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CBSE • कक्षा 9 • Social Science • अध्याय 18
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

संसाधन के रूप में लोग

जनसंख्या केवल भोजन, वस्त्र और आवास की मांग करने वाला कोई बोझ या दायित्व (Liability) नहीं है, बल्कि यदि इसमें शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में सुनियोजित निवेश किया जाए, तो यह देश की सबसे मूल्यवान उत्पादक परिसंपत्ति (Asset) और 'मानव पूंजी' (Human Capital) बन जाती है। प्रस्तुत अध्याय 'सकल' और 'विलास' के प्रसिद्ध तुलनात्मक जीवन-वृत्तांत के माध्यम से शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य द्वारा निर्मित 'सद्गुण चक्र' (Virtuous Cycle) और इसके अभाव में उत्पन्न 'दुष्चक्र' (Vicious Cycle) का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक संसाधनों से विपन्न होने के बावजूद केवल मानव संसाधन में भारी निवेश करके विश्व की महाशक्ति बने 'जापान' का प्रेरक उदाहरण दिया गया है। अध्याय में आर्थिक क्रियाओं के तीन प्रमुख क्षेत्रों—प्राथमिक (कृषि, वानिकी), द्वितीयक (विनिर्माण), और तृतीयक (सेवाएं: शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग)—तथा बाजार एवं गैर-बाजार क्रियाओं के अंतर का निरूपण किया गया है। जनसंख्या की गुणवत्ता तय करने वाले दो मूल घटकों (शिक्षा: सर्व शिक्षा अभियान, मध्याह्न भोजन योजना; तथा स्वास्थ्य: शिशु मृत्यु दर व जीवन प्रत्याशा) की विस्तृत समीक्षा है। अंत में भारत में बेरोजगारी के विभिन्न रूपों—ग्रामीण क्षेत्रों में 'मौसमी बेरोजगारी' (Seasonal Unemployment) व 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' (Disguised Unemployment) तथा शहरी क्षेत्रों में 'शिक्षित बेरोजगारी'—के कारणों और सामाजिक-आर्थिक दुष्परिणामों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत है। झारखंड अधिविद्य परिषद् (CBSE) बोर्ड परीक्षा में मानव पूंजी निर्माण, प्रच्छन्न बेरोजगारी, और आर्थिक क्षेत्रों के वर्गीकरण पर प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

सकल की सॉफ्टवेयर नौकरी बनाम विलास की मछली की टोकरी: शिक्षा और स्वास्थ्य का चमत्कार

एक ही गांव सेमापुर में दो सगे दोस्त रहते थे—सकल और विलास। सकल के माता-पिता ने मेहनत-मजदूरी करके उसे स्कूल भेजा, कंप्यूटर का व्यावसायिक डिप्लोमा कराया। सकल स्वस्थ था, उसे निजी फर्म में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिली, उसने नया सॉफ्टवेयर डिजाइन किया जिससे फर्म की बिक्री बढ़ी और उसे पदोन्नति मिली। उसका जीवन खुशहाल हो गया। दूसरी ओर विलास के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। उसकी मां मछलियां बेचकर दिन में बमुश्किल 150 रुपये कमाती थी। विलास गठिया (Arthritis) का मरीज था, परिवार के पास डॉक्टर को दिखाने के पैसे नहीं थे और न ही वह कभी स्कूल जा सका। मां की बीमारी के बाद विलास को भी मजबूरी में वही मछलियां बेचनी पड़ीं और वह अपने परिवार के साथ जीवन भर घोर निर्धनता में घिसटता रहा! यह कहानी केवल दो लड़कों की नहीं है; यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि शिक्षा और स्वास्थ्य में किया गया निवेश कैसे एक साधारण इंसान को सोने की खान (मानव पूंजी) में बदल सकता है, जबकि इसकी उपेक्षा इंसान को बेबस बोझ बना देती है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखंड देश के सबसे युवा राज्यों में से एक है जहाँ की 60% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह विशाल युवा आबादी केवल तभी झारखंड को खनिज-संपन्न होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से समृद्ध बना सकती है जब हमारे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और बेहतर स्वास्थ्य मिले। यह अध्याय छात्रों को यह सिखाता है कि वे स्वयं अपने जीवन में शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्व समझें और अपने आप को एक उत्पादक मानव संसाधन के रूप में विकसित करें। CBSE बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय अर्थशास्त्र का सर्वाधिक जीवनोपयोगी और अंकदायी पाठ है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • उत्पादन के चार कारकों (भूमि, श्रम, भौतिक पूंजी, मानव पूंजी) की समझ।
  • रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य का सामान्य सामाजिक महत्व।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न व्यवसायों (खेती, मजदूरी, नौकरी, दुकानदारी) का सामान्य ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • मानव पूंजी (Human Capital) और मानव पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को परिभाषित करना।
  • सकल और विलास के उदाहरण से शिक्षा एवं स्वास्थ्य के दीर्घकालिक व्यक्तिगत और सामाजिक लाभों को सिद्ध करना।
  • जापान के विकास मॉडल का विश्लेषण करते हुए प्राकृतिक संसाधनों बनाम मानव पूंजी के महत्व का मूल्यांकन करना।
  • आर्थिक क्रियाओं के तीन क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) का सोदाहरण वर्गीकरण करना।
  • बाजार क्रियाओं (Market Activities) और गैर-बाजार क्रियाओं (Non-Market Activities) में अंतर स्पष्ट करना।
  • ग्रामीण बेरोजगारी (मौसमी व प्रच्छन्न बेरोजगारी) तथा शहरी शिक्षित बेरोजगारी की अवधारणा और उसके सामाजिक दुष्प्रभावों की व्याख्या करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. संसाधन के रूप में लोग एवं मानव प...
2 2. पुरुषों और महिलाओं की आर्थिक क्र...
3 3. जनसंख्या की गुणवत्ता: शिक्षा और...
4 4. बेरोजगारी (Unemployment): प्रकार...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. संसाधन के रूप में लोग एवं मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation)

'संसाधन के रूप में लोग' (People as Resource) वर्तमान उत्पादन कौशल और क्षमताओं के संदर्भ में किसी देश के कामकाजी लोगों का वर्णन करने का एक आधुनिक तरीका है।

जनसंख्या: दायित्व नहीं, उत्पादक परिसंपत्ति:

  • प्रायः जनसंख्या को एक नकारात्मक रूप में देखा जाता है कि इतनी विशाल आबादी को भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे उपलब्ध कराई जाएं।
  • परंतु जब इस विद्यमान मानव संसाधन को और अधिक शिक्षा और स्वास्थ्य द्वारा विकसित किया जाता है, तब इसे 'मानव पूंजी निर्माण' (Human Capital Formation) कहते हैं।
  • ठीक वैसे ही जैसे भौतिक पूंजी (मशीनें, कारखाने) में निवेश करने से भविष्य में उत्पादन और आय बढ़ती है, वैसे ही मानव पूंजी (शिक्षा, प्रशिक्षण, चिकित्सा) में किया गया निवेश उच्च उत्पादकता और उच्च राष्ट्रीय आय के रूप में प्रतिफल (Return) देता है।

सकल और विलास की केस स्टडी: सद्गुण चक्र बनाम दुष्चक्र

तुलनात्मक बिंदु सकल (Sakal) विलास (Vilas)
शिक्षा एवं कौशल नियमित स्कूल गया, उच्चतर माध्यमिक परीक्षा पास की और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में व्यावसायिक कोर्स किया। पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी, कभी स्कूल नहीं गया; कोई तकनीकी कौशल नहीं सीख सका।
स्वास्थ्य की स्थिति शारीरिक रूप से स्वस्थ और हट्टा-कट्टा था; उसे बार-बार डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। बचपन से ही गठिया (Arthritis) का रोगी था; इलाज के लिए पैसे न होने से स्वास्थ्य निरंतर गिरता गया।
आर्थिक परिणाम निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना; उच्च वेतन और पदोन्नति पाई। (सद्गुण चक्र - Virtuous Cycle) मां की मृत्यु के बाद गांव के तालाब से मछलियां बेचकर बमुश्किल गुजारा किया; गरीबी का शिकार रहा। (दुष्चक्र - Vicious Cycle)
वैश्विक प्रेरणा: जापान का चमत्कार
जापान के पास खनिज, लोहा या तेल जैसे प्राकृतिक संसाधन लगभग शून्य हैं। वह अपने उद्योगों के लिए सारा कच्चा माल विदेशों से आयात करता है। फिर भी जापान आज विश्व का सबसे अमीर और विकसित देश कैसे बना? इसका एकमात्र रहस्य यह है कि जापान ने अपने लोगों पर, विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारी निवेश किया। कुशल और तकनीकी रूप से दक्ष जापानी नागरिकों ने आधुनिक तकनीकों का आविष्कार किया जिससे देश विश्व आर्थिक महाशक्ति बन गया।

2. पुरुषों और महिलाओं की आर्थिक क्रियाएं: तीन क्षेत्रक

विभिन्न आर्थिक क्रियाकलापों को तीन प्रमुख क्षेत्रकों (Sectors) में विभाजित किया गया है:

  1. प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector): प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष दोहन से जुड़ी क्रियाएं। इसमें कृषि, वानिकी (वानिकी), पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, खनन एवं उत्खनन शामिल हैं।
  2. द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector): प्राथमिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली द्वारा अन्य उपयोगी वस्तुओं में बदलना। इसमें उद्योग, कारखाने, चीनी बनाना, कपड़ा निर्माण, भवन निर्माण शामिल हैं।
  3. तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary / Service Sector): यह वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता बल्कि प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएं प्रदान करता है। इसमें व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन आदि शामिल हैं।

बाजार क्रियाएं बनाम गैर-बाजार क्रियाएं:

  • बाजार क्रियाएं (Market Activities): वे क्रियाएं जो वेतन, लाभ या पारिश्रमिक प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती हैं (जैसे सरकारी/निजी नौकरी, दुकान चलाना, फैक्टरी में काम)। इन्हें देश की राष्ट्रीय आय (National Income) में जोड़ा जाता है।
  • गैर-बाजार क्रियाएं (Non-Market Activities): वे क्रियाएं जो केवल स्व-उपभोग (Self-consumption) के लिए की जाती हैं। जैसे किसान द्वारा अपने परिवार के खाने के लिए अनाज उगाना, या किसी गृहिणी द्वारा घर में खाना बनाना, बच्चों का लालन-पालन करना और झाड़ू-पोंछा करना। गृहिणियों द्वारा किए गए इस विशाल घरेलू श्रम का कोई बाजार मूल्य या वेतन नहीं मिलता, अतः इसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता।

महिलाओं के रोजगार की स्थिति:

असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है, उन्हें मातृत्व अवकाश, बाल सुरक्षा जैसी कानूनी सुविधाएं नहीं मिलतीं। केवल उच्च शिक्षा और तकनीकी कौशल प्राप्त महिलाएं ही संगठित क्षेत्र में पुरुषों के बराबर वेतन और सम्मान पाती हैं।

3. जनसंख्या की गुणवत्ता: शिक्षा और स्वास्थ्य

किसी भी देश की जनसंख्या की गुणवत्ता मुख्यतः दो कारकों पर निर्भर करती है: साक्षरता दर (शिक्षा) तथा जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य)।

1. शिक्षा (Education) का महत्व एवं सरकारी पहलें:

  • शिक्षा व्यक्ति के लिए ज्ञान के नए क्षितिज खोलती है, नए कौशल विकसित करती है और जीवन के मानवीय मूल्यों को समृद्ध करती है।
  • साक्षरता दर में वृद्धि: 1951 में भारत की साक्षरता दर मात्र 18% थी जो 2011 की जनगणना में बढ़कर लगभग 74% हो गई (पुरुष: 82%, महिला: 65.4%)।
  • सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan): 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु समयबद्ध सरकारी पहल।
  • मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme): सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ड्रॉप-आउट रोकने और उनके पोषण स्तर में सुधार करने हेतु दोपहर का मुफ्त भोजन देने की क्रांतिकारी योजना।
  • नवोदय विद्यालय: प्रत्येक जिले में ग्रामीण प्रतिभासंपन्न बच्चों हेतु विशेष आवासीय विद्यालय।

2. स्वास्थ्य (Health) का महत्व एवं उपलब्धियां:

  • अस्वस्थ व्यक्ति न तो अपने परिवार का भला कर सकता है और न ही किसी कारखाने या संस्था का। स्वास्थ्य किसी व्यक्ति की कार्यक्षमता और बीमारियों से लड़ने की ताकत को बढ़ाता है।
  • जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy): भारत में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 1951 के 37 वर्ष से बढ़कर 69.4 वर्ष (2016-20) से अधिक हो चुकी है।
  • शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR): एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 1951 के 147 प्रति हजार से घटकर 36 प्रति हजार (2020) पर आ गई है। यह बेहतर चिकित्सा और टीकाकरण का प्रमाण है।

4. बेरोजगारी (Unemployment): प्रकार एवं सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव

बेरोजगारी (Unemployment) उस स्थिति को कहते हैं जब प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के इच्छुक और समर्थ व्यक्ति को कोई रोजगार नहीं मिल पाता। (भारत में 15 से 59 वर्ष की आयु वर्ग को कार्यशील जनसंख्या माना जाता है)।

भारत में बेरोजगारी के प्रमुख रूप:

बेरोजगारी का प्रकार क्षेत्र (ग्रामीण / शहरी) विस्तृत अवधारणा एवं उदाहरण
1. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment) ग्रामीण क्षेत्र (कृषि) यह तब होती है जब वर्ष के कुछ महीनों में लोगों को काम नहीं मिलता। कृषि में बुआई, कटाई, निराई और गहाई के समय व्यस्तता रहती है; बाकी 5-6 महीने खेतिहर मजदूर खाली बैठते हैं।
2. प्रच्छन्न / छिपी हुई बेरोजगारी (Disguised Unemployment) ग्रामीण क्षेत्र (पारिवारिक खेत) जहाँ किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं। उदाहरण: 1 हेक्टेयर खेत में केवल 5 लोगों की जरूरत है, परंतु किसान परिवार के 8 सदस्य उसी खेत में काम कर रहे हैं। यदि इन 3 अतिरिक्त सदस्यों को हटा भी दिया जाए, तो भी कुल फसल उत्पादन पर रत्ती भर प्रभाव नहीं पड़ेगा। इन 3 लोगों की सीमांत उत्पादकता शून्य है; वे प्रत्यक्षतः काम करते दिखते हैं पर वास्तव में बेरोजगार हैं।
3. शिक्षित बेरोजगारी (Educated Unemployment) शहरी क्षेत्र मैट्रिक, स्नातक (Graduation) और स्नातकोत्तर (PG) डिग्रीधारी युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार न मिलना। एक अजीब विरोधाभास है कि एक ओर तकनीकी जनशक्ति की कमी है तो दूसरी ओर लाखों डिग्रीधारी युवा बेरोजगार भटक रहे हैं।

बेरोजगारी के घातक सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव:

  • जनशक्ति का अपव्यय: जो युवा देश की संपत्ति बन सकते थे, वे दायित्व बन जाते हैं।
  • आर्थिक बोझ (Economic Overload): कामकाजी जनसंख्या पर आश्रितों का अनुपात अत्यधिक बढ़ जाता है।
  • सामाजिक तनाव एवं अवसाद: युवाओं में निराशा, हीनभावना, हताशा और अपराध की भावना पनपती है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

मानव पूंजी निर्माण
मानव संसाधन + शिक्षा + तकनीकी कौशल + स्वास्थ्य सेवा
जनसंख्या को भौतिक पूंजी की भांति उच्च उत्पादक परिसंपत्ति में बदलने की प्रक्रिया।
आर्थिक क्रियाओं के 3 क्षेत्रक
प्राथमिक (कृषि/खनन) + द्वितीयक (उद्योग/विनिर्माण) + तृतीयक (सेवाएं)
जीडीपी और राष्ट्रीय आय के सृजन का बुनियादी ढांचा।
कार्यशील आयु वर्ग (Working Age)
15 वर्ष से 59 वर्ष
इस आयु वर्ग के बेरोजगार लोगों को ही बेरोजगारी के आंकड़ों में गिना जाता है।
प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised)
अतिरिक्त श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता = 0
खेत से लोगों को हटा लेने पर भी कुल उत्पादन में कोई कमी नहीं आती।
शिशु मृत्यु दर (IMR)
1 वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु प्रति 1,000 जीवित जन्म
1951 के 147 से घटकर 2020 में 36 प्रति हजार हुई।
जापान मॉडल
शून्य प्राकृतिक संसाधन + 100% मानव पूंजी निवेश = आर्थिक महाशक्ति
विकास में मानव पूंजी की सर्वोच्चता का अकाट्य वैश्विक प्रमाण।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (दीर्घ उत्तरीय): 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' (Disguised Unemployment) और 'मौसमी बेरोजगारी' (Seasonal Unemployment) में क्या अंतर है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी के दो मुख्य रूप पाए जाते हैं:

प्रच्छन्न बेरोजगारी (छिपी हुई बेरोजगारी) मौसमी बेरोजगारी
• अर्थ: यह वह स्थिति है जिसमें लोग काम में लगे हुए दिखाई तो देते हैं, परंतु वास्तव में उनकी आवश्यकता नहीं होती। उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।
• उदाहरण: एक छोटे खेत पर काम करने के लिए केवल 4 लोगों की जरूरत है, परंतु परिवार के 7 सदस्य उसी खेत में काम कर रहे हैं। यदि 3 सदस्यों को वहां से हटाकर किसी फैक्टरी में लगा दिया जाए, तो भी खेत के उत्पादन में कोई गिरावट नहीं आएगी। वे 3 लोग प्रच्छन्न रूप से बेरोजगार हैं।
• अर्थ: यह तब होती है जब कृषि की मौसमी प्रकृति के कारण वर्ष के कुछ विशिष्ट महीनों में लोगों को कोई काम नहीं मिलता और वे खाली बैठते हैं।
• उदाहरण: भारत में खेती की बुआई (जुलाई-अगस्त) और कटाई (अक्टूबर या मार्च-अप्रैल) के समय मजदूरों को खूब काम मिलता है, परंतु फसलों के पकने के दौरान साल के 4 से 5 महीने खेतिहर मजदूरों के पास कोई रोजगार नहीं होता।

निवारण: ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी, कुटीर उद्योग और ग्रामीण सड़कों के निर्माण से इन दोनों समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

उदाहरण 2
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय): मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) में शिक्षा और स्वास्थ्य की क्या भूमिका है? सकल और विलास के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: शिक्षा और स्वास्थ्य मानव संसाधन को उत्पादक परिसंपत्ति में बदलने वाले दो मुख्य औजार हैं:

  1. शिक्षा की भूमिका: शिक्षा नए ज्ञान, तकनीकी कौशल और समझ का विकास करती है। जैसा कि सकल के मामले में देखा गया, उसने कंप्यूटर की शिक्षा प्राप्त की जिससे उसे अच्छी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिली और उसका वेतन व जीवन स्तर ऊंचा हुआ।
  2. स्वास्थ्य की भूमिका: एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी पूर्ण शारीरिक और मानसिक क्षमता से काम कर सकता है। इसके विपरीत विलास बचपन से गठिया का रोगी था और बीमार रहने के कारण वह स्कूल नहीं जा सका; फलस्वरूप उसे जीवन भर अपनी मां की तरह मामूली मजदूरी पर मछलियां बेचनी पड़ीं।

अतः शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश व्यक्तिगत समृद्धि के साथ-साथ देश की राष्ट्रीय आय में भारी योगदान देता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3 (लघु उत्तरीय): आर्थिक क्रियाकलापों के तीन प्रमुख क्षेत्रकों (प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक) में क्या अंतर है? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्रक निम्नलिखित हैं:

  1. प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector): इसमें वे सभी क्रियाएं आती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर निर्भर हैं।
    उदाहरण: कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन, खनन।
  2. द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector): इसमें प्राथमिक उत्पादों को मशीनों द्वारा विनिर्मित कर नई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं।
    उदाहरण: कपास से कपड़ा बनाना, गन्ने से चीनी बनाना, कार व लोहे का निर्माण।
  3. तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary Sector): यह वस्तुओं का निर्माण नहीं करता, बल्कि प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों को उत्पादक सेवाएं प्रदान करता है।
    उदाहरण: बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा, अस्पताल, पर्यटन।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (लघु उत्तरीय): 'जापान के पास प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, फिर भी वह एक विकसित और धनी देश है।' इस कथन की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  • जापान के पास खनिज, पेट्रोलियम और कृषि भूमि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की भारी कमी है; वह अपनी सभी आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है।
  • इसके बावजूद जापान ने अपने मानव संसाधनों (नागरिकों) पर, विशेष रूप से उच्च शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश किया।
  • कुशल और स्वस्थ जापानी नागरिकों ने अपने ज्ञान और उद्यम से अत्याधुनिक तकनीक (ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स) विकसित की और उच्च मूल्य की वस्तुओं का निर्यात कर भारी विदेशी मुद्रा अर्जित की।
  • यह सिद्ध करता है कि मानव पूंजी भौतिक व प्राकृतिक पूंजी से कहीं अधिक शक्तिशाली और निर्णायक होती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जनसंख्या को केवल एक नकारात्मक बोझ या दायित्व (Liability) समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जनसंख्या दायित्व नहीं, बल्कि सबसे मूल्यवान 'परिसंपत्ति' (Asset) है, बशर्ते उसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल का निवेश किया जाए।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रच्छन्न बेरोजगारी को सामान्य खुले तौर पर बेरोजगार व्यक्ति समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रच्छन्न बेरोजगारी में व्यक्ति बेरोजगार दिखता नहीं है, वह खेत पर काम करता दिखाई देता है; परंतु यदि उसे हटा भी दिया जाए तो उत्पादन में कोई कमी नहीं आती क्योंकि उसकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

घरेलू महिलाओं के काम को बाजार क्रिया (Market Activity) समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

महिलाओं द्वारा घर में किया गया भोजन पकाना, सफाई और बच्चों का लालन-पालन 'गैर-बाजार क्रिया' (Non-Market Activity) है क्योंकि इसके लिए कोई वेतन नहीं मिलता और यह राष्ट्रीय आय में नहीं जुड़ता।

मानव पूंजी निर्माण चक्र एवं आर्थिक क्षेत्रक संरचना

संसाधन के रूप में लोग: मानव पूंजी निर्माण एवं आर्थिक क्षेत्रक People as Resource: Education, Health, Virtuous vs Vicious Cycle & Economic Sectors सकल का मार्ग: सद्गुण चक्र (Virtuous Cycle) ✓ निवेश: उच्च शिक्षा + कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डिप्लोमा। ✓ स्वास्थ्य: शारीरिक रूप से स्वस्थ, उच्च रोग-प्रतिरोधक क्षमता। ✓ कौशल: नवीन सॉफ्टवेयर का निर्माण, कंपनी की बिक्री बढ़ी। ✓ परिणाम: उच्च वेतन, पदोन्नति, परिवार का जीवन स्तर सुधरा। निष्कर्ष: मानव पूंजी देश की उत्पादक परिसंपत्ति (Asset) है विलास का मार्ग: दुष्चक्र (Vicious Cycle) ✗ उपेक्षा: कभी स्कूल नहीं गया, कोई तकनीकी कौशल नहीं। ✗ स्वास्थ्य: गठिया का मरीज, इलाज हेतु धन का अभाव। ✗ कार्य: मां की मृत्यु बाद मछली बेचकर ₹150 दिहाड़ी। ✗ परिणाम: आजीवन घोर गरीबी, कुपोषण व लाचारी। निष्कर्ष: शिक्षा/स्वास्थ्य विहीन आबादी दायित्व (Liability) बनती है अर्थव्यवस्था के 3 प्रमुख क्षेत्रक (Sectors) 1. प्राथमिक क्षेत्रक: कृषि, वानिकी, मत्स्य, पशुपालन, खनन 2. द्वितीयक क्षेत्रक: विनिर्माण, उद्योग, चीनी/कपड़ा निर्माण 3. तृतीयक क्षेत्रक: व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य बाजार क्रियाएं राष्ट्रीय आय में जुड़ती हैं, घरेलू कार्य नहीं भारत में बेरोजगारी के 3 प्रमुख रूप (15-59 वर्ष) 🌾 मौसमी बेरोजगारी: बुआई/कटाई बाद 5-6 महीने काम नहीं। 👥 प्रच्छन्न बेरोजगारी: खेत में 5 की जगह 8 लोग (उत्पादकता 0)। 🎓 शिक्षित बेरोजगारी: मैट्रिक/स्नातक युवाओं को काम न मिलना। प्रभाव: जनशक्ति की बर्बादी एवं आर्थिक बोझ में वृद्धि CBSE Class 9 Economics • संसाधन के रूप में लोग: शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल द्वारा विकसित भारत का निर्माण

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
'संसाधन के रूप में लोग' कामकाजी नागरिकों के उत्पादन कौशल और क्षमताओं को व्यक्त करता है।
मुख्य बिंदु 2
जब जनसंख्या में शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा निवेश किया जाता है तो इसे 'मानव पूंजी निर्माण' (Human Capital Formation) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 3
सकल का उदाहरण 'सद्गुण चक्र' (शिक्षा + स्वास्थ्य = उच्च आय) दर्शाता है, जबकि विलास का उदाहरण 'दुष्चक्र' (अशिक्षा + बीमारी = आजीवन दरिद्रता) दर्शाता है।
मुख्य बिंदु 4
जापान ने प्राकृतिक संसाधनों की भारी कमी के बावजूद अपने नागरिकों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी निवेश करके विश्व की शीर्ष आर्थिक महाशक्ति बनने का गौरव प्राप्त किया।
मुख्य बिंदु 5
आर्थिक क्रियाओं के तीन क्षेत्रक हैं: प्राथमिक (कृषि/खनन), द्वितीयक (विनिर्माण/उद्योग), और तृतीयक (सेवाएं: बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य)।
मुख्य बिंदु 6
बाजार क्रियाएं लाभ या वेतन के उद्देश्य से की जाती हैं और राष्ट्रीय आय में जुड़ती हैं; गैर-बाजार क्रियाएं (घरेलू कार्य) राष्ट्रीय आय में नहीं जुड़तीं।
मुख्य बिंदु 7
जनसंख्या की गुणवत्ता शिक्षा (साक्षरता 18% से बढ़कर 74%) और स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा 37 से बढ़कर 69.4 वर्ष, शिशु मृत्यु दर 147 से घटकर 36) से सुधरती है।
मुख्य बिंदु 8
सर्व शिक्षा अभियान (6-14 वर्ष) और मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal) ने प्राथमिक शिक्षा में उपस्थिति और पोषण स्तर को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है।
मुख्य बिंदु 9
प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने के इच्छुक 15 से 59 वर्ष के समर्थ व्यक्तियों को रोजगार न मिलना 'बेरोजगारी' कहलाता है।
मुख्य बिंदु 10
ग्रामीण भारत में मौसमी व प्रच्छन्न बेरोजगारी (अतिरिक्त श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य) तथा शहरी भारत में शिक्षित बेरोजगारी सबसे गंभीर आर्थिक चुनौतियां हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
निम्नलिखित में से कौन-सा आर्थिक क्रियाकलाप 'तृतीयक क्षेत्रक' (Tertiary / Service Sector) के अंतर्गत आता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य तृतीयक (सेवा) क्षेत्रक के अंतर्गत आते हैं।
2
यदि किसी खेत में 5 लोगों की आवश्यकता है परंतु परिवार के 8 लोग काम कर रहे हैं और 3 को हटाने पर भी उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता, तो इसे क्या कहेंगे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
प्रच्छन्न बेरोजगारी में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं और अतिरिक्त लोगों की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।
3
प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बावजूद केवल मानव संसाधन (शिक्षा व स्वास्थ्य) में भारी निवेश करके समृद्ध बनने वाला देश कौन-सा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
जापान ने अपने लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी निवेश कर विश्व की शीर्ष आर्थिक महाशक्ति बनने की मिसाल कायम की।
4
प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उनके पोषण स्तर में सुधार हेतु कौन-सी क्रांतिकारी सरकारी योजना शुरू की गई?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
मध्याह्न भोजन योजना प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक दोपहर का भोजन उपलब्ध कराती है।
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कक्षा 9 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: फ्रांसीसी क्रांति अध्याय 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति अध्याय 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय अध्याय 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद अध्याय 5: आधुनिक विश्व में चरवाहे अध्याय 6: भारत - आकार और स्थिति अध्याय 7: भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय 8: अपवाह अध्याय 9: जलवायु अध्याय 10: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी अध्याय 11: जनसंख्या अध्याय 12: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? अध्याय 13: संविधान निर्माण अध्याय 14: चुनावी राजनीति अध्याय 15: संस्थाओं का कामकाज अध्याय 16: लोकतांत्रिक अधिकार अध्याय 17: पालमपुर गाँव की कहानी अध्याय 18: संसाधन के रूप में लोग अध्याय 19: निर्धनता: एक चुनौती अध्याय 20: भारत में खाद्य सुरक्षा

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