बदलू जाति से मनिहार था और उसका पुश्तैनी पेशा चूड़ियाँ बनाना था:
- चूड़ी निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया: बदलू अपने आँगन में नीम के पेड़ के नीचे एक मचिए (खाट) पर बैठकर सामने जलती भट्टी में लाख को पिघलाता था। फिर उसे लकड़ी की गोल मुँगेरियों पर चढ़ाकर गोल और चिकना बनाता और उस पर सुंदर रंग चढ़ाता था।
- वस्तु-विनिमय प्रथा (Barter System): बदलू अपनी चूड़ियों को पैसे में नहीं बेचता था। वह अनाज, कपड़े और गुड़ के बदले चूड़ियाँ देता था। गाँव की औरतें अपने सुहाग के लिए बदलू की ही बनाई चूड़ियाँ पहनती थीं।
- स्वाभिमानी स्वभाव: बदलू स्वभाव से बहुत सीधा और शांत था, परंतु विवाह-शादी के शुभ अवसरों पर वह अपनी सारी कसर निकाल लेता था। उस समय वह मुँहमाँगे कपड़े, अनाज और पगड़ी लिए बिना चूड़ियों का जोड़ा नहीं देता था।