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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 19
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

निर्धनता: एक चुनौती

स्वतंत्र भारत के समक्ष सबसे विकराल और गंभीर बहुआयामी चुनौती 'निर्धनता' (Poverty) है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि 'भारत सचमुच तभी स्वतंत्र होगा जब उसका सबसे निर्धन व्यक्ति भी मानवीय कष्टों से मुक्त होगा।' प्रस्तुत अध्याय झारखंड की राजधानी रांची के निकट गेहूं के आटे की मिल में काम करने वाले दैनिक मजदूर 'राम सरन' (शहरी निर्धनता) और उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास 'लक्खा सिंह' (ग्रामीण निर्धनता) के सजीव केस स्टडीज से प्रारंभ होता है। अध्याय में समाज वैज्ञानिकों द्वारा निर्धनता को देखने के बहुआयामी पैमानों—आय व उपभोग के अतिरिक्त अशिक्षा, कुपोषण, स्वास्थ्य व स्वच्छता का अभाव, 'सामाजिक अपवर्जन' (Social Exclusion) तथा 'असुरक्षितता' (Vulnerability)—की विस्तृत व्याख्या की गई है। इसके पश्चात भारत में 'निर्धनता रेखा' (Poverty Line) के निर्धारण के कैलोरी मापदंड (ग्रामीण: 2,400 कैलोरी, शहरी: 2,100 कैलोरी) और मौद्रिक स्तर (2011-12 NSSO: ग्रामीण ₹816, शहरी ₹1,000 प्रति माह), तथा विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय मानक ($1.90/दिन) का विश्लेषण प्रस्तुत है। अध्याय में भारत के सर्वाधिक निर्धन सामाजिक समूहों (अनुसूचित जनजाति - 43%, अनुसूचित जाति - 29%), अंतर-राज्यीय असमानताओं (बिहार, ओडिशा, झारखंड बनाम केरल व पंजाब), निर्धनता के ऐतिहासिक व सामाजिक कारणों, तथा सरकार के दोहरे निर्धनता उन्मूलन दृष्टिकोण—आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन और लक्षित निर्धनता-रोधी कार्यक्रम जैसे 'मनरेगा 2005' (MGNREGA - 100 दिन का रोजगार), PMRY, SGSY और 'अंत्योदय अन्न योजना' (AAY)—का गहन मूल्यांकन किया गया है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE) बोर्ड परीक्षा में निर्धनता रेखा के मापदंड, मनरेगा 2005 की विशेषताएं, और निर्धनता के कारणों पर प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

रांची के राम सरन का संघर्ष और महात्मा गांधी की वह अमर प्रतिज्ञा

झारखंड की राजधानी रांची के बाहरी इलाके में एक आटा मिल में काम करने वाले 33 वर्षीय राम सरन की जिंदगी को देखिए। महीने भर भारी बोरियां ढोने के बाद उसे मात्र ₹1,500 मिलते हैं। इस मामूली रकम से उसे छह सदस्यों के परिवार का पेट पालना है, जिसमें उसकी पत्नी संता देवी दूसरों के घरों में झाड़ू-बर्तन कर ₹800 कमाती है और उसका 10 वर्षीय बेटा चाय की दुकान पर ₹300 के लिए बर्तन धोता है! परिवार ईंट-मिट्टी के एक कमरे के किराए के मकान में रहता है जहाँ न पीने का साफ पानी है और न शौचालय। उसके 4 बच्चों के बदन पर फटे-पुराने कपड़े हैं और जूते पहनना तो उनके लिए सपना है। बीमार वृद्ध माता-पिता गांव में अकेले तड़प रहे हैं। राम सरन की यह बेबसी भारत के उन 27 करोड़ लोगों की दास्तान है जो हर रात भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर कहा था: 'भारत केवल तिरंगा फहराने से स्वतंत्र नहीं कहलाएगा; भारत वास्तविक रूप में स्वतंत्र उस दिन होगा जब उसका सबसे गरीब और लाचार नागरिक भी मानवीय गरिमा और कष्टों से मुक्त होगा!'

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखंड प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों (कोयला, लोहा, तांबा, यूरेनियम) का धनी राज्य है, परंतु विडंबना यह है कि यह देश के सर्वाधिक गरीबी से जूझने वाले राज्यों (36% से अधिक गरीबी दर) में गिना जाता है। यहाँ के ग्रामीण इलाकों और जनजातीय समाज में भुखमरी, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और मौसमी पलायन एक कड़वी सच्चाई है। इस अध्याय को समझना छात्रों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (मनरेगा, राशन वितरण, अंत्योदय) के क्रियान्वयन की कमियों को पहचानने और राज्य को गरीबी मुक्त बनाने में सकारात्मक योगदान देने हेतु वैचारिक दृष्टि प्रदान करता है। CBSE बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय केंद्रीय महत्व रखता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • संसाधन के रूप में लोग और मानव पूंजी निर्माण की बुनियादी समझ।
  • दैनिक मजदूरी, कैलोरी और जीवन-यापन की न्यूनतम आवश्यकताओं का ज्ञान।
  • राशन कार्ड और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का सामान्य परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • शहरी (राम सरन) और ग्रामीण (लक्खा सिंह) केस स्टडीज के आधार पर निर्धनता के बहुआयामी स्वरूप को रेखांकित करना।
  • सामाजिक वैज्ञानिकों के दृष्टिकोण से 'सामाजिक अपवर्जन' (Social Exclusion) और 'असुरक्षितता' (Vulnerability) की व्याख्या करना।
  • भारत में निर्धनता रेखा (Poverty Line) के न्यूनतम कैलोरी उपभोग (ग्रामीण 2400, शहरी 2100) और मौद्रिक स्तर की गणना करना।
  • भारत में सर्वाधिक निर्धन सामाजिक समूहों (ST, SC) और आर्थिक समूहों (खेतिहर मजदूर, अनियमित श्रमिक) की पहचान करना।
  • अंतर-राज्यीय असमानताओं (केरल और पंजाब की सफलता बनाम बिहार, ओडिशा, झारखंड की स्थिति) के कारणों का विश्लेषण करना।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा) की प्रमुख विशेषताओं और सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. निर्धनता के दो विशिष्ट मामले: शह...
2 2. सामाजिक वैज्ञानिकों की दृष्टि मे...
3 3. निर्धनता रेखा (Poverty Line): नि...
4 4. असुरक्षित समूह, अंतर-राज्यीय असम...
5 5. निर्धनता उन्मूलन के सरकारी उपाय:...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. निर्धनता के दो विशिष्ट मामले: शहरी एवं ग्रामीण परिदृश्य

हमारे देश में हर चौथा व्यक्ति निर्धन है। इसका अर्थ है कि भारत में करोड़ों लोग घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। इसे दो विशिष्ट मामलों से समझा जा सकता है:

1. शहरी मामला: राम सरन की कहानी (रांची, झारखंड):

  • राम सरन रांची के निकट एक आटा मिल में दैनिक मजदूर है। जब उसे काम मिलता है तो वह महीने में लगभग ₹1,500 कमाता है।
  • परिवार में 6 सदस्य हैं: वह, उसकी पत्नी संता देवी और 6 महीने से 12 वर्ष के 4 बच्चे। इसके अलावा गांव में रह रहे उसके वृद्ध और भूमिहीन माता-पिता भी उसी पर निर्भर हैं।
  • पत्नी घरों में नौकरानी का काम कर ₹800 और 10 वर्षीय बड़ा बेटा चाय की दुकान पर काम कर ₹300 कमाता है।
  • परिवार ईंट-मिट्टी के एक कमरे के किराए के मकान में रहता है। परिवार को दिन में दो वक्त का भोजन (दाल और चावल) भी बमुश्किल मिल पाता है। बच्चों के पास जूते नहीं हैं, साबुन और तेल विलासिता की वस्तुएं हैं।

2. ग्रामीण मामला: लक्खा सिंह की कहानी (मेरठ, उत्तर प्रदेश):

  • लक्खा सिंह का परिवार भूमिहीन है। वह बड़े किसानों के खेतों में अनियमित काम करता है। कई बार पूरे दिन के कड़े परिश्रम के बाद उसे मात्र ₹50 नकद या कुछ अनाज और दाल मिलती है।
  • 8 सदस्यों का परिवार गांव के बाहर घास-फूस की कच्ची झोपड़ी में रहता है। परिवार की महिलाएं खेतों में मवेशियों के लिए चारा काटने में दिन बिताती हैं।
  • उसके पिता तपेदिक (टीबी) के मरीज थे और दवा के अभाव में दो वर्ष पहले चल बसे; अब उसकी वृद्ध मां भी उसी बीमारी से पीड़ित है। गांव में प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद लक्खा सिंह कभी स्कूल नहीं गया।

निर्धनता के अंतर्निहित आयाम:

ये दोनों मामले दर्शाते हैं कि निर्धनता का अर्थ केवल पैसे की कमी नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है: भूख और आश्रय न होना, बच्चों को स्कूल न भेज पाना, बीमारी में इलाज न करा पाना, साफ पानी और स्वच्छता का अभाव, नियमित रोजगार की कमी तथा असहायता (लाचारी) की भावना के साथ जीना।

2. सामाजिक वैज्ञानिकों की दृष्टि में निर्धनता: सामाजिक अपवर्जन एवं असुरक्षितता

आधुनिक अर्थशास्त्रियों और समाज वैज्ञानिकों ने निर्धनता के मापन को आय और उपभोग से आगे बढ़ाकर नए सामाजिक पैमानों से जोड़ा है:

अवधारणा / पैमाना वैज्ञानिक अर्थ एवं परिभाषा व्यावहारिक प्रभाव एवं उदाहरण
1. सामाजिक अपवर्जन (Social Exclusion) इस अवधारणा के अनुसार निर्धनों को केवल एक घटिया और अलग-थलग माहौल में दूसरे निर्धनों के साथ ही रहना पड़ता है; वे बेहतर परिवेश में संपन्न लोगों के साथ सामाजिक सुविधाओं और अवसरों से वंचित (अपवर्जित) कर दिए जाते हैं। यह निर्धनता का कारण भी है और परिणाम भी। भारत में जाति व्यवस्था इसका ज्वलंत उदाहरण है जहाँ निचली जातियों (दलितों) को बेहतर सामाजिक अवसरों, समान कुओं व मंदिरों से सदियों तक बहिष्कृत रखा गया।
2. असुरक्षितता (Vulnerability) यह किसी व्यक्ति या समुदाय (जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा, शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति) के भविष्य में निर्धन बने रहने या और अधिक निर्धन होने की संभावना (Probability) का माप है। जब कोई प्राकृतिक आपदा (बाढ़, सूखा, भूकंप) या महामारी आती है, तो ये समुदाय सबसे पहले और सबसे बुरी तरह प्रभावित होते हैं क्योंकि उनके पास जोखिम से उबरने हेतु कोई संपत्ति, शिक्षा या बचत नहीं होती।

3. निर्धनता रेखा (Poverty Line): निर्धारण के कैलोरी एवं मौद्रिक मापदंड

निर्धनता के आकलन की सर्वमान्य विधि निर्धनता रेखा (Poverty Line) है। किसी व्यक्ति को निर्धन तब माना जाता है जब उसकी आय या उपभोग स्तर किसी ऐसी 'न्यूनतम सीमा' से नीचे गिर जाए जो मूल मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी है।

1. न्यूनतम कैलोरी उपभोग का पैमाना:

  • भारत में भोजन की आवश्यकता का निर्धारण कैलोरी (Calorie) की मात्रा पर आधारित है। भोजन में अनाज, दालें, दूध, सब्जियां, तेल आदि से ऊर्जा मिलती है।
  • ग्रामीण क्षेत्र: न्यूनतम 2,400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निर्धारित की गई है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अधिक शारीरिक श्रम (खेती, बोझा ढोना) करते हैं।
  • शहरी क्षेत्र: न्यूनतम 2,100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निर्धारित की गई है, क्योंकि शहरी जीवन में तुलनात्मक रूप से कम शारीरिक श्रम होता है।

2. मौद्रिक आय का पैमाना (2011-12 NSSO आंकड़े):

राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मासिक आय:
• ग्रामीण क्षेत्र: ₹816 प्रति व्यक्ति प्रति माह (5 सदस्यों के परिवार के लिए लगभग ₹4,080 प्रति माह)।
• शहरी क्षेत्र: ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति माह (5 सदस्यों के परिवार के लिए लगभग ₹5,000 प्रति माह)।
(नोट: आवश्यक वस्तुओं की कीमतें शहरों में अधिक होने के कारण शहरी क्षेत्रों की मौद्रिक सीमा ग्रामीण से अधिक रखी गई है, भले ही कैलोरी की आवश्यकता कम हो)।

3. अंतरराष्ट्रीय निर्धनता रेखा (World Bank):

विश्व बैंक विभिन्न विकासशील देशों में निर्धनता की तुलना के लिए एक समान मानक अपनाता है: $1.90 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (क्रय शक्ति समता - PPP के आधार पर; हाल के वर्षों में $2.15)।

4. असुरक्षित समूह, अंतर-राज्यीय असमानताएं एवं निर्धनता के कारण

भारत में निर्धनता का वितरण सभी सामाजिक समूहों और राज्यों में एक समान नहीं है:

1. सर्वाधिक असुरक्षित समूह (Vulnerable Groups):

  • सामाजिक समूह: अनुसूचित जनजाति (ST - 43% गरीब) तथा अनुसूचित जाति (SC - 29% गरीब) सर्वाधिक पीड़ित हैं।
  • आर्थिक समूह: ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन खेतिहर मजदूर (34%) तथा शहरों के अनियमित दिहाड़ी मजदूर (34%) सबसे असुरक्षित हैं।
  • परिवार के भीतर असमानता: निर्धन परिवारों में भी महिलाओं, वृद्धों और बच्चियों (मादा शिशुओं) को परिवार के संसाधनों तक समान पहुंच नहीं मिलती; वे 'निर्धनों में भी सबसे निर्धन' (Poorest of the Poor) होते हैं (जैसे शिवरामन का परिवार)।

2. अंतर-राज्यीय असमानताएं (Inter-State Disparities):

  • सर्वाधिक निर्धन राज्य: बिहार (33.7%), ओडिशा (32.6%), असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड हैं।
  • सफल राज्य और उनके विकास मॉडल:
    1. केरल: मानव संसाधन विकास (शिक्षा एवं स्वास्थ्य) पर भारी निवेश कर निर्धनता पर अंकुश लगाया।
    2. पंजाब एवं हरियाणा: उच्च कृषि संवृद्धि दर (हरित क्रांति) के माध्यम से गरीबी घटाई।
    3. पश्चिम बंगाल: भूमि सुधार उपायों (Land Reforms) को प्रभावी ढंग से लागू कर गरीबी को कम किया।
    4. आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज के रियायती और कुशल वितरण से भुखमरी मिटाई।

3. भारत में निर्धनता के ऐतिहासिक एवं संरचनात्मक कारण:

  1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन: ब्रिटिश नीतियों ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर वस्त्र उद्योगों को नष्ट कर दिया और देशी उद्योगों के विकास को रोक दिया, जिससे औद्योगीकरण की गति धीमी रही।
  2. जनसंख्या विस्फोट एवं धीमी आर्थिक वृद्धि: स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक आर्थिक संवृद्धि की दर कम रही और जनसंख्या तेजी से बढ़ी, जिससे प्रति व्यक्ति आय में नगण्य वृद्धि हुई।
  3. संसाधनों व भूमि का असमान वितरण: ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार कानूनों को सही ढंग से लागू नहीं किया गया; अधिकांश जमीन मुट्ठी भर बड़े जमींदारों के हाथ में केंद्रित रही।
  4. सामाजिक व धार्मिक दायित्व: भारत में अत्यधिक गरीब लोग भी सामाजिक दिखावे, शादियों और धार्मिक अनुष्ठानों में भारी खर्च करते हैं। इसके लिए वे साहूकारों से ऊंची ब्याज पर कर्ज लेते हैं और अंततः ऋणग्रस्तता (Indebtedness) के जाल में फंस जाते हैं।

5. निर्धनता उन्मूलन के सरकारी उपाय: मनरेगा 2005 एवं अन्य योजनाएं

भारत सरकार की वर्तमान निर्धनता-रोधी रणनीति दो प्रमुख घटकों पर आधारित है: (1) आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन तथा (2) लक्षित निर्धनता-रोधी कार्यक्रम।

1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA - 2005):

मनरेगा 2005 की प्रमुख विशेषताएं (Most Important):
• 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाती है।
• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण: योजना के तहत प्रस्तावित कुल नौकरियों में से एक-तिहाई (33%) रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित है।
• बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर आवेदक को काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो वह दैनिक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होता है।
• दीर्घकालिक परिसंपत्ति निर्माण: इसके तहत सूखा रोकथाम, वनरोपण और मिट्टी के कटाव को रोकने जैसे स्थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण होता है।

2. अन्य प्रमुख लक्षित निर्धनता-रोधी कार्यक्रम:

  • प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY - 1993): ग्रामीण और छोटे शहरों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्व-रोजगार हेतु लघु व्यवसाय और उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता।
  • ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (REGP - 1995): ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार के अवसर सृजित करना।
  • स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY - 1999): गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups - SHGs) में संगठित कर बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी द्वारा गरीबी रेखा से ऊपर उठाना।
  • प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY - 2000): राज्यों को प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आश्रय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण हेतु अतिरिक्त केंद्रीय वित्तीय सहायता।
  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY - 2000): निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों में से 'सर्वाधिक निर्धनों' (Poorest of the Poor) को चिह्नित कर ₹2 प्रति किग्रा गेहूं और ₹3 प्रति किग्रा चावल की दर से 35 किलोग्राम अनाज प्रति माह उपलब्ध कराना।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

कैलोरी मापदंड (निर्धनता रेखा)
ग्रामीण: 2,400 कैलोरी/दिन | शहरी: 2,100 कैलोरी/दिन
शारीरिक श्रम की अधिकता के कारण ग्रामीण आवश्यकता शहरी से अधिक रखी गई है।
मौद्रिक आय स्तर (2011-12 NSSO)
ग्रामीण: ₹816 प्रति माह | शहरी: ₹1,000 प्रति माह
5 सदस्यों के परिवार हेतु: ग्रामीण ₹4,080, शहरी ₹5,000 प्रति माह।
विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय रेखा
$1.90 प्रति व्यक्ति प्रति दिन (PPP)
विभिन्न विकासशील देशों के बीच निर्धनता की तुलना का वैश्विक मानक।
मनरेगा 2005 (MGNREGA)
100 दिन का रोजगार | 1/3 महिलाओं हेतु आरक्षित | 15 दिन में भत्ता
संसद द्वारा पारित विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।
सर्वाधिक असुरक्षित सामाजिक समूह
अनुसूचित जनजाति (ST - 43%) एवं अनुसूचित जाति (SC - 29%)
आर्थिक रूप से: ग्रामीण खेतिहर मजदूर (34%) व शहरी आकस्मिक मजदूर (34%)।
भारत में निर्धनता अनुपात
1993-94: 45% → 2004-05: 37.2% → 2011-12: 21.9%
प्रतिशत में गिरावट के बावजूद करोड़ों लोग अभी भी निर्धनता रेखा से नीचे हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (दीर्घ उत्तरीय): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा - 2005) की प्रमुख विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: मनरेगा (MGNREGA - 2005) भारत सरकार द्वारा ग्रामीण निर्धनता और बेरोजगारी उन्मूलन हेतु लागू की गई विश्व की सबसे बड़ी रोजगार योजना है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी: यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक इच्छुक वयस्क परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी देता है ताकि उनका आजीविका स्तर सुरक्षित रह सके।
  2. महिलाओं के लिए आरक्षण: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए योजना के कुल रोजगार में से एक-तिहाई (33 प्रतिशत) नौकरियां महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।
  3. बेरोजगारी भत्ते का अधिकार: यदि कोई व्यक्ति रोजगार हेतु आवेदन करता है और सरकार आवेदन के 15 दिनों के भीतर उसे काम देने में असमर्थ रहती है, तो आवेदक को दैनिक बेरोजगारी भत्ता पाने का कानूनी अधिकार होता है।
  4. स्थायी ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन: योजना के तहत जल संरक्षण, सूखा रोकथाम, वनीकरण, मिट्टी कटाव रोकने और ग्रामीण सड़कों के निर्माण से जुड़ी स्थायी परिसंपत्तियां बनाई जाती हैं जो भविष्य में कृषि को सशक्त बनाती हैं।
  5. समान मजदूरी और प्रत्यक्ष भुगतान: पुरुषों और महिलाओं को समान मजदूरी दी जाती है और बिचौलियों के भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए मजदूरी सीधे मजदूरों के बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी (DBT) द्वारा अंतरित की जाती है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है? ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम कैलोरी की आवश्यकता में अंतर क्यों है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

1. निर्धारण के मापदंड:

  • कैलोरी मापदंड: किसी व्यक्ति की न्यूनतम पोषण आवश्यकता के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 2,400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों में 2,100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
  • मौद्रिक मापदंड (2011-12): इस न्यूनतम कैलोरी, कपड़े, जूते, ईंधन और चिकित्सा व्यय को पूरा करने हेतु ग्रामीण क्षेत्र में ₹816 प्रति माह तथा शहरी क्षेत्र में ₹1,000 प्रति माह की न्यूनतम आय सीमा तय की गई है।

2. कैलोरी की मात्रा में अंतर का कारण:

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग शारीरिक श्रम (जैसे हल चलाना, फसल काटना, बोझा ढोना) अधिक करते हैं। इस अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा (कैलोरी) की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत शहरों में अधिकांश कार्य बैठकर या कम शारीरिक श्रम वाले होते हैं, अतः वहां 2,100 कैलोरी की आवश्यकता पर्याप्त मानी गई है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): 'सामाजिक अपवर्जन' (Social Exclusion) और 'असुरक्षितता' (Vulnerability) से आप क्या समझते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. सामाजिक अपवर्जन (Social Exclusion): इसका अर्थ है कि निर्धनों को बेहतर सामाजिक परिवेश, समान सुविधाओं और संपन्न लोगों के साथ रहने के अवसरों से वंचित रखा जाता है और उन्हें केवल अन्य निर्धनों के साथ एक दयनीय और पृथक वातावरण में रहना पड़ता है। यह निर्धनता का कारण भी बनता है और परिणाम भी (जैसे भारत में जातिगत भेदभाव)।
  2. असुरक्षितता (Vulnerability): यह किसी विशिष्ट समुदाय (जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवाएं या शारीरिक रूप से विकलांग लोग) के भविष्य में निर्धन बने रहने या किसी आपदा के समय और अधिक गरीब होने की आशंका (संभावना) का माप है। जब बाढ़, सूखा या आर्थिक मंदी आती है तो इन वर्गों के पास सुरक्षा का कोई साधन नहीं होता।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश ने अपने-अपने राज्यों में निर्धनता को कम करने के लिए कौन-से विशिष्ट उपाय अपनाए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: इन राज्यों ने निर्धनता उन्मूलन के लिए अलग-अलग सफल रणनीतियां अपनाईं:

  • केरल: इसने मानव संसाधन विकास पर सर्वाधिक ध्यान दिया; शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी सरकारी निवेश करके शत-प्रतिशत साक्षरता और बेहतर जीवन स्तर हासिल किया।
  • पंजाब एवं हरियाणा: इन्होंने हरित क्रांति को अपनाकर उच्च कृषि संवृद्धि दर हासिल की जिससे किसानों और मजदूरों की आय में भारी वृद्धि हुई।
  • पश्चिम बंगाल: इसने क्रांतिकारी भूमि सुधार उपायों (Land Reforms) को कड़ाई से लागू किया जिससे बटाईदारों और भूमिहीन किसानों को जमीन का मालिकाना हक मिला।
  • आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु: इन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से रियायती दरों पर अनाज का कुशल वितरण सुनिश्चित किया जिससे गरीबों में भुखमरी पर रोक लगी।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कैलोरी आवश्यकताओं में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ग्रामीण क्षेत्रों में शारीरिक श्रम अधिक होने के कारण न्यूनतम आवश्यकता 2,400 कैलोरी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2,100 कैलोरी है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि शहरों में कम कैलोरी की आवश्यकता है तो वहां निर्धनता रेखा का मौद्रिक स्तर भी कम होगा।

सही वैज्ञानिक तथ्य

शहरों में कैलोरी कम (2100) चाहिए, परंतु आवश्यक वस्तुओं, मकान किराए और सेवाओं की कीमतें अधिक होने से मौद्रिक स्तर ग्रामीण (₹816) से अधिक ₹1,000 प्रति माह है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मनरेगा को केवल एक सामान्य अस्थायी रोजगार योजना समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मनरेगा संसद द्वारा पारित एक 'कानूनी अधिकार' (Legal Right) है जिसके तहत 15 दिन में काम न मिलने पर सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

निर्धनता रेखा के मापदंड एवं मनरेगा 2005 का सुरक्षा तंत्र

निर्धनता: एक बहुआयामी चुनौती एवं उन्मूलन के सरकारी उपाय Poverty as a Challenge: Poverty Line Architecture & MGNREGA 2005 Safety Net ग्रामीण निर्धनता रेखा (Rural Poverty Line) 🌾 कैलोरी आवश्यकता: 2,400 कैलोरी / व्यक्ति / दिन (अत्यधिक शारीरिक श्रम के कारण शहरी से अधिक) 💰 न्यूनतम आय: ₹816 प्रति व्यक्ति प्रति माह (5 सदस्यों के परिवार हेतु: ₹4,080 प्रति माह) केस: लक्खा सिंह (मेरठ) - भूमिहीन खेतिहर मजदूर अनियमित काम, ₹50 दिहाड़ी, कच्ची झोपड़ी, टीबी बीमारी शहरी निर्धनता रेखा (Urban Poverty Line) 🏙 कैलोरी आवश्यकता: 2,100 कैलोरी / व्यक्ति / दिन (तुलनात्मक रूप से कम शारीरिक श्रम) 💰 न्यूनतम आय: ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति माह (5 सदस्यों के परिवार हेतु: ₹5,000 प्रति माह) केस: राम सरन (रांची) - आटा मिल दैनिक मजदूर ₹1500 आय, 6 सदस्य, 1 कमरे का किराया, अशिक्षित बच्चे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA - 2005) 100 दिन का रोजगार प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कानूनी गारंटी 1/3 महिला आरक्षण 33% कार्य अवसर महिलाओं हेतु आरक्षित (समान वेतन) बेरोजगारी भत्ता 15 दिन में काम न मिलने पर दैनिक नकद भत्ता ग्रामीण परिसंपत्तियां जल संचयन, वृक्षारोपण, मिट्टी कटाव नियंत्रण कार्य अन्य प्रमुख कार्यक्रम: PMRY (1993) • REGP (1995) • SGSY स्वयं सहायता समूह (1999) • अंत्योदय अन्न योजना (AAY - ₹2 गेहूं, ₹3 चावल) CBSE Class 9 Economics • निर्धनता: एक चुनौती • मानवीय गरिमा, समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की प्रतिज्ञा

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
भारत में हर चौथा व्यक्ति निर्धन है; महात्मा गांधी के अनुसार भारत वास्तविक रूप में तभी स्वतंत्र होगा जब उसका सबसे गरीब व्यक्ति मानवीय कष्टों से मुक्त होगा।
मुख्य बिंदु 2
राम सरन (रांची) का शहरी मामला तथा लक्खा सिंह (मेरठ) का ग्रामीण मामला निर्धनता के बहुआयामी स्वरूप (अशिक्षा, कुपोषण, लाचारी, बीमारी) को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु 3
सामाजिक वैज्ञानिक निर्धनता को आय के अलावा 'सामाजिक अपवर्जन' (सुविधाओं से बहिष्करण) और 'असुरक्षितता' (आपदाओं में अधिक जोखिम) के चश्मे से देखते हैं।
मुख्य बिंदु 4
निर्धनता रेखा के लिए न्यूनतम कैलोरी उपभोग ग्रामीण क्षेत्र में 2,400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्र में 2,100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तय की गई है।
मुख्य बिंदु 5
2011-12 के अनुसार न्यूनतम मासिक आय स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में ₹816 तथा शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रति माह निर्धारित किया गया।
मुख्य बिंदु 6
विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय निर्धनता रेखा $1.90 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (PPP) है।
मुख्य बिंदु 7
अनुसूचित जनजाति (ST - 43%) और अनुसूचित जाति (SC - 29%) सर्वाधिक असुरक्षित सामाजिक समूह हैं; आर्थिक रूप से खेतिहर मजदूर और आकस्मिक श्रमिक सबसे गरीब हैं।
मुख्य बिंदु 8
राज्यों में बिहार (33.7%), ओडिशा (32.6%) और झारखंड अत्यधिक निर्धन हैं; जबकि केरल ने मानव संसाधन विकास, पंजाब ने कृषि, और पश्चिम बंगाल ने भूमि सुधार से निर्धनता घटाई।
मुख्य बिंदु 9
ब्रिटिश औपनिवेशिक विनाश, धीमी आर्थिक वृद्धि, भूमि का असमान वितरण और सामाजिक ऋणग्रस्तता भारत में निर्धनता के मुख्य ऐतिहासिक कारण हैं।
मुख्य बिंदु 10
मनरेगा 2005 (MGNREGA) ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी, 1/3 महिला आरक्षण, तथा 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता प्रदान करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम कितनी कैलोरी उपभोग को निर्धनता रेखा का आधार माना गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक शारीरिक श्रम के कारण न्यूनतम 2,400 कैलोरी (शहरी क्षेत्रों में 2,100 कैलोरी) निर्धारित की गई है।
2
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा - 2005) के तहत एक वित्तीय वर्ष में कितने दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मनरेगा ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।
3
केरल ने निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में भारी निवेश करके अपने राज्य में निर्धनता को कम करने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
केरल ने शिक्षा और स्वास्थ्य (मानव संसाधन विकास) पर भारी निवेश कर निर्धनता अनुपात को न्यूनतम किया।
4
भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा सामाजिक समूह निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित (Vulnerable) पाया गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
अनुसूचित जनजाति (ST) के लगभग 43% लोग निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, जो सभी समूहों में सर्वाधिक है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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कक्षा 9 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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