आधुनिक प्रतिनिधिक लोकतंत्र में सभी नागरिक शासन के दैनिक कार्यों में प्रत्यक्ष भाग नहीं ले सकते। अतः चुनाव (Elections) वह नियमित व्यवस्था है जिसके द्वारा लोग एक निश्चित समयांतराल पर अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और यदि चाहें तो उन्हें बदल भी सकते हैं।
चुनाव में मतदाता क्या-क्या निर्णय लेते हैं:
- वे यह चुन सकते हैं कि उनके लिए कानून कौन बनाएगा।
- वे यह तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा और बड़े नीतिगत फैसले कौन लेगा।
- वे यह तय कर सकते हैं कि किस पार्टी की नीतियां सरकार और कानून निर्माण का मार्गदर्शन करेंगी।
एक चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने वाली न्यूनतम शर्तें (5 कसौटियां):
- हर किसी को मताधिकार: प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक वोट देने का अधिकार हो और प्रत्येक वोट का समान मूल्य हो (Universal Adult Franchise)।
- चुनाव में वास्तविक विकल्प: मतदाताओं के सामने चुनने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवार होने चाहिए जो चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हों।
- नियमित अंतराल पर चुनाव: चुनाव कुछ वर्षों के नियमित अंतराल पर अवश्य होने चाहिए (भारत में सामान्यतः 5 वर्ष)।
- जनपसंद का उम्मीदवार ही जीते: जिसे जनता वास्तव में सबसे अधिक पसंद करे, उसी का चुनाव होना चाहिए।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में संपन्न होने चाहिए जहाँ लोग बिना किसी भय या प्रलोभन के अपनी मर्जी से वोट डाल सकें।