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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 20
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भारत में खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा किसी भी संप्रभु और कल्याणकारी राष्ट्र की सबसे बुनियादी आवश्यकता है। भोजन जीवन के लिए उतना ही आवश्यक है जितना सांस लेने के लिए हवा; परंतु खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल दो वक्त की रोटी मिलना भर नहीं है, बल्कि यह सभी नागरिकों के लिए हर समय पौष्टिक और सुरक्षित भोजन की उपलब्धता, पहुंच और सामर्थ्य को सुनिश्चित करना है। प्रस्तुत अध्याय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के हकदारी (Entitlement) सिद्धांत से समृद्ध खाद्य सुरक्षा के तीन अनिवार्य आयामों (Availability, Accessibility, Affordability) की वैज्ञानिक पड़ताल करता है। अध्याय 1943 के बंगाल के भयानक अकाल (30 लाख लोगों की भुखमरी से मौत) की ऐतिहासिक विभीषिका, तथा 'दीर्घकालिक भुखमरी' (Chronic Hunger) व 'मौसमी भुखमरी' (Seasonal Hunger) के अंतर का सजीव चित्रण करता है। इसके पश्चात भारत में 1960 के दशक की हरित क्रांति के बाद स्थापित खाद्य सुरक्षा प्रणाली के दो प्रमुख स्तंभों—भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाने वाला 'बफर स्टॉक' (Buffer Stock) तथा 5.5 लाख उचित दर की दुकानों (Fair Price Shops) के माध्यम से संचालित 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' (PDS / राशन व्यवस्था)—की संपूर्ण कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण है। अध्याय में अंत्योदय अन्न योजना (AAY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013) तथा सहकारिताओं की प्रेरक भूमिका (गुजरात का 'अमूल', दिल्ली की 'मदर डेयरी', तमिलनाडु की 94% सहकारी राशन दुकानें, और महाराष्ट्र के अनाज बैंक - ADS) का सांगोपांग मूल्यांकन किया गया है। CBSE बोर्ड परीक्षा में बफर स्टॉक, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), और 1943 के बंगाल अकाल पर प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

1943 का बंगाल अकाल: 30 लाख लाशें और भारत की खाद्य आत्मनिर्भरता की शपथ

1943 में जब द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था, भारत के अविभाजित बंगाल प्रांत में इतिहास का सबसे दर्दनाक और मानव-निर्मित अकाल पड़ा। चावल की कीमतें आसमान छूने लगीं और देखते ही देखते सड़कों, पटरियों और खेतों में भूख से तड़पते इंसानों के कंकाल बिछ गए। मांएं अपने बच्चों को कुछ मुट्ठी चावल के लिए बेचने को मजबूर हो गईं। इस अकाल में अकेले बंगाल में 30 लाख से अधिक निर्दोष लोग तड़प-तड़प कर भूख और महामारियों से मारे गए! सबसे ज्यादा चोट मछुआरों, खेतिहर मजदूरों और परिवहन श्रमिकों पर पड़ी। आजादी के बाद भारत के नीति-निर्माताओं ने शपथ ली कि स्वतंत्र भारत में किसी भी नागरिक को अनाज के अभाव में नहीं मरने दिया जाएगा। इसी दृढ़ संकल्प से 1968 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 'गेहूं क्रांति' का डाक टिकट जारी हुआ, हरित क्रांति ने देश को आत्मनिर्भर बनाया और दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा तंत्र (FCI गोदाम व PDS) खड़ा हुआ जिसने कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक आपदा में भी 80 करोड़ भारतीयों की थाली में रोटी सुनिश्चित की!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखंड राज्य में कुपोषण, एनीमिया और खाद्य असुरक्षा एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या रही है, विशेष रूप से हमारे आदिवासी और सुदूर ग्रामीण अंचलों में। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन कार्ड: हरा, लाल और पीला कार्ड), आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा पोषाहार वितरण और मध्याह्न भोजन योजना झारखंड के लाखों बच्चों और परिवारों के पोषण की जीवनरेखा हैं। यह अध्याय छात्रों को यह सिखाता है कि खाद्य सुरक्षा केवल पेट भरने की योजना नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का जीने का मौलिक अधिकार है। CBSE बोर्ड परीक्षा में अर्थशास्त्र खंड का यह अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • हरित क्रांति और खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि की बुनियादी समझ।
  • राशन की दुकानों और राशन कार्ड (बीपीएल/एपीएल) का दैनिक अनुभव।
  • न्यूनतम मजदूरी और बाजार में अनाज के भाव की प्रारंभिक जानकारी।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • खाद्य सुरक्षा के तीन अनिवार्य आयामों (उपलब्धता, पहुंच और सामर्थ्य) की वैज्ञानिक व्याख्या करना।
  • 1943 के बंगाल के अकाल के कारणों और भुखमरी के प्रकारों (दीर्घकालिक बनाम मौसमी भुखमरी) का विश्लेषण करना।
  • भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा बफर स्टॉक के निर्माण और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की आवश्यकता को सिद्ध करना।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के विकास, निर्गम मूल्य (Issue Price) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) की भूमिका का मूल्यांकन करना।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (NFSA) के मुख्य प्रावधानों को स्पष्ट करना।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहकारी समितियों (अमूल, मदर डेयरी, तमिलनाडु मॉडल) के सफल योगदान को रेखांकित करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. खाद्य सुरक्षा क्या है? (तीन अनिव...
2 2. खाद्य सुरक्षा क्यों आवश्यक है? 1...
3 3. भारत में खाद्य सुरक्षा प्रणाली:...
4 4. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), र...
5 5. खाद्य सुरक्षा में सहकारी समितियो...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. खाद्य सुरक्षा क्या है? (तीन अनिवार्य आयाम)

खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ केवल जीवित रहने के लिए दो वक्त का भोजन मिलना भर नहीं है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के अनुसार खाद्य सुरक्षा के तीन अनिवार्य आयाम हैं:

आयाम (Dimension) सटीक अर्थ एवं परिभाषा सुनिश्चित करने का माध्यम
1. खाद्य की उपलब्धता (Availability) इसका तात्पर्य देश में कुल खाद्य उत्पादन, विदेशों से कुल खाद्यान्न आयात तथा पिछले वर्षों के सरकारी गोदामों में संचित स्टॉक से है। कृषि उत्पादन में वृद्धि, हरित क्रांति एवं बफर स्टॉक।
2. खाद्य तक पहुंच (Accessibility) इसका अर्थ है कि भोजन बिना किसी शारीरिक, सामाजिक या भौगोलिक भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच में होना चाहिए। गांव-गांव में राशन दुकानों (PDS) का कुशल नेटवर्क व परिवहन।
3. खाद्य का सामर्थ्य (Affordability) इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति के पास अपनी पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन खरीदने हेतु आवश्यक धन (क्रय शक्ति) उपलब्ध हो। रियायती निर्गम मूल्य (Subsidized Price), अंत्योदय योजना व रोजगार गारंटी।

निष्कर्ष: किसी देश में खाद्य सुरक्षा केवल तभी सुनिश्चित मानी जाती है जब (क) सभी लोगों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो, (ख) सभी लोगों में भोजन खरीदने की क्षमता हो, और (ग) भोजन तक पहुंच के रास्ते में कोई बाधा न हो।

2. खाद्य सुरक्षा क्यों आवश्यक है? 1943 का बंगाल अकाल एवं भुखमरी के रूप

सामान्य समय में भले ही भोजन मिल जाए, परंतु जब कोई प्राकृतिक आपदा (सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि) आती है, तो कृषि उत्पादन घट जाता है, खाद्यान्न की कमी हो जाती है और कीमतें अत्यधिक बढ़ जाती हैं। सबसे गरीब लोग उस बढ़ी कीमत पर अनाज नहीं खरीद पाते और भुखमरी का शिकार हो जाते हैं।

1. 1943 का बंगाल अकाल (The Famine of Bengal):

भारत का सबसे विनाशकारी अकाल:
1943 में बंगाल में पड़ा अकाल आधुनिक भारतीय इतिहास का सबसे भयानक अकाल था। इसमें लगभग 30 लाख लोग मारे गए।
• सर्वाधिक प्रभावित वर्ग: कृषि मजदूर, मछुआरे, परिवहन कर्मी (नाविक व तांगेवाले) और अन्य अनियमित आकस्मिक श्रमिक सबसे अधिक मरे क्योंकि चावल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और उनकी मजदूरी स्थिर रही।
• सबक: स्वतंत्र भारत में इस त्रासदी से सीख लेकर देशव्यापी खाद्य सुरक्षा नेटवर्क की नींव रखी गई ताकि भविष्य में किसी अकाल की पुनरावृत्ति न हो।

2. भुखमरी के दो रूप: दीर्घकालिक बनाम मौसमी भुखमरी:

  • दीर्घकालिक भुखमरी (Chronic Hunger): यह निरंतर अपर्याप्त मात्रा और पौष्टिकता वाले भोजन करने का परिणाम है। अत्यंत गरीब लोग अपनी अत्यंत कम आय और जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन खरीदने की अक्षमता के कारण वर्षों तक दीर्घकालिक भुखमरी से पीड़ित रहते हैं।
  • मौसमी भुखमरी (Seasonal Hunger): यह फसलों के चक्र (उगाने और काटने) से जुड़ी है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में: कृषि की मौसमी प्रकृति के कारण बुआई के बाद और कटाई से पहले के महीनों में मजदूरों को काम नहीं मिलता और भोजन की कमी हो जाती है।
    • शहरी क्षेत्रों में: निर्माण कार्यों में लगे अनियमित मजदूरों को बरसात के मौसम में काम न मिलने के कारण मौसमी भुखमरी का सामना करना पड़ता है।
  • सकारात्मक बदलाव: हरित क्रांति और PDS के विस्तार के कारण भारत में दोनों प्रकार की भुखमरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

3. भारत में खाद्य सुरक्षा प्रणाली: बफर स्टॉक एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

1960 के दशक के उत्तरार्ध में हरित क्रांति की सफलता के बाद भारत खाद्यान्नों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन गया। भारत सरकार ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो प्रमुख घटकों वाली एक सुविचारित प्रणाली बनाई है:

1. बफर स्टॉक (Buffer Stock):

  • बफर स्टॉक सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India - FCI) के माध्यम से खरीदे गए गेहूं और चावल का विशाल सुरक्षित भंडार है।
  • खरीद प्रक्रिया एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP):
    1. FCI उन राज्यों के किसानों से गेहूं और चावल खरीदता है जहाँ अधिशेष (Surplus) उत्पादन होता है।
    2. फसल बोने के मौसम से पहले ही सरकार प्रत्येक वर्ष फसलों के लिए एक पूर्व-निर्धारित गारंटीकृत मूल्य की घोषणा करती है जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price - MSP) कहते हैं। यह किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और मूल्य सुरक्षा प्रदान करता है।
    3. खरीदा गया अनाज आधुनिक वैज्ञानिक साइलो और गोदामों में सुरक्षित रखा जाता है।
  • बफर स्टॉक का उद्देश्य:
    • अनाज की कमी वाले क्षेत्रों में और समाज के गरीब वर्गों में बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराना (इस रियायती मूल्य को 'निर्गम मूल्य' - Issue Price कहते हैं)।
    • खराब मौसम, सूखे या किसी भी राष्ट्रीय आपदा के समय देश में भोजन की कमी की समस्या का समाधान करना।

4. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राशन कार्ड एवं अंत्योदय अन्न योजना

FCI द्वारा खरीदे गए अनाज को सरकार उचित दर की दुकानों (Fair Price Shops - FPS) के नेटवर्क के माध्यम से समाज के गरीब वर्गों में वितरित करती है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS) अथवा आम बोलचाल में राशन व्यवस्था कहते हैं।

1. राशन दुकानों का विस्तार:

  • वर्तमान में देश भर में लगभग 5.5 लाख राशन की दुकानें संचालित हैं।
  • यहाँ चीनी, खाद्यान्न (गेहूं व चावल) और मिट्टी का तेल बाजार भाव से काफी कम कीमत पर राशन कार्ड धारक परिवारों को बेचा जाता है।

2. राशन कार्ड के तीन प्रमुख प्रकार:

  1. अंत्योदय कार्ड (Antyodaya Cards): निर्धनों में भी सर्वाधिक निर्धन (Poorest of the Poor) लोगों के लिए।
  2. बीपीएल कार्ड (BPL Cards): निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के लिए।
  3. एपीएल कार्ड (APL Cards): निर्धनता रेखा से ऊपर रहने वाले अन्य सभी परिवारों के लिए।

3. PDS का विकास एवं विशेष कल्याणकारी योजनाएं:

योजना का नाम प्रारंभ वर्ष लक्षित समूह एवं लाभ
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) 1997 गरीबों और गैर-गरीबों के लिए विभेदक मूल्य नीति अपनाई गई ताकि सब्सिडी का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) दिसंबर 2000 गरीबी रेखा से नीचे के 1 करोड़ सबसे गरीब परिवारों को चिह्नित कर 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह अत्यधिक रियायती दर (₹2 प्रति किग्रा गेहूं और ₹3 प्रति किग्रा चावल) पर उपलब्ध कराया गया।
अन्नपूर्णा योजना (APS) 2000 दीन-हीन एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों (जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलती) को 10 किग्रा अनाज मुफ्त उपलब्ध कराना।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 भोजन को कानूनी अधिकार बनाया गया। इसके तहत देश की 75% ग्रामीण और 50% शहरी जनसंख्या (कुल 67% आबादी) को अत्यधिक रियायती खाद्यान्न पाने का कानूनी हक दिया गया।

5. खाद्य सुरक्षा में सहकारी समितियों (Cooperatives) की भूमिका

भारत में विशेष रूप से देश के दक्षिणी और पश्चिमी भागों में सहकारी समितियां खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं:

1. तमिलनाडु की सहकारी राशन दुकानें:

तमिलनाडु में कुल राशन दुकानों (उचित दर दुकानों) में से लगभग 94 प्रतिशत दुकानें सहकारी समितियों द्वारा संचालित की जाती हैं। इससे बिचौलियों का भ्रष्टाचार समाप्त हुआ है और गरीबों को नियमित, शुद्ध और सस्ता राशन मिलता है।

2. अमूल और श्वेत क्रांति (Amul - Gujarat):

गुजरात में अमूल (Amul) दुग्ध सहकारी समिति की सफलता ने देश में श्वेत क्रांति (White Revolution) ला दी। इसने देश भर के लाखों छोटे पशुपालकों को संगठित किया और शहरों के उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर पौष्टिक दूध व दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराकर खाद्य व पोषण सुरक्षा में ऐतिहासिक योगदान दिया।

3. मदर डेयरी (Mother Dairy - Delhi):

दिल्ली में मदर डेयरी सरकार द्वारा निर्धारित नियंत्रित दरों पर दूध और हरी सब्जियां उपलब्ध कराती है, जिससे खुले बाजार की मुनाफाखोरी पर अंकुश लगता है।

4. एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस (ADS - Maharashtra):

महाराष्ट्र में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस (ADS) ने विभिन्न क्षेत्रों में 'अनाज बैंकों' (Grain Banks) की अनूठी स्थापना की है। यह किसानों से अनाज जमा कराता है और संकट के समय जरूरतमंदों को अनाज उधार देता है। यह अभिनव प्रयोग अब कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा का एक सफल मॉडल बन चुका है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

खाद्य सुरक्षा के 3 स्तंभ
उपलब्धता (Availability) + पहुंच (Accessibility) + सामर्थ्य (Affordability)
अमर्त्य सेन का हकदारी (Entitlement) दृष्टिकोण।
बफर स्टॉक (Buffer Stock)
FCI द्वारा MSP पर खरीदा गया गेहूं व चावल का आपातकालीन भंडार
अभावग्रस्त क्षेत्रों में 'निर्गम मूल्य' (Issue Price) पर वितरित।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
बुआई से पूर्व सरकार द्वारा घोषित गारंटीकृत खरीद मूल्य
किसानों को फसल की कीमतों में गिरावट से सुरक्षा देने हेतु।
1943 का बंगाल अकाल
30 लाख लोगों की भुखमरी व महामारी से मौत
आधुनिक भारतीय इतिहास का सबसे विनाशकारी अकाल।
अंत्योदय अन्न योजना (AAY 2000)
35 kg अनाज/माह | ₹2/kg गेहूं, ₹3/kg चावल
गरीबी रेखा से नीचे के सबसे निर्धन (Poorest of Poor) परिवारों हेतु।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013)
75% ग्रामीण + 50% शहरी आबादी (कुल 67% जनसंख्या)
भोजन के अधिकार को कानूनी जामा पहनाने वाला ऐतिहासिक कानून।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (दीर्घ उत्तरीय): भारत में 'बफर स्टॉक' (Buffer Stock) क्या है और इसका निर्माण क्यों किया जाता है? न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और निर्गम मूल्य (Issue Price) में क्या अंतर है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. बफर स्टॉक का अर्थ एवं उद्देश्य:

बफर स्टॉक सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से खरीदे गए गेहूं और चावल का विशाल सुरक्षित भंडार है। इसका निर्माण निम्नलिखित दो मुख्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है:

  • अनाज की कमी वाले क्षेत्रों में वितरण: देश के उन क्षेत्रों में जहाँ फसलें कम होती हैं या किसी प्राकृतिक आपदा (बाढ़, सूखा) के कारण फसल नष्ट हो जाती है, वहां आपातकालीन आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • कीमतों पर नियंत्रण: बाजार में अनाज की कमी होने पर जमाखोरी और अचानक मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए बफर स्टॉक से अनाज बाजार में उतारकर कीमतों को स्थिर रखा जाता है।

2. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बनाम निर्गम मूल्य (Issue Price):

आधार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्गम मूल्य (Issue Price)
परिभाषा फसल बोने से पहले सरकार द्वारा घोषित वह गारंटीकृत मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदने का वचन देती है। सरकारी गोदामों (FCI) से राशन की दुकानों (PDS) के जरिए गरीबों को अनाज बेचने का अत्यधिक रियायती मूल्य।
उद्देश्य किसानों को बाजार में अत्यधिक मूल्य गिरावट से बचाना और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना। गरीब परिवारों को बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर भरपेट अनाज उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा देना।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): खाद्य सुरक्षा के तीन प्रमुख आयाम कौन-से हैं? किसी देश में खाद्य सुरक्षा कब सुनिश्चित मानी जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: खाद्य सुरक्षा के तीन अनिवार्य आयाम निम्नलिखित हैं:

  1. खाद्य की उपलब्धता (Availability of Food): देश में कुल घरेलू कृषि उत्पादन, विदेशों से आयात तथा सरकारी गोदामों में संचित पिछले वर्षों के बफर स्टॉक की कुल मात्रा।
  2. खाद्य तक पहुंच (Accessibility of Food): इसका अर्थ है कि बिना किसी भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक बाधा के भोजन हर नागरिक की भौतिक पहुंच में हो (पास में राशन दुकान हो)।
  3. खाद्य का सामर्थ्य (Affordability of Food): प्रत्येक नागरिक के पास अपनी और अपने परिवार की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु पौष्टिक और सुरक्षित भोजन खरीदने की पर्याप्त क्रय शक्ति (धन) उपलब्ध हो।

निष्कर्ष: जब ये तीनों स्थितियां एक साथ संतुष्ट होती हैं, तभी देश में वास्तविक खाद्य सुरक्षा मानी जाती है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): 1943 का बंगाल अकाल क्यों पड़ा था? इससे समाज का कौन-सा वर्ग सर्वाधिक प्रभावित हुआ था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  • कारण: 1943 में ब्रिटिश शासन के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध के चलते चावल के उत्पादन में कमी, युद्ध के लिए खाद्यान्नों का अनियंत्रित विपथन तथा जमाखोरी के कारण बंगाल में चावल के दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ गए। ब्रिटिश सरकार ने समय पर राहत नहीं पहुंचाई, जिससे भयानक अकाल पड़ा और लगभग 30 लाख लोग मारे गए।
  • सर्वाधिक प्रभावित वर्ग: इस अकाल की मार समाज के सबसे निर्धन तबकों—खेतिहर मजदूरों, मछुआरों, परिवहन कर्मियों (नाविकों व तांगेवालों) और अन्य अनियमित श्रमिकों पर पड़ी क्योंकि वे अनाज की बढ़ी हुई कीमतें चुकाने में पूरी तरह असमर्थ थे और भुखमरी व महामारियों के शिकार हो गए।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में 'सहकारी समितियों' (Cooperatives) की क्या भूमिका है? किन्हीं दो सफल उदाहरणों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारत में सहकारी समितियां गरीबों को रियायती और नियंत्रित दरों पर आवश्यक खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनी हैं:

  1. तमिलनाडु की सहकारी दुकानें: तमिलनाडु में कुल उचित दर दुकानों (PDS) में से लगभग 94 प्रतिशत दुकानें सहकारी समितियों द्वारा चलाई जाती हैं, जिससे निजी राशन डीलरों के भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर पूर्ण अंकुश लगा है।
  2. गुजरात का अमूल (Amul): अमूल ने दुग्ध उत्पादन में श्वेत क्रांति लाकर लाखों ग्रामीण पशुपालकों को आजीविका दी और देश के करोड़ों नागरिकों को उचित दरों पर सुरक्षित और पौष्टिक दुग्ध उत्पाद सुलभ कराए।
  3. (अन्य उदाहरण: दिल्ली की मदर डेयरी तथा महाराष्ट्र में गैर-सरकारी संस्था ADS द्वारा स्थापित अनाज बैंक)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और निर्गम मूल्य (Issue Price) को एक ही समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

MSP वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से अनाज 'खरीदती' है; जबकि निर्गम मूल्य वह रियायती मूल्य है जिस पर सरकार गरीबों को राशन दुकानों से अनाज 'बेचती' है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

दीर्घकालिक भुखमरी और मौसमी भुखमरी में अंतर न कर पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

दीर्घकालिक भुखमरी लगातार कम आय के कारण सालों-साल बनी रहती है, जबकि मौसमी भुखमरी कृषि के फसल चक्र के अनुसार वर्ष के कुछ खाली महीनों में ही होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि हरित क्रांति से केवल गेहूं का उत्पादन बढ़ा और देश खाद्य असुरक्षित ही रहा।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्नों में न केवल पूर्ण आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि विशाल बफर स्टॉक बनाने में सक्षम किया जिससे देश किसी भी आपातकाल का सामना कर सकता है।

भारत का त्रि-स्तरीय खाद्य सुरक्षा तंत्र: FCI, बफर स्टॉक एवं PDS

भारत का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा चक्र: किसान, FCI बफर स्टॉक एवं PDS Food Security in India: MSP Procurement, Buffer Stock Architecture & Public Distribution 1. अधिशेष किसान एवं MSP • पंजाब, हरियाणा, उप्र के किसान • गेहूं व चावल का अधिशेष उत्पादन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): बुआई पूर्व घोषित गारंटी मूल्य। FCI किसानों से सीधे खरीदती है किसानों को मूल्य सुरक्षा की गारंटी 2. भारतीय खाद्य निगम (FCI) • केंद्रीय बफर स्टॉक का रख-रखाव • वैज्ञानिक गोदामों में अनाज सुरक्षा बफर स्टॉक का उद्देश्य: आपदा में भुखमरी रोकना व मूल्य नियंत्रण निर्गम मूल्य (Issue Price): बाजार से बहुत कम कीमत पर राज्यों को आपूर्ति 3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) • 5.5 लाख उचित दर की दुकानें (FPS) • गेहूं, चावल, चीनी, केरोसिन वितरण 3 श्रेणी राशन कार्ड: अंत्योदय (AAY), BPL एवं APL अंतिम उपभोक्ता तक पहुंच AAY: ₹2 गेहूं, ₹3 चावल (35 kg/माह) सहकारी समितियों की भूमिका एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA - 2013) तमिलनाडु PDS मॉडल 94% उचित दर दुकानें सहकारी समितियों द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त वितरण अमूल (Amul) - गुजरात दुग्ध सहकारी क्रांति लाखों पशुपालकों को आय शहरों को सस्ता पौष्टिक दूध मदर डेयरी - दिल्ली नियंत्रित दरों पर दूध एवं ताजी सब्जियां मुनाफाखोरी पर नियंत्रण ADS अनाज बैंक (महा.) Grain Banks Network आपदा में त्वरित अनाज NGO-सहकारिता का मॉडल NFSA 2013: 75% ग्रामीण व 50% शहरी आबादी (कुल 67%) को कानूनी अधिकार के तहत भोजन सुरक्षा CBSE Class 9 Economics • भारत में खाद्य सुरक्षा: भुखमरी से मुक्ति और पोषण युक्त आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
खाद्य सुरक्षा के तीन अनिवार्य आयाम हैं: खाद्य की उपलब्धता (उत्पादन व स्टॉक), पहुंच (भौतिक सुलभता), और सामर्थ्य (क्रय शक्ति)।
मुख्य बिंदु 2
1943 का बंगाल अकाल (30 लाख मौतें) भारत का सबसे भयानक अकाल था जिसमें खेतिहर मजदूर और मछुआरे सर्वाधिक प्रभावित हुए थे।
मुख्य बिंदु 3
दीर्घकालिक भुखमरी लगातार कम आय और अपर्याप्त भोजन का परिणाम है, जबकि मौसमी भुखमरी कृषि के फसल चक्र से जुड़ी है।
मुख्य बिंदु 4
हरित क्रांति के बाद भारत खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर हुआ और उसने दोहरे खाद्य सुरक्षा तंत्र (बफर स्टॉक + PDS) की स्थापना की।
मुख्य बिंदु 5
बफर स्टॉक FCI द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया गेहूं और चावल का सुरक्षित भंडार है जो आपातकाल में काम आता है।
मुख्य बिंदु 6
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बुआई से पूर्व सरकार द्वारा घोषित गारंटीकृत मूल्य है जो किसानों को मूल्य सुरक्षा देता है।
मुख्य बिंदु 7
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) देश भर की 5.5 लाख उचित दर दुकानों द्वारा बाजार से कम 'निर्गम मूल्य' पर गरीबों को अनाज उपलब्ध कराती है।
मुख्य बिंदु 8
राशन कार्ड तीन प्रकार के हैं: अंत्योदय (सर्वाधिक निर्धन), बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे), और एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर)।
मुख्य बिंदु 9
अंत्योदय अन्न योजना (AAY - 2000) के तहत 35 किग्रा अनाज ₹2 प्रति किग्रा गेहूं और ₹3 प्रति किग्रा चावल की दर से दिया जाता है।
मुख्य बिंदु 10
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013) देश की 67% आबादी (75% ग्रामीण, 50% शहरी) को रियायती खाद्यान्न का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1943 में भारत का सबसे विनाशकारी अकाल किस प्रांत में पड़ा था जिसमें 30 लाख से अधिक लोग मारे गए थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
1943 का बंगाल अकाल भारतीय इतिहास का सबसे भयानक अकाल था जिसमें 30 लाख लोग भुखमरी से मारे गए।
2
फसल बोने के मौसम से पहले सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसल के लिए घोषित पूर्व-निर्धारित मूल्य को क्या कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार द्वारा घोषित गारंटीकृत खरीद मूल्य है जो किसानों को मूल्य सुरक्षा देता है।
3
दिसंबर 2000 में शुरू की गई 'अंत्योदय अन्न योजना' (AAY) के तहत निर्धनों को कितने किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत 35 किलोग्राम अनाज ₹2 गेहूं और ₹3 चावल की दर पर दिया जाता है।
4
तमिलनाडु में कुल उचित दर राशन दुकानों (PDS) में से लगभग कितने प्रतिशत दुकानें सहकारी समितियों द्वारा संचालित की जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
तमिलनाडु में लगभग 94% राशन दुकानें सहकारी समितियों द्वारा संचालित की जाती हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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कक्षा 9 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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