुनी हुई विधान परिषदों ने 5 सदस्यों वाली एक कार्यपालिका बनाई जिसे डायरेक्टरी (Directory) कहा गया। परंतु डायरेक्टर्स का विधान परिषदों से निरंतर झगड़ा होता रहा, जिससे राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हुई। इसी अस्थिरता ने सैन्य तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।

क्रांति में महिलाओं की क्रांतिकारी भूमिका:

तीसरे एस्टेट की महिलाएं सिलाई-बुनाई, फूल-फल बेचना या घरेलू नौकरानी के रूप में काम करती थीं। उनके पास शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसर नहीं थे। अपने हितों की आवाज उठाने के लिए उन्होंने करीब 60 राजनीतिक क्लब शुरू किए, जिनमें 'द सोसाइटी ऑफ रिवोल्यूशनरी एंड रिपब्लिकन विमेन' (The Society of Revolutionary and Republican Women) सबसे प्रसिद्ध था। उनकी प्रमुख मांग थी कि महिलाओं को पुरुषों के समान राजनीतिक अधिकार व मताधिकार मिलें।

क्रांतिकारी सरकार ने शुरुआती वर्षों में कुछ कानून बनाए: सरकारी स्कूलों की स्थापना, अनिवार्य स्कूली शिक्षा, पिता मर्जी के खिलाफ शादी के लिए बाध्य नहीं कर सकते थे, और विवाह को कानूनी अनुबंध माना गया जिसमें तलाक की अर्जी दोनों दे सकते थे। परंतु आतंक के राज के दौरान महिला क्लब बंद कर दिए गए। प्रसिद्ध लेखिका ओलिंप दे गूज (Olympe de Gouges), जिन्होंने 'महिला एवं नागरिक अधिकार घोषणापत्र' लिखा था, को गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया। फ्रांसीसी महिलाओं को अंततः 1946 में जाकर मताधिकार प्राप्त हुआ।

दास प्रथा का उन्मूलन (Abolition of Slavery):

कैरेबियाई फ्रांसीसी उपनिवेश—मार्टीनिक, ग्वाडेलोप और सैन डोमिंगो—तंबाकू, नील, चीनी और कॉफी के बड़े उत्पादक थे। यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के बीच एक त्रिकोणीय दास व्यापार (Triangular Slave Trade) 17वीं सदी में शुरू हुआ था। फ्रांसीसी सौदागर बोर्दो या नान्तेस बंदरगाहों से अफ्रीकी तटों पर जाते, स्थानीय सरदारों से दास खरीदते, उन्हें महीनों अटलांटिक पार जहाजों में ठूंसकर ले जाते और बागान मालिकों को बेचते।

1794 के कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में सभी दासों की मुक्ति का कानून पारित किया, किंतु 10 वर्ष बाद नेपोलियन ने दास प्रथा पुनः शुरू कर दी। बागान मालिकों को अपने आर्थिक लाभ के लिए अफ्रीकी नीग्रो लोगों को गुलाम बनाने की छूट मिली। फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास प्रथा का अंतिम उन्मूलन 1848 में ही हो सका।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

1774 ई.
लुई 16वें का राज्यारोहण (Ascension of Louis XVI)
बोरबॉन राजवंश के 20 वर्षीय लुई 16वें का गद्दी संभालना; रिक्त राजकोष और वित्तीय संकट।
5 मई 1789
एस्टेट्स जनरल की बैठक (Meeting of Estates General)
175 वर्षों बाद नए करों के लिए बुलाई गई बैठक; तृतीय एस्टेट द्वारा मतदान सुधार की मांग।
20 जून 1789
टेनिस कोर्ट की शपथ (Tennis Court Oath)
तृतीय एस्टेट द्वारा नेशनल असेंबली की घोषणा और संविधान निर्माण का संकल्प।
14 जुलाई 1789
बास्तील का पतन (Storming of the Bastille)
पेरिस की जनता द्वारा निरंकुशता के प्रतीक किले का ध्वंस; क्रांति का औपचारिक आरंभ।
1793 - 1794
आतंक का राज (Reign of Terror - Robespierre)
मैक्सिमिलियन रोबेसपियर द्वारा नियंत्रण व दंड की नीति; गिलोटिन का अंधाधुंध प्रयोग।
1804 ई.
नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का सम्राट बना
यूरोप का आधुनिकीकरणकर्ता घोषित किया; नेपोलियन संहिता (Civil Code of 1804) लागू की।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): 18वीं सदी में फ्रांसीसी समाज के तीन एस्टेट्स का संक्षिप्त विवरण दीजिए। कौन-सा एस्टेट राज्य के समस्त करों का भुगतान करता था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 18वीं सदी में फ्रांसीसी समाज सामंती व्यवस्था के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों (Estates) में विभक्त था:

  1. प्रथम एस्टेट (पादरी वर्ग - Clergy): इसमें कैथोलिक चर्च के उच्च अधिकारी आते थे। इन्हें जन्मना विशेषाधिकार प्राप्त थे, राज्य को कोई कर नहीं देते थे और किसानों से 'टाइद' नामक धार्मिक कर वसूलते थे।
  2. द्वितीय एस्टेट (कुलीन वर्ग - Nobility): इसमें सामंत और राजदरबार के उच्च पदाधिकारी शामिल थे। इनके पास देश की 60% भूमि का बड़ा हिस्सा था। इन्हें प्रत्यक्ष करों से छूट थी और ये किसानों से सामंती कर वसूलते थे।
  3. तृतीय एस्टेट (जनसाधारण): इसमें बड़े व्यापारी, वकील, डॉक्टर, किसान, दस्तकार, छोटे किसान और भूमिहीन मजदूर आते थे (फ्रांस की 97% आबादी)।

करों का भुगतान: केवल और केवल तृतीय एस्टेट ही राज्य के सभी प्रत्यक्ष (ताइल) और अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करता था। प्रथम दो एस्टेट्स को करों से पूर्ण छूट प्राप्त थी।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति किसी एक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि दीर्घकालिक असंतोष का विस्फोट थी:

1. राजनीतिक कारण:

  • लुई 16वें का निरंकुश शासन: राजा स्वेच्छाचारी था और दैवी अधिकारों में विश्वास रखता था। जनता की शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं थी।
  • मेरी आंतवानेत का अपव्यय: ऑस्ट्रियाई रानी का विलासितापूर्ण जीवन और राजकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप जनता में भारी घृणा का कारण बना।

2. सामाजिक कारण:

  • तीव्र सामाजिक असमानता: समाज विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग (पादरी व कुलीन) और अधिकारविहीन वर्ग (तृतीय एस्टेट) में बंटा हुआ था।
  • मध्यम वर्ग का असंतोष: शिक्षित मध्यम वर्ग (वकील, शिक्षक, व्यापारी) आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद सामाजिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक अधिकारों से वंचित था।

3. आर्थिक कारण:

  • रिक्त राजकोष और कर्ज: लगातार युद्धों और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में सहायता के कारण फ्रांस पर 2 अरब लिव्रे से अधिक का कर्ज था।
  • जीविका संकट: 1788-89 में सूखे और ओलों के कारण फसल नष्ट हो गई, जिससे पावलोटी की कीमतें आसमान छूने लगीं और भुखमरी फैल गई।

4. बौद्धिक जागृति:

जॉन लॉक, रूसो और मॉन्टेस्क्यू जैसे विचारकों ने समानता, स्वतंत्रता और लोकतंत्र के विचार फैलाकर क्रांति की वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार की।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (विश्लेषणात्मक): रोबेसपियर के 'आतंक के राज' (Reign of Terror) की प्रमुख नीतियों की समीक्षा कीजिए। उसका अंत किस प्रकार हुआ?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1793 से 1794 तक के काल को फ्रांस में 'आतंक का राज' कहा जाता है, जिसका सर्वेसर्वा मैक्सिमिलियन रोबेसपियर था।

रोबेसपियर की प्रमुख नीतियां:

  1. सख्त नियंत्रण और दंड: गणतंत्र के किसी भी आलोचक (कुलीन, पादरी, विपक्षी नेता) को गिरफ्तार कर क्रांतिकारी न्यायाधिकरण द्वारा मुकदमा चलाया जाता और दोषी पाए जाने पर गिलोटिन पर मृत्युदंड दिया जाता।
  2. आर्थिक नियमन: मजदूरी और कीमतों की अधिकतम सीमा तय की गई। मांस और पावलोटी की राशनिंग की गई।
  3. समानता का जबरन थोपना: सफेद आटे पर प्रतिबंध लगाकर 'समता रोटी' खाना अनिवार्य किया गया। सर और मैडम के स्थान पर 'सिटॉयन' और 'सिटॉयेन' का प्रयोग अनिवार्य हुआ।
  4. चर्चों पर प्रहार: चर्चों को बंद कर उनके भवनों को सैन्य बैरकों या सरकारी कार्यालयों में परिवर्तित कर दिया गया।

रोबेसपियर का अंत:

उसकी कठोरता इतनी बढ़ गई कि उसके अपने जैकोबिन साथी भी भयभीत हो गए। अंततः जुलाई 1794 में नेशनल कन्वेंशन ने उसके विरुद्ध महाभियोग पारित किया, उसे गिरफ्तार किया गया और 28 जुलाई 1794 को स्वयं उसे गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया।

उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): 'नेपोलियन बोनापार्ट का उदय किस प्रकार हुआ?' और उसने फ्रांस के आधुनिकीकरण के लिए क्या कदम उठाए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

उदय का कारण: जैकोबिन शासन के पतन के पश्चात 5 सदस्यों वाली कार्यपालिका—'डायरेक्टरी' और विधान परिषदों के बीच निरंतर राजनीतिक संघर्ष और भ्रष्टाचार से व्यापक अस्थिरता फैली। इस राजनीतिक शून्यता का लाभ उठाकर एक प्रतिभाशाली सैन्य जनरल नेपोलियन बोनापार्ट ने 1799 में सत्ता पर कब्जा कर लिया और 1804 में स्वयं को फ्रांस का सम्राट घोषित किया।

आधुनिकीकरण के कदम:

  • नेपोलियन संहिता (1804): जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त किए, कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया।
  • प्रशासनिक व आर्थिक सुधार: दशमलव प्रणाली पर आधारित नाप-तौल की समान व्यवस्था लागू की और निजी संपत्ति की सुरक्षा के कठोर नियम बनाए।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

'टाइद' (Tithe) और 'ताइल' (Taille) करों में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

'टाइद' चर्च द्वारा वसूला जाने वाला धार्मिक कर था (फसल के 10वें हिस्से के बराबर), जबकि 'ताइल' राज्य को दिया जाने वाला प्रत्यक्ष कर था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि महिलाओं को 1789 या 1791 के संविधान में मताधिकार मिल गया था।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1791 के संविधान में महिलाओं को 'निष्क्रिय नागरिक' (Passive Citizens) का दर्जा दिया गया था। उन्हें वास्तविक मताधिकार 150 से अधिक वर्षों बाद 1946 में जाकर मिला।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रोबेसपियर को एक उदारवादी लोकतांत्रिक नेता समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रोबेसपियर जैकोबिन क्लब का नेता था, किंतु 1793-94 में उसने 'आतंक का राज' स्थापित किया जिसमें गिलोटिन से हजारों निर्दोषों को मौत के घाट उतारा गया।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नेपोलियन को 1789 की क्रांति का हिस्सा मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1789 की क्रांति के समय नेपोलियन केवल एक युवा सैन्य अधिकारी था। उसका राजनीतिक उत्थान 1799 में डायरेक्टरी के पतन के बाद हुआ और वह 1804 में सम्राट बना।

18वीं सदी के फ्रांसीसी समाज के तीन एस्टेट्स और क्रांति का प्रवाह

फ्रांसीसी समाज की संरचना (The Three Estates) एवं क्रांतिकारी प्रवाह (1789-1804) प्रथम एस्टेट (First Estate) - पादरी वर्ग (Clergy) आबादी < 1% | 10% भूमि स्वामित्व | जन्मना विशेषाधिकार धार्मिक कर 'टाइद' (Tithe) वसूली | कोई कर नहीं द्वितीय एस्टेट (Second Estate) - कुलीन वर्ग (Nobility) आबादी < 2% | 60% भूमि (चर्च व अमीरों सहित) | सामंती विशेषाधिकार सामंती शुल्क व बेगार वसूली | प्रत्यक्ष करों से पूर्ण मुक्ति तृतीय एस्टेट (Third Estate) - जनसाधारण (97% आबादी) • बड़े व्यवसायी, व्यापारी, अदालती कर्मचारी, वकील (मध्यम वर्ग) • किसान और कारीगर (आबादी का 90% हिस्सा किसान) • छोटे किसान, भूमिहीन मजदूर, नौकर कर का संपूर्ण बोझ इसी वर्ग पर! प्रत्यक्ष कर 'ताइल' (Taille) + अप्रत्यक्ष कर (नमक, तंबाकू) क्रांति के प्रमुख चरण व युगांतरकारी घटनाएं 1 5 मई 1789: एस्टेट्स जनरल की बैठक वर्साय में 175 साल बाद बैठक; कर प्रस्ताव पर विवाद 2 14 जुलाई 1789: बास्तील का पतन पेरिस में बास्तील जेल का ध्वंस; क्रांति का शंखनाद 3 1791: संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना नेशनल असेंबली द्वारा 'मानव अधिकारों की घोषणा' 4 1793-94: रोबेसपियर का 'आतंक का राज' लुई 16वें को फांसी; गिलोटिन का व्यापक प्रयोग 5 1795-99: डायरेक्टरी का शासन 5 सदस्यीय कार्यपालिका और राजनीतिक अस्थिरता 6 1804: नेपोलियन बना फ्रांस का सम्राट नेपोलियन संहिता (Civil Code); वाटरलू (1815) में पराजय

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
1774 में लुई 16वें के गद्दी पर बैठने के समय लगातार युद्धों और विलासिता के कारण फ्रांस का राजकोष पूरी तरह खाली था।
मुख्य बिंदु 2
18वीं सदी का फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में बंटा था: प्रथम (पादरी) व द्वितीय (कुलीन) को कर-मुक्ति व विशेषाधिकार प्राप्त थे, जबकि तृतीय एस्टेट करों का सारा बोझ उठाता था।
मुख्य बिंदु 3
जनसंख्या वृद्धि और फसल बर्बादी के कारण जीविका संकट (Subsistence Crisis) पैदा हुआ, जिससे पावलोटी की कीमतें बढ़ीं और भुखमरी फैली।
मुख्य बिंदु 4
जॉन लॉक (दैवी अधिकारों का खंडन), रूसो (सामाजिक अनुबंध व एक व्यक्ति एक वोट) और मॉन्टेस्क्यू (शक्ति पृथक्करण) के विचारों ने क्रांति को वैचारिक आधार प्रदान किया।
मुख्य बिंदु 5
5 मई 1789 को एस्टेट्स जनरल की बैठक में मतदान सुधार खारिज होने पर तृतीय एस्टेट ने 20 जून को 'टेनिस कोर्ट की शपथ' लेकर खुद को 'नेशनल असेंबली' घोषित किया।
मुख्य बिंदु 6
14 जुलाई 1789 को पेरिस में बास्तील के किले का ध्वंस हुआ, जिसने सामंती निरंकुशता के पतन और जनक्रांति की शुरुआत का संकेत दिया।
मुख्य बिंदु 7
1791 में फ्रांस संवैधानिक राजतंत्र बना और 'मनुष्य एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा' के तहत जीवन, अभिव्यक्ति व समानता के प्राकृतिक अधिकार स्वीकृत हुए।
मुख्य बिंदु 8
21 सितंबर 1792 को राजतंत्र समाप्त कर फ्रांस को गणतंत्र घोषित किया गया और 1793 में लुई 16वें को देशद्रोह के आरोप में सार्वजनिक फांसी दी गई।
मुख्य बिंदु 9
1793-1794 तक रोबेसपियर के नेतृत्व में 'आतंक का राज' चला जिसमें हजारों को गिलोटिन पर चढ़ाया गया; जुलाई 1794 में रोबेसपियर के पतन के साथ यह समाप्त हुआ।
मुख्य बिंदु 10
डायरेक्टरी के शासन की राजनीतिक अस्थिरता ने नेपोलियन बोनापार्ट के उदय का मार्ग प्रशस्त किया, जो 1804 में फ्रांस का सम्राट बना और 1815 के वाटरलू युद्ध में पराजित हुआ।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
18वीं सदी के फ्रांस में 'टाइद' (Tithe) क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
'टाइद' चर्च द्वारा वसूला जाने वाला एक धार्मिक कर था, जो किसानों की कुल कृषि उपज के दसवें हिस्से (1/10th) के बराबर होता था।
2
प्रसिद्ध पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ़ द लॉज़' (The Spirit of the Laws) में सरकार के अंगों के बीच शक्तियों के विभाजन का प्रस्ताव किसने दिया था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
मॉन्टेस्क्यू ने अपनी पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ़ द लॉज़' में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
3
फ्रांसीसी क्रांति के दौरान जैकोबिन क्लब के सदस्यों को 'सॉ-कुलॉत' (Sans-culottes) क्यों कहा गया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
'सॉ-कुलॉत' का शाब्दिक अर्थ है 'बिना घुटने वाले'। जैकोबिनों ने समाज के फैशनपरस्त कुलीनों से अलग दिखने के लिए घुटने तक पहने जाने वाले ब्रिचेस के स्थान पर लंबी पतलून पहनी।
4
फ्रांस में रोबेसपियर के शासनकाल (1793-1794) को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
1793 से 1794 के बीच रोबेसपियर ने नियंत्रण और दंड की अत्यंत क्रूर नीतियां अपनाईं और गिलोटिन द्वारा हजारों लोगों को मृत्युदंड दिया, इसलिए इस काल को 'आतंक का राज' कहा जाता है।
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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