भारतीय सिनेमा के इतिहास में 14 मार्च 1931 की तिथि स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है:
- पहली सवाक् फिल्म: मुंबई के मैजेस्टिक सिनेमा में भारत की पहली बोलती फिल्म "आलम आरा" रिलीज हुई। इससे पहले 1913 से मूक फिल्मों (Silent Films) का दौर चल रहा था।
- पोस्टर का क्रांतिकारी नारा: "वे सभी 78 जीवित हैं, सांस ले रहे हैं, शत-प्रतिशत बोल रहे हैं, 78 मुर्दा इंसान जिंदा हो गए, उनको बोलते, बातें करते देखो!" यह पंक्ति मूक से सवाक के चमत्कारी परिवर्तन का प्रतीक थी।
- जनता का उन्माद: फिल्म आठ सप्ताह तक हाउसफुल चली। भीड़ इतनी अधिक होती थी कि पुलिस के लिए नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता था; टिकट ब्लैक में बिक रहे थे।