20वीं सदी के आरंभिक वर्षों में जर्मनी एक शक्तिशाली साम्राज्य था। उसने ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के साथ मिलकर मित्र राष्ट्रों (इंग्लैंड, फ्रांस और रूस) के विरुद्ध प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) लड़ा। 1917 में अमेरिका के मित्र राष्ट्रों में शामिल होने से मित्र राष्ट्रों को निर्णायक बढ़त मिली और नवंबर 1918 में जर्मनी पराजित हो गया। जर्मन सम्राट कैसर विल्हेम द्वितीय ने गद्दी छोड़ दी।
वाईमर गणराज्य (Weimar Republic):
सम्राट के पदत्याग के बाद राष्ट्रीय सभा की बैठक वाईमर नामक स्थान पर हुई और लोकतांत्रिक संविधान पारित किया गया। इसमें एक संघीय ढांचा बनाया गया और जर्मन संसद 'राइखस्टाग' (Reichstag) के लिए महिलाओं सहित सभी वयस्क नागरिकों को समान और सार्वभौमिक मताधिकार दिया गया।
वर्साय की अपमानजनक शांति संधि (Treaty of Versailles - 28 जून 1919):
जर्मन जनता वाईमर गणराज्य को युद्ध में पराजय और पेरिस के उपनगर वर्साय में थोपी गई कठोर व अपमानजनक शर्तों के लिए दोषी मानती थी। प्रमुख शर्तें निम्नलिखित थीं:
- भूभागीय क्षति: जर्मनी ने अपने सारे उपनिवेश, 10% आबादी, 13% भूभाग, 75% लौह भंडार और 26% कोयला भंडार फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क और लिथुआनिया के हवाले कर दिए।
- सैन्य विमुद्रीकरण: जर्मनी की सेना को भंग कर सीमित (1 लाख सैनिक) कर दिया गया। मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने जर्मनी के खनिज संपन्न पश्चिमी क्षेत्र—राइनलैंड (Rhineland) पर 1920 के दशक में कब्जा जमा लिया।
- युद्ध अपराध खंड (War Guilt Clause): जर्मनी को युद्ध के सारे विनाश के लिए जिम्मेदार ठहराया गया और उस पर 6 अरब पाउंड (6 Billion Pounds) का भारी जुर्माना थोपा गया।
जो लोग वाईमर गणराज्य का समर्थन कर रहे थे—मुख्यतः समाजवादी, कैथोलिक और डेमोक्रेट्स—उन्हें रूढ़िवादी राष्ट्रवादी हलकों में 'नवंबर के अपराधी' (November Criminals) कहकर उपहास उड़ाया गया।