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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 7
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

भारत का भौतिक स्वरूप

भारत विभिन्न स्थलाकृतियों वाला एक विशाल देश है जहाँ पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार तथा द्वीप समूह सभी प्रकार के भू-आकृतिक लक्षण विद्यमान हैं। यह अध्याय प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Theory of Plate Tectonics), प्राचीन गोंडवानालैंड (Gondwanaland) के विखंडन, टेथिस सागर (Tethys Sea) के अवसादों के वलन से हिमालय पर्वत के निर्माण, तथा भारत की 6 प्रमुख भू-आकृतिक इकाइयों—हिमालय पर्वत शृंखला (The Himalayan Mountains), उत्तरी मैदान (The Northern Plain), प्रायद्वीपीय पठार (The Peninsular Plateau - जिसमें झारखंड का छोटानागपुर पठार शामिल है), भारतीय मरुस्थल (The Indian Desert), तटीय मैदान (The Coastal Plains), तथा द्वीप समूह (The Islands)—का गहन, वैज्ञानिक और तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE) बोर्ड परीक्षा में 'भांगर और खादर में अंतर', 'पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट की तुलना', 'हिमालय के तीन समानांतर श्रेणियों (हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक) की विशेषताएं', तथा 'छोटा नागपुर पठार का महत्व' अत्यंत लोकप्रिय एवं अनिवार्य प्रश्न हैं।

माउंट एवरेस्ट की चोटी पर समुद्री जीवाश्म: टेथिस सागर से हिमालय की उत्पत्ति का रहस्य

क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी—माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर)—के पत्थरों में चूना पत्थर और प्राचीन समुद्री जीवों (Marine Fossils) के जीवाश्म पाए जाते हैं? करोड़ों वर्ष पूर्व जहाँ आज गगनचुंबी हिमालय खड़ा है, वहाँ एक उथला समुद्र लहराता था जिसे 'टेथिस सागर' कहा जाता था। जब दक्षिण से भारतीय प्लेट उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट से टकराई, तो टेथिस सागर के तलछट पर ऐसा भीषण संपीड़न बल लगा कि समुद्र का तल उठकर दुनिया की सबसे युवा और ऊंची वलित पर्वतमाला (Young Fold Mountains)—हिमालय—में बदल गया। यह टक्कर आज भी जारी है और हिमालय प्रतिवर्ष कुछ मिलीमीटर ऊंचा उठ रहा है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत के भौतिक स्वरूप की विविधता ही हमारे देश की प्राकृतिक संपदा का आधार है। हिमालय न केवल सदानीरा नदियों और जल-विद्युत का स्रोत है, बल्कि वह उत्तर से आने वाली बर्फीली साइबेरियाई हवाओं को रोककर भारत को एक अखंड मानसूनी जलवायु प्रदान करता है। उत्तरी मैदान देश का 'अन्न का कटोरा' हैं, जबकि प्रायद्वीपीय पठार—विशेष रूप से झारखंड का छोटानागपुर पठार—खनिजों का विशाल भंडारगृह है जिसने देश के औद्योगिकीकरण को गति दी है। तटीय मैदान और द्वीप समूह मत्स्य पालन और विदेशी व्यापार के प्रमुख केंद्र हैं। CBSE बोर्ड परीक्षा में भूगोल खंड में यह सबसे विस्तृत और सर्वाधिक भारांक वाला अध्याय है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना (क्रस्ट, मैंटल, कोर) की आधारभूत जानकारी।
  • अपरदन (Erosion), अपक्षय (Weathering) और निक्षेपण (Deposition) की प्रक्रियाओं का ज्ञान।
  • पर्वत, पठार और मैदान की परिभाषा और दृश्य पहचान।
  • भारत के मानचित्र पर प्रमुख नदियों (गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र) और पर्वतमालाओं की अवस्थिति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत और तीन प्रकार की प्लेट सीमाओं (अभिसारी, अपसारी, रूपांतर) की व्याख्या करना।
  • हिमालय की तीन समानांतर श्रेणियों—महान हिमालय (हिमाद्रि), निम्न हिमालय (हिमाचल), और बाह्य हिमालय (शिवालिक) की भू-आकृतिक विशेषताओं का विश्लेषण करना।
  • उत्तरी मैदान के चार विशिष्ट क्षेत्रों—भाबर, तराई, भांगर, और खादर में तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करना।
  • प्रायद्वीपीय पठार के दो मुख्य भागों (मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार) तथा पश्चिमी घाट व पूर्वी घाट के लक्षणों की तुलना करना।
  • झारखंड के छोटानागपुर पठार की भू-आकृतिक स्थिति, दामोदर भ्रंश घाटी और खनिज संपन्नता को समझना।
  • थार मरुस्थल (बरकान), तटीय मैदानों (कोंकण, मालाबार, कोरोमंडल) तथा द्वीपों (लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार) के लक्षणों का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. भूगर्भीय निर्माण और प्लेट विवर्त...
2 2. हिमालय पर्वत शृंखला (The Himalay...
3 3. उत्तरी मैदान (The Northern Plain...
4 4. प्रायद्वीपीय पठार (The Peninsula...
5 5. भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. भूगर्भीय निर्माण और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics)

पृथ्वी की सतह के निर्माण की व्याख्या प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Theory of Plate Tectonics) द्वारा की जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी 7 बड़ी तथा कुछ छोटी प्लेटों से बनी है।

प्लेटों की गतियों के तीन प्रकार:

  • 1. अभिसारी सीमा (Convergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के करीब आती हैं, तो वे या तो टकराकर मुड़ जाती हैं (वलन - Folding) या एक प्लेट दूसरी के नीचे धंस जाती है। हिमालय पर्वत का निर्माण इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
  • 2. अपसारी सीमा (Divergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो भ्रंश (Faulting) और दरारें बनती हैं तथा ज्वालामुखी लावा बाहर निकलता है।
  • 3. रूपांतर सीमा (Transform Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर क्षैतिज रूप से फिसलती हैं, जिससे भूकंप आते हैं।

गोंडवानालैंड और हिमालय की उत्पत्ति:

प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ही विशाल भूखंड था जिसे पैंजिया कहा जाता था। इसका दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड (Gondwanaland) कहलाया जिसमें आज का भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका शामिल थे; जबकि उत्तरी भाग अंगारालैंड कहलाया।

संवहनीय धाराओं ने गोंडवानालैंड को कई टुकड़ों में तोड़ दिया। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित हुई और बहुत बड़ी यूरेशियन प्लेट से टकराई। इस टकराव के कारण दोनों प्लेटों के बीच स्थित टेथिस सागर (Tethys Geosyncline) की तलछटी चट्टानें वलित होकर ऊपर उठ गईं और हिमालय की पर्वत शृंखला का निर्माण हुआ।

2. हिमालय पर्वत शृंखला (The Himalayan Mountains)

हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर फैली भूगर्भीय रूप से युवा और बनावट के दृष्टिकोण से वलित पर्वत शृंखला (Fold Mountains) है। यह पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी तक 2,400 किलोमीटर की लंबाई में एक चाप (Arc) के रूप में फैली है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी तथा अरुणाचल प्रदेश में 150 किमी है।

उत्तर से दक्षिण की ओर तीन समानांतर श्रेणियां:

श्रेणी का नाम औसत ऊंचाई व चौड़ाई शैल संरचना प्रमुख चोटियां / घाटियां / दर्रे
1. महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि - Himadri) औसत ऊंचाई 6,000 मीटर; सबसे सतत शृंखला कोर ग्रेनाइट (Granite) का बना है; सदैव बर्फ से ढका रहता है माउंट एवरेस्ट (8,848 मी.), कंचनजुंगा (8,598 मी.), मकालू, धौलागिरि, नंगा पर्वत, नंदा देवी। गंगोत्री व यमुनोत्री हिमानियां।
2. निम्न या मध्य हिमालय (हिमाचल - Himachal) ऊंचाई 3,700 से 4,500 मीटर; चौड़ाई 50 किमी अत्यधिक संपीड़ित तथा कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) सबसे लंबी शृंखला पीर पंजाल; धौलाधार और महाभारत श्रेणियां। कश्मीर, कांगड़ा और कुल्लू की प्रसिद्ध घाटियां व पर्यटन स्थल (शिमला, मसूरी, नैनीताल)।
3. बाह्य हिमालय (शिवालिक - Shiwaliks) ऊंचाई 900 से 1,100 मीटर; चौड़ाई 10 से 50 किमी असंपीड़ित अवसादों, बजरी और जलोढ़ से निर्मित निम्न हिमाचल और शिवालिक के बीच की अनुदैर्ध्य घाटियों को 'दून' (Duns) कहा जाता है—जैसे देहरादून, कोटली दून और पाटली दून।

नदी घाटियों के आधार पर प्रादेशिक विभाजन:

  • पंजाब हिमालय: सिंधु और सतलुज के बीच (कश्मीर व हिमाचल हिमालय)।
  • कुमाऊं हिमालय: सतलुज और काली नदी के बीच।
  • नेपाल हिमालय: काली और तीस्ता नदी के बीच।
  • असम हिमालय: तीस्ता और दिहांग (ब्रह्मपुत्र) नदी के बीच।
  • पूर्वांचल (Purvanchal): दिहांग महाखड्ड के बाद हिमालय दक्षिण की ओर मुड़ जाता है—पटकाई, नागा, मिजो और मणिपुर पहाड़ियां।

3. उत्तरी मैदान (The Northern Plains): भाबर, तराई, भांगर और खादर

उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों—सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों द्वारा बहाकर लाई गई जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) के लाखों वर्षों के निक्षेपण से बना है। इसका क्षेत्रफल 7 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह मैदान 2,400 किमी लंबा और 240 से 320 किमी चौड़ा है। सघन जनसंख्या, उपजाऊ मिट्टी, प्रचुर जल और अनुकूल जलवायु के कारण यह भारत का सबसे उत्पादक कृषि क्षेत्र है।

मृदा और धरातलीय स्वरूप के आधार पर 4 उप-क्षेत्र:

क्षेत्र अवस्थिति व बनावट जल प्रवाह व वनस्पति लक्षण कृषि उपयोगिता
1. भाबर (Bhabar) शिवालिक की ढाल पर 8 से 16 किमी चौड़ी संकरी पट्टी; कंकड़-पत्थरों (Pebbles) का जमाव। अत्यधिक पारगम्यता के कारण सभी सरिताएं इस पट्टी में विलुप्त (भूमिगत) हो जाती हैं। कृषि के लिए अनुपयुक्त।
2. तराई (Terai) भाबर के दक्षिण में स्थित; बारीक मिट्टी का जमाव। विलुप्त नदियां पुनः सतह पर प्रकट होती हैं, जिससे दलदली और नम (Marshy) क्षेत्र बनता है। सघन वनों और वन्यजीवों से युक्त (उदा. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान)। वनों को साफ करके शरणार्थियों को बसाया गया और गन्ने, चावल की खेती होती है।
3. भांगर (Bhangar) नदियों के बाढ़ के मैदान के ऊपर स्थित पुराना जलोढ़ (Older Alluvium); वेदिका (Terrace) जैसी आकृति। मृदा में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में 'कंकड़' (Kankar) कहा जाता है। कम उपजाऊ; गहन सिंचाई की आवश्यकता होती है।
4. खादर (Khadar) बाढ़ के मैदानों की नवीन जलोढ़ (Newer Alluvium) मिट्टी; निचला भाग। प्रत्येक वर्ष बाढ़ के पानी द्वारा नई महीन गाद (Silt) बिछाई जाती है। सर्वाधिक उपजाऊ; गहन कृषि (गहन धान, गेहूं, दलहन) के लिए आदर्श।

4. प्रायद्वीपीय पठार (The Peninsular Plateau) एवं छोटानागपुर पठार (झारखंड)

प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला भूभाग है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा कायांतरित शैलों से बना है। यह प्राचीन गोंडवानालैंड के टूटने और उत्तर दिशा में खिसकने से बना, इसलिए यह भारत का सबसे प्राचीन भूखंड है।

पठार के दो मुख्य भाग:

  1. 1. मध्य उच्चभूमि (Central Highlands): नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है। इसमें मालवा का पठार शामिल है। इसके पूर्व विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड और बघेलखंड कहते हैं। इसका धुर पूर्वी विस्तार छोटा नागपुर पठार (Chotanagpur Plateau) है, जिससे होकर दामोदर नदी बहती है।
  2. 2. दक्कन का पठार (Deccan Plateau): एक त्रिभुजाकार भूभाग है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा शृंखला है, जबकि महादेव, कैमूर की पहाड़ियां तथा मैकाल शृंखला इसके पूर्वी विस्तार हैं। पूर्वोत्तर में इसे मेघालय का पठार और कार्बी आंगलोंग पठार कहा जाता है (गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियां)।

दक्कन ट्रैप (Deccan Trap):

प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी भाग में पाई जाने वाली काली मृदा (Black Soil) को 'दक्कन ट्रैप' कहते हैं। इसकी उत्पत्ति ज्वालामुखी लावा के अपक्षय से हुई है, जो कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम है।

पश्चिमी घाट बनाम पूर्वी घाट का तुलनात्मक विश्लेषण:

लक्षण पश्चिमी घाट (Western Ghats - सह्याद्रि) पूर्वी घाट (Eastern Ghats)
निरंतरता (Continuity) सतत (Continuous) शृंखला; केवल दर्रों (थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट) द्वारा ही पार किया जा सकता है। असतत (Discontinuous) और अनियमित; बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) ने इसे काट दिया है।
औसत ऊंचाई ऊंचे हैं; औसत ऊंचाई 900 से 1,600 मीटर। अपेक्षाकृत नीचे हैं; औसत ऊंचाई 600 मीटर।
सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी (2,695 मी.) तथा दोदाबेटा (2,637 मी.)। महेंद्रगिरि (1,501 मी.)।
वर्षा का प्रकार पर्वतीय वर्षा (Orographic Rain); पश्चिमी ढालों पर 250 सेमी से अधिक वर्षा। कम वर्षा; शीत ऋतु में लौटते मानसून से वर्षा होती है।

झारखंड का छोटानागपुर पठार:

झारखंड राज्य का अधिकांश भाग छोटा नागपुर पठार पर स्थित है। यह खनिज संपदा (लोहा, कोयला, तांबा, अभ्रक, बॉक्साइट) से अत्यंत समृद्ध है और इसे 'भारत का रूर' (Ruhr of India) कहा जाता है। पारसनाथ पहाड़ी (1,365 मीटर) इस पठार का सबसे ऊंचा शिखर है। दामोदर, स्वर्णरेखा, बराकर और उत्तरी कोयल यहाँ की प्रमुख नदियां हैं।

5. भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप समूह

भारत के शेष तीन भौतिक स्वरूप देश की भौगोलिक विविधता को पूर्णता प्रदान करते हैं:

1. भारतीय मरुस्थल (The Indian Desert - थार):

  • अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारे पर बालू के टिब्बों से ढका एक तरंगित मैदान है।
  • यहाँ प्रतिवर्ष 150 मिमी से भी कम वर्षा होती है। शुष्क जलवायु और वनस्पति विहीन क्षेत्र है।
  • वर्षा ऋतु में कुछ सरिताएं दिखती हैं पर बालू में ही विलीन हो जाती हैं। लूनी (Luni) इस क्षेत्र की एकमात्र बड़ी नदी है।
  • बरकान (Barchans): अर्धचंद्राकार बालू का टीला जिसका प्रसार बहुत बड़े क्षेत्र पर होता है (विशेषकर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास जैसलमेर में)।

2. तटीय मैदान (The Coastal Plains):

प्रायद्वीपीय पठार के दोनों किनारों पर संकीर्ण तटीय पट्टियों का विस्तार है:

  • पश्चिमी तटीय मैदान: अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच संकीर्ण मैदान है। इसके तीन भाग हैं: उत्तर में कोंकण (मुंबई तथा गोवा), मध्य में कन्नड़ मैदान, और दक्षिण में मालाबार तट (केरल - लैगून व कयाल)।
  • पूर्वी तटीय मैदान: बंगाल की खाड़ी के साथ चौड़ा व समतल मैदान है। उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार (Northern Circar) तथा दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट (Coromandel Coast) कहते हैं। महानदी, गोदावरी, कृष्णा व कावेरी विशाल डेल्टा बनाती हैं। ओडिशा में स्थित चिल्का झील (Chilika Lake) भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है।

3. द्वीप समूह (The Island Groups):

  • लक्षद्वीप समूह: केरल के मालाबार तट के पास स्थित छोटे प्रवाल द्वीपों (Coral Islands) से बना है। इसका क्षेत्रफल मात्र 32 वर्ग किमी है। कवारत्ती इसका प्रशासनिक मुख्यालय है। पिटली द्वीप जहाँ मानव निवास नहीं है, वहाँ एक पक्षी अभयारण्य है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर फैले द्वीपों की शृंखला है। ये जलमग्न पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं। यह आकार में बड़े, संख्या में बहुल और बिखरे हुए हैं। उत्तर में अंडमान तथा दक्षिण में निकोबार है। भूमध्य रेखा के करीब होने के कारण यहाँ विषुवतीय जलवायु पाई जाती है। भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी 'बैरन द्वीप' (Barren Island) अंडमान और निकोबार में ही स्थित है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

माउंट एवरेस्ट
8,848.86 मीटर (नेपाल)
विश्व का सर्वोच्च शिखर; महान हिमालय (हिमाद्रि) में स्थित।
कंचनजुंगा
8,598 मीटर (सिक्किम, भारत)
भारत में स्थित हिमालय का सर्वोच्च शिखर।
अनाईमुडी
2,695 मीटर (केरल)
प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर।
महेंद्रगिरि
1,501 मीटर (ओडिशा)
पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर।
पारसनाथ पहाड़ी
1,365 मीटर (गिरिडीह, झारखंड)
छोटा नागपुर पठार और झारखंड का सर्वोच्च शिखर।
चिल्का झील
ओडिशा (महानदी डेल्टा के दक्षिण)
भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (लघु उत्तरीय): उत्तरी मैदान के 'भांगर' (Bhangar) और 'खादर' (Khadar) में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: उत्तरी मैदान की मृदा को आयु और नवीनता के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है:

लक्षण भांगर (Bhangar) खादर (Khadar)
मृदा की प्रकृति यह पुरातन जलोढ़ (Older Alluvium) मिट्टी से बना है। यह नवीन जलोढ़ (Newer Alluvium) मिट्टी से बना है।
अवस्थिति नदियों के बाढ़ वाले मैदान से ऊपर स्थित है जहाँ बाढ़ का पानी नहीं पहुंचता। नदियों के निचले बाढ़ मैदानों में स्थित है जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी पहुंचता है।
कंकड़ व उपजाऊपन इसमें चूनेदार निक्षेप (कंकड़) पाए जाते हैं; यह अपेक्षाकृत कम उपजाऊ है। यह बारीक गाद से युक्त होता है; यह अत्यधिक उपजाऊ और गहन कृषि हेतु सर्वोत्तम है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (दीर्घ उत्तरीय): पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए। कौन-सा घाट अधिक ऊंचा और सतत है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी और पूर्वी किनारों पर क्रमशः पश्चिमी और पूर्वी घाट स्थित हैं:

1. पश्चिमी घाट (Western Ghats - सह्याद्रि):

  • सतत शृंखला: यह एक निरंतर पर्वतमाला है जिसे केवल थाल घाट, भोर घाट और पाल घाट दर्रों द्वारा ही पार किया जा सकता है।
  • ऊंचाई: यह अधिक ऊंचा है; इसकी औसत ऊंचाई 900 से 1,600 मीटर है।
  • सर्वोच्च शिखर: अनाईमुडी (2,695 मीटर) और दोदाबेटा (2,637 मीटर)।
  • वर्षा: अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों को रोककर पश्चिमी ढलानों पर भारी पर्वतीय वर्षा (250 सेमी+) कराता है।

2. पूर्वी घाट (Eastern Ghats):

  • असतत शृंखला: यह सतत नहीं है बल्कि बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा कई स्थानों पर विखंडित (कटा-फटा) है।
  • ऊंचाई: अपेक्षाकृत नीचा है; इसकी औसत ऊंचाई केवल 600 मीटर है।
  • सर्वोच्च शिखर: महेंद्रगिरि (1,501 मीटर)।
  • वर्षा: यहाँ ग्रीष्मकाल में कम वर्षा होती है; मुख्य वर्षा शीतकाल में उत्तर-पूर्वी लौटते मानसून से होती है।

निष्कर्ष: पश्चिमी घाट पूर्वी घाट की तुलना में काफी अधिक ऊंचा और सतत है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): हिमालय की तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियों—हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: उत्तर से दक्षिण दिशा में हिमालय की तीन प्रमुख समानांतर श्रेणियां हैं:

  1. महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि): यह सबसे उत्तरी और सबसे सतत श्रेणी है। इसकी औसत ऊंचाई 6,000 मीटर है। इसका कोर ग्रेनाइट का बना है और विश्व के सर्वोच्च शिखर (माउंट एवरेस्ट, कंचनजुंगा) इसी में स्थित हैं। यह सदैव बर्फ से ढकी रहती है।
  2. निम्न या मध्य हिमालय (हिमाचल): हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है। औसत ऊंचाई 3,700 से 4,500 मीटर और चौड़ाई 50 किमी है। पीर पंजाल सबसे लंबी शृंखला है। इसमें कश्मीर, कांगड़ा व कुल्लू की सुंदर घाटियां स्थित हैं।
  3. बाह्य हिमालय (शिवालिक): यह सबसे दक्षिणी श्रेणी है जिसकी ऊंचाई 900 से 1,100 मीटर है। यह नदियों द्वारा बहाकर लाए गए असंपीड़ित अवसादों से बनी है। निम्न हिमाचल और शिवालिक के बीच की घाटियों को 'दून' (जैसे देहरादून) कहा जाता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (विश्लेषणात्मक): झारखंड के संदर्भ में 'छोटा नागपुर पठार' की भौगोलिक स्थिति और इसके आर्थिक महत्व की विवेचना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. भौगोलिक स्थिति:

छोटा नागपुर पठार प्रायद्वीपीय पठार की मध्य उच्चभूमि का धुर पूर्वी विस्तार है। झारखंड राज्य का लगभग संपूर्ण भूभाग इसी पठार पर अवस्थित है। इसका निर्माण अत्यंत प्राचीन आर्कियन ग्रेनाइट और नीस चट्टानों से हुआ है। दामोदर, स्वर्णरेखा, बराकर और उत्तरी कोयल यहाँ की प्रमुख नदियां हैं। पारसनाथ पहाड़ी (1,365 मीटर) इस पठार का सर्वोच्च बिंदु है।

2. आर्थिक महत्व:

  • खनिज संपदा का भंडारगृह: भारत का 40% से अधिक खनिज संसाधन इसी पठार में पाया जाता है। झरिया, बोकारो, कर्णपुरा में उत्तम कोटि का कोयला; सिंहभूम में लौह अयस्क, तांबा और यूरेनियम (जादूगोड़ा); तथा कोडरमा व गिरिडीह में विश्व प्रसिद्ध अभ्रक (Mica) पाया जाता है। इसलिए इसे 'भारत का रूर' (Ruhr of India) कहा जाता है।
  • भारी उद्योगों की रीढ़: जमशेदपुर का टाटा स्टील (TISCO), बोकारो स्टील प्लांट, तथा रांची का HEC संयंत्र इसी पठार की खनिज संपदा पर आधारित हैं।
  • जल-विद्युत: दामोदर घाटी निगम (DVC) भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है जो इस पठार की जीवनरेखा है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को भारत में बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मी.) नेपाल में स्थित है। भारत में हिमालय की सर्वोच्च चोटी 'कंचनजुंगा' (8,598 मी., सिक्किम) है, तथा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में K2 (गॉडविन ऑस्टिन - 8,611 मी.) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

'भाबर' और 'तराई' के क्रम में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पहाड़ की तलहटी में पहले कंकड़-पत्थरों वाला 'भाबर' (जहाँ नदियां लुप्त होती हैं) आता है; उसके दक्षिण में दलदली और वनाच्छादित 'तराई' (जहाँ नदियां पुनः प्रकट होती हैं) आता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के सर्वोच्च शिखरों को उलट देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर 'अनाईमुडी' (2,695 मी.) है; पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर 'महेंद्रगिरि' (1,501 मी.) है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लक्षद्वीप को ज्वालामुखीय द्वीप समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लक्षद्वीप 'प्रवाल द्वीप' (Coral Island - सूक्ष्म जीवों के कंकालों से निर्मित) है; जबकि अंडमान-निकोबार का बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी द्वीप है।

भारत के 6 प्रमुख भू-आकृतिक विभाग एवं पर्वत प्रणालियां

भारत का भौतिक स्वरूप: 6 प्रमुख भू-आकृतिक इकाइयां एवं शैल संरचना 1. हिमालय एवं उत्तरी मैदान • हिमालय की 3 श्रेणियां: 1. हिमाद्रि (6000 मी., ग्रेनाइट कोर) 2. हिमाचल (3700-4500 मी., पीर पंजाल) 3. शिवालिक (900-1100 मी., दून घाटियां) • उत्तरी मैदान के 4 भाग: 1. भाबर: कंकड़ पट्टी, नदियां लुप्त 2. तराई: दलदली, सघन वन (दुधवा) 3. भांगर: पुराना जलोढ़, कंकड़ युक्त 4. खादर: नवीन जलोढ़, अति-उर्वर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र बेसिन • क्षेत्रफल: 7 लाख वर्ग किमी • लंबाई: 2,400 किमी • देश का सबसे बड़ा अन्न भंडार 2. प्रायद्वीपीय पठार व घाट • प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग: - मध्य उच्चभूमि (मालवा, बुंदेलखंड) - दक्कन का पठार (दक्कन ट्रैप-काली मिट्टी) - छोटानागपुर पठार (खनिज भंडार/रूर) • पश्चिमी घाट (सह्याद्रि): - सतत शृंखला (ऊंचाई 900-1600 मी.) - अनाईमुडी (2,695 मी.) सर्वोच्च शिखर - पर्वतीय वर्षा (250 सेमी+) • पूर्वी घाट: - असतत व कटा-फटा (ऊंचाई 600 मी.) - महेंद्रगिरि (1,501 मी.) सर्वोच्च शिखर झारखंड: पारसनाथ (1,365 मी.) दामोदर, स्वर्णरेखा, लोहा व कोयला 3. मरुस्थल, तट एवं द्वीप • थार मरुस्थल (The Desert): - 150 मिमी/वर्ष से कम वर्षा - 'बरकान' (अर्धचंद्राकार बालू का टीला) - लूनी नदी (एकमात्र बड़ी नदी) • तटीय मैदान: - पश्चिम: कोंकण, कन्नड़, मालाबार तट - पूर्व: उत्तरी सरकार, कोरोमंडल तट - चिल्का झील (भारत की सबसे बड़ी लैगून) • द्वीप समूह (Islands): - लक्षद्वीप: 32 वर्ग किमी, प्रवाल द्वीप - अंडमान-निकोबार: जलमग्न पर्वत शिखर - बैरन द्वीप: भारत का सक्रिय ज्वालामुखी अतुल्य प्राकृतिक विविधता

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की पर्पटी 7 प्रमुख प्लेटों से बनी है; भारतीय और यूरेशियन प्लेट के अभिसरण से टेथिस सागर से हिमालय की उत्पत्ति हुई।
मुख्य बिंदु 2
हिमालय 2,400 किमी लंबा वलित पर्वत है; इसकी 3 श्रेणियां हैं—महान हिमालय/हिमाद्रि (6,000 मी.), निम्न हिमालय/हिमाचल (3,700-4,500 मी.), और बाह्य हिमालय/शिवालिक (900-1,100 मी.)।
मुख्य बिंदु 3
शिवालिक और हिमाचल के मध्य स्थित अनुदैर्ध्य घाटियों को 'दून' (जैसे देहरादून, पाटली दून) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 4
उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बना 7 लाख वर्ग किमी का उपजाऊ मैदान है।
मुख्य बिंदु 5
धरातलीय बनावट के आधार पर उत्तरी मैदान 4 भागों में बंटा है: भाबर (कंकड़ पट्टी, नदियां लुप्त), तराई (दलदली, सघन वन), भांगर (पुरातन जलोढ़, कंकड़) और खादर (नवीन जलोढ़, अति-उर्वर)।
मुख्य बिंदु 6
प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग है और कठोर आग्नेय व कायांतरित चट्टानों से बना देश का सबसे पुराना भूखंड है।
मुख्य बिंदु 7
पश्चिमी घाट एक सतत और ऊंचा पर्वत (औसत 900-1,600 मी., सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी 2,695 मी.) है; जबकि पूर्वी घाट असतत और नदियों द्वारा विखंडित है (सर्वोच्च शिखर महेंद्रगिरि 1,501 मी.)।
मुख्य बिंदु 8
झारखंड का छोटानागपुर पठार खनिजों (कोयला, लोहा, तांबा, अभ्रक) का विपुल भंडारगृह है और इसे 'भारत का रूर' कहा जाता है; पारसनाथ (1,365 मी.) इसका सर्वोच्च शिखर है।
मुख्य बिंदु 9
थार मरुस्थल 150 मिमी से कम वर्षा वाला रेतीला मैदान है जहाँ 'बरकान' (अर्धचंद्राकार बालू के टीले) और लूनी नदी पाई जाती है।
मुख्य बिंदु 10
अरब सागर में लक्षद्वीप प्रवाल द्वीपों से बना है; जबकि बंगाल की खाड़ी में अंडमान-निकोबार में भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी 'बैरन द्वीप' स्थित है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
उत्तरी मैदान की उस संकीर्ण पट्टी को क्या कहा जाता है जहाँ नदियां कंकड़-पत्थरों के जमाव के कारण भूमिगत (विलुप्त) हो जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
शिवालिक की ढाल पर 8 से 16 किमी चौड़ी पट्टी 'भाबर' कहलाती है जहाँ अत्यधिक पारगम्यता के कारण नदियां विलुप्त हो जाती हैं।
2
प्रायद्वीपीय भारत तथा पश्चिमी घाट (Western Ghats) का सर्वोच्च शिखर निम्नलिखित में से कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
अनाईमुडी (2,695 मीटर) केरल में स्थित है जो प्रायद्वीपीय भारत और पश्चिमी घाट दोनों का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है।
3
झारखंड का छोटानागपुर पठार अपनी विपुल खनिज संपदा के कारण विश्व के किस प्रसिद्ध औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर 'भारत का रूर' (Ruhr of India) कहलाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
जर्मनी की रूर घाटी कोयले और खनिजों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। छोटानागपुर पठार में भी प्रचुर कोयला व लोहा मिलने के कारण इसे 'भारत का रूर' कहा जाता है।
4
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano) कहाँ स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 'बैरन द्वीप' (Barren Island) पर स्थित है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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