अधिकारों का वास्तविक महत्व तब समझ में आता है जब हम उन देशों की स्थिति देखते हैं जहाँ नागरिकों को कोई बुनियादी अधिकार प्राप्त नहीं हैं:
| केस स्टडी (घटना / देश) | मानवाधिकारों व नागरिक अधिकारों का उल्लंघन | लोकतांत्रिक सबक / परिणाम |
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| 1. ग्यूंतनामो बे का जेलखाना (Guantanamo Bay) | अमेरिकी सेना ने 9/11 हमलों के शक में 600 लोगों को दुनिया भर से गुप्त रूप से पकड़ा और क्यूबा स्थित नौसैनिक अड्डे की जेल में बंद किया। न कोई वारंट, न मुकदमा, न वकील और न ही परिजनों से संपर्क। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' ने उजागर किया कि कैदियों को क्रूर अमानवीय यातनाएं दी गईं। | अधिकारों के अभाव में सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र भी दुनिया के किसी भी नागरिक के बुनियादी जीवन और स्वतंत्रता को मनमाने ढंग से कुचल सकता है। |
| 2. सऊदी अरब में नागरिकों की स्थिति | सऊदी अरब में एक वंशानुगत शाह का शासन है। जनता शासक को नहीं चुन सकती। राजनीतिक दल या संगठन बनाने की मनाही है। गैर-मुसलमानों को अपने धर्म का सार्वजनिक आचरण करने की स्वतंत्रता नहीं है। महिलाओं पर सार्वजनिक रूप से कड़े पुरुष संरक्षण और प्रतिबंध थोपे गए थे। | राजतंत्र और धार्मिक अधिनायकवाद में नागरिकों को केवल शासक की कृपा पर जीना पड़ता है, उनके पास कानूनी अधिकार नहीं होते। |
| 3. कोसोवो में जातीय नरसंहार (Ethnic Cleansing) | पूर्व यूगोस्लाविया के कोसोवो प्रांत में अल्बानियाई मुसलमान बहुसंख्यक थे, परंतु पूरे देश में सर्ब जाति का दबदबा था। सर्ब राष्ट्रवादी नेता स्लोबोदान मिलोशेविच ने चुनाव जीतकर सत्ता संभाली और अल्बानियाई लोगों को देश से खदेड़ने के लिए सेना भेज दी। घरों को जलाया गया, हजारों मासूमों को कत्ल किया गया। | यदि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का संवैधानिक प्रबंध न हो, तो चुनाव जीतकर आई सरकार भी बहुसंख्यकवादी हत्यारी बन सकती है। (मिलोशेविच पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चला)। |