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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Hindi (भाषा मंजरी-8) • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

Lakh Ki Chudiyaan

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 हिंदी का दूसरा पाठ "लाख की चूड़ियाँ" (Lakh Ki Chudiyaan) सुप्रसिद्ध कथाकार कामतानाथ द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील, यथार्थवादी व मर्मस्पर्शी कहानी है। यह कहानी आधुनिक औद्योगीकरण और मशीनी युग (Machine Age) के अंधाधुंध प्रसार के कारण पारंपरिक ग्रामीण हस्तशिल्प और कुशल कारीगरों के उजड़ते रोजगार, भुखमरी और मानसिक व्यथा का सजीव दस्तावेज है। कहानी का मुख्य पात्र बदलू एक मनिहार (चूड़ी बनाने वाला) है, जो अपने पैतृक व्यवसाय के तहत लाख की सुंदर, रंग-बिरंगी और गोल-मटोल चूड़ियाँ बनाता था। वह वस्तु-विनिमय (Barter System) पद्धति से चूड़ियों के बदले अनाज और कपड़े लेता था और कभी पैसों के लिए सौदेबाजी नहीं करता था। लेखक बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में अपने मामा के गाँव जाता था और बदलू काका के पास बैठकर लाख की रंगीन गोलियाँ बनवाता और मलाई व आम खाता था। परंतु समय बीतने के साथ जब काँच की मशीनी चूड़ियों का चलन बढ़ा, तो बदलू का पुश्तैनी काम पूरी तरह ठप हो गया। गरीबी और बीमारी में घिरने के बावजूद बदलू ने अपने स्वाभिमान और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। लेखक का यह कथन कि "मशीनों ने न जाने कितने हाथ काट दिए हैं" इस कहानी की आत्मा है।

⚡ जब चमचमाती मशीनों ने केवल चंद घंटों में लाखों काँच की चूड़ियाँ बना दीं, तो सदियों से लाख की चूड़ियाँ गढ़ने वाले बदलू काका के हुनर और स्वाभिमान का क्या हुआ?

क्या आपने कभी किसी कुम्हार को चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते या किसी बुनकर को हथकरघे पर साड़ी बुनते देखा है? जब हम बाजार से प्लास्टिक और मशीनों का सस्ता सामान खरीदते हैं, तो क्या हम कभी सोचते हैं कि हमारे उस एक फैसले से किसी गरीब कारीगर के चूल्हे की आग बुझ जाती है? बदलू काका कोई साधारण चूड़ी बेचने वाले नहीं थे; वे एक स्वाभिमानी कलाकार थे। जब गाँव की जमींदार की बेटी की शादी में उन्हें कम पैसे दिए गए, तो उन्होंने साफ कह दिया—"जाओ, शहर से ले आओ, यह जोड़ा दस आने में नहीं मिलेगा!" मशीनों के इस युग में अपनी कला और आत्मसम्मान को बचाए रखने वाले बदलू काका की यह कहानी आपकी आँखों में आँसू ला देगी!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह पाठ हमें स्वदेशी हस्तशिल्प के महत्व, श्रम की गरिमा और मशीनीकरण के मानवीय दुष्प्रभावों के प्रति संवेदनशील बनाता है। झारखण्ड के पारंपरिक सोहराई-कोहबर चित्रकारों, डोकरा धातु शिल्पियों और बुनकरों के संरक्षण में इस कहानी का सामाजिक संदेश अत्यंत प्रासंगिक है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ग्रामीण समाज, कुटीर उद्योग और पारंपरिक हस्तशिल्प का बुनियादी ज्ञान।
  • वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) और मुद्रा प्रणाली में अंतर।
  • मशीनीकरण (Mechanisation) का सामान्य परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • कहानी के मुख्य पात्र बदलू मनिहार के चरित्र की विशेषताओं (स्वाभिमान, सरलता, कला-प्रेम) का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • वस्तु-विनिमय प्रणाली और आधुनिक मुद्रा-विनिमय के अंतर को उदाहरण सहित समझा सकेंगे।
  • "मशीनों ने हाथ काट दिए हैं" मुहावरेदार कथन के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ की समीक्षा कर सकेंगे।
  • काँच की चूड़ियों बनाम लाख की चूड़ियों के प्रतीक के माध्यम से औद्योगीकरण के दुष्प्रभावों को रेखांकित कर सकेंगे।
  • हस्तशिल्पियों और ग्रामीण कारीगरों के संरक्षण हेतु संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. बदलू काका और लाख की चूड़ियों का...
2 2. लेखक और बदलू का आत्मीय संबंध (Th...
3 3. मशीनी युग का प्रवेश और उजड़ता हस...
4 4. बदलू का अटूट स्वाभिमान: कहानी का...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. बदलू काका और लाख की चूड़ियों का व्यवसाय (Badlu the Artisan)

बदलू जाति से मनिहार था और उसका पुश्तैनी पेशा चूड़ियाँ बनाना था:

  • चूड़ी निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया: बदलू अपने आँगन में नीम के पेड़ के नीचे एक मचिए (खाट) पर बैठकर सामने जलती भट्टी में लाख को पिघलाता था। फिर उसे लकड़ी की गोल मुँगेरियों पर चढ़ाकर गोल और चिकना बनाता और उस पर सुंदर रंग चढ़ाता था।
  • वस्तु-विनिमय प्रथा (Barter System): बदलू अपनी चूड़ियों को पैसे में नहीं बेचता था। वह अनाज, कपड़े और गुड़ के बदले चूड़ियाँ देता था। गाँव की औरतें अपने सुहाग के लिए बदलू की ही बनाई चूड़ियाँ पहनती थीं।
  • स्वाभिमानी स्वभाव: बदलू स्वभाव से बहुत सीधा और शांत था, परंतु विवाह-शादी के शुभ अवसरों पर वह अपनी सारी कसर निकाल लेता था। उस समय वह मुँहमाँगे कपड़े, अनाज और पगड़ी लिए बिना चूड़ियों का जोड़ा नहीं देता था।

2. लेखक और बदलू का आत्मीय संबंध (The Warm Bond)

लेखक अपने मामा के गाँव जाने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक बदलू के कारण ही रहता था:

  • मामा का गाँव फिर भी "बदलू काका": कायदे से मामा के गाँव का होने के कारण लेखक को बदलू को "मामा" कहना चाहिए था, परंतु गाँव के अन्य बच्चों को देखकर लेखक भी उसे "बदलू काका" कहता था।
  • लाख की रंगीन गोलियाँ: बदलू बचे हुए लाख से लेखक के लिए सुंदर, रंग-बिरंगी गोलियाँ बना देता था, जिन्हें देखकर कोई भी बच्चा मोहित हो जाता।
  • अतिथि सत्कार: जब भी लेखक बदलू के पास जाता, बदलू उसे तुरंत मचिया बैठने को देता, गाय का दूध दुहकर ताजी मलाई खिलाता और पेड़ से तोड़कर स्वादिष्ट सिंदूरी आम खिलाता था।

3. मशीनी युग का प्रवेश और उजड़ता हस्तशिल्प (The Tragic Impact of Machinery)

कई वर्षों बाद जब लेखक बड़ा होकर पुनः गाँव गया, तो गाँव का नक्शा बदल चुका था:

तुलना के बिंदुपारंपरिक लाख की चूड़ियाँ (बदलू)मशीनी काँच की चूड़ियाँ (शहर)
निर्माण पद्धतिहाथों की कठिन मेहनत, समय और अद्वितीय कारीगरी।कारखानों में मशीनों द्वारा मिनटों में हजारों का उत्पादन।
लागत व आकर्षणमहंगी परंतु टिकाऊ और पवित्र; चोट लगने पर चुभती नहीं।सस्ती, अधिक चमकीली परंतु नाजुक; टूटने पर कलाई जख्मी कर देती हैं।
आर्थिक परिणामकारीगर का घर चलता था, परिवार का भरण-पोषण होता था।पूंजीपतियों का मुनाफा; लाखों कारीगर बेरोजगार और भुखमरी के शिकार।

"मशीनों ने हाथ काट दिए हैं": इस व्यंग्य का अर्थ है कि मशीनों ने कारीगरों के हाथों से उनका हुनर और रोजगार छीन लिया है, जिससे वे लाचार और शक्तिहीन होकर भुखमरी के कगार पर पहुँच गए हैं।

4. बदलू का अटूट स्वाभिमान: कहानी का चरमोत्कर्ष (Unbroken Dignity)

कहानी का अंतिम दृश्य बदलू के अपराजेय व्यक्तित्व को उजागर करता है:

  • अंतिम जोड़ा: जमींदार साहब की बेटी की शादी के लिए बदलू ने अपना अंतिम लाख की चूड़ियों का जोड़ा बनाया था। जमींदार ने उस जोड़े के बदले केवल दस आने दिए।
  • स्वाभिमानी इनकार: बदलू ने वह जोड़ा नहीं दिया और कहा कि यह सुहाग का जोड़ा है, दस आने में शहर से काँच की चूड़ियाँ मँगवा लो। उसने अपनी गरीबी के आगे अपनी कला का सौदा नहीं किया।
  • लेखक का निष्कर्ष: लेखक ने देखा कि बदलू की बेटी रज्जो की कलाई पर वही अंतिम जोड़ा बेहद सुंदर लग रहा था। लेखक ने सोचा कि बदलू काका का व्यवसाय जरूर हार गया, पर उनका व्यक्तित्व काँच की चूड़ियों जैसा कमजोर नहीं था जो आसानी से टूट जाए!

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

लेखक परिचय
कामतानाथ (1934-2012) | जन्म: लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
मध्यमवर्गीय और ग्रामीण जीवन के यथार्थ को उकेरने वाले प्रसिद्ध कथाकार व नाटककार।
कहानी की मुख्य विधा
यथार्थवादी आंचलिक कहानी (Realistic Rural Fiction)
मशीनीकरण और हस्तशिल्प के द्वंद्व का सजीव चित्रण।
केंद्रीय मुहावरा / उक्ति
"मशीनी युग ने हाथ काट दिए हैं"
मशीनों द्वारा कारीगरों के रोजगार और आजीविका छीनने का प्रतीक।
विनिमय प्रणाली
वस्तु-विनिमय (Barter System: वस्तु के बदले वस्तु) → मुद्रा विनिमय (Money)
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलू अनाज के बदले चूड़ियाँ देता था।
मुख्य पात्र
बदलू (मनिहार / कारीगर) + लेखक (जनार्दन) + रज्जो (बदलू की बेटी)
बदलू स्वाभिमान, कला और ग्रामीण परंपरा का शाश्वत प्रतीक है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव चाव से क्यों जाता था और वह बदलू को "बदलू मामा" न कहकर "बदलू काका" क्यों कहता था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. चाव से जाने का कारण: लेखक को बदलू मनिहार से बहुत गहरा लगाव था। बदलू लेखक को बहुत प्यार करता था और उसे लाख की सुंदर-सुंदर रंग-बिरंगी गोलियाँ बनाकर देता था। इसके अलावा वह लेखक को गाय के दूध की ताजी मलाई और मीठे सिंदूरी आम भी खिलाता था। 2. "बदलू काका" कहने का कारण: यद्यपि मामा के गाँव का होने के कारण रिश्ते में बदलू लेखक का मामा लगता था, लेकिन गाँव के सभी बच्चे उसे "बदलू काका" कहते थे। बच्चों की देखा-देखी लेखक भी उसे बदलू मामा न कहकर "बदलू काका" कहने लगा।

उदाहरण 2
प्रश्न 2: वस्तु-विनिमय (Barter System) क्या है? विनिमय की प्रचलित पद्धति क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. वस्तु-विनिमय: जब किसी वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए पैसे (मुद्रा) के स्थान पर किसी दूसरी वस्तु का आदान-प्रदान किया जाता है, तो उसे वस्तु-विनिमय प्रणाली कहते हैं। जैसे बदलू चूड़ियों के बदले में अनाज, कपड़े या गुड़ लेता था। 2. प्रचलित पद्धति: वर्तमान समय में विनिमय की प्रचलित पद्धति "मुद्रा-विनिमय" (Money Transaction) है, जहाँ किसी भी वस्तु या सेवा का मूल्य मुद्रा (रुपये, डिजिटल पेमेंट आदि) के रूप में चुकाया जाता है।

उदाहरण 3
प्रश्न 3: "मशीनी युग ने कितने हाथ काट दिए हैं।"—इस पंक्ति में लेखक ने किस व्यथा की ओर संकेत किया है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: इस पंक्ति में लेखक ने मशीनीकरण के कारण उजड़ते ग्रामीण हस्तशिल्प और कुशल कारीगरों की मार्मिक व्यथा की ओर संकेत किया है:

  1. बेरोजगारी का दंश: मशीनों के आ जाने से जो काम सैकड़ों कारीगर अपने हाथों से करते थे, वह अब कुछ मशीनों से मिनटों में हो जाता है। इससे मिट्टी, लाख, लकड़ी और कपड़े का पारंपरिक काम करने वाले लाखों कुशल कारीगर बेरोजगार हो गए।
  2. भुखमरी और लाचारी: हाथ कटने का अर्थ शारीरिक हाथ काटा जाना नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का साधन छिन जाना है। इससे वे अपने पैतृक हुनर को खोकर दर-दर की ठोकरें खाने और मजदूरी करने पर विवश हो गए हैं।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: बदलू के मन में ऐसी कौन-सी व्यथा थी जो लेखक से छिपी न रह सकी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: बदलू के मन की व्यथा:

  1. जब लेखक कई वर्षों बाद बदलू से मिला, तो उसने देखा कि बदलू अब वृद्ध, कमजोर और बीमार हो चुका था और उसकी लाख की चूड़ियों का काम पूरी तरह बंद हो चुका था।
  2. काँच की मशीनी चूड़ियों के सस्ते और चमकीले चलन ने बदलू की पारंपरिक कला की कद्र समाप्त कर दी थी। उसकी गाय बिक चुकी थी और आम की फसल भी कम हो गई थी।
  3. अपने पुश्तैनी हुनर का पतन और स्वयं का लाचार हो जाना बदलू के दिल में एक गहरा नासूर बन चुका था। उसका यही मौन दर्द और बेबसी लेखक से छिपी न रह सकी।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: कहानी के अंत में लेखक को ऐसा क्यों लगा कि "बदलू का व्यक्तित्व काँच की चूड़ियों जैसा न था कि आसानी से टूट जाए"?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लेखक का ऐसा सोचने का कारण:

  1. यद्यपि बदलू का व्यवसाय मशीनी काँच की चूड़ियों के सामने पूरी तरह बर्बाद हो चुका था और वह गरीबी की मार झेल रहा था, लेकिन उसने अपने आत्मसम्मान को नहीं खोया।
  2. जब जमींदार ने सुहाग के जोड़े के बदले केवल दस आने दिए, तो बदलू ने अपनी कला का अपमान स्वीकार नहीं किया और घाटा सहकर भी चूड़ियाँ बेचने से मना कर दिया।
  3. उसने अपनी बेटी रज्जो की कलाई पर वह जोड़ा पहनाया। बदलू विषम परिस्थितियों के सामने झुका नहीं; उसका स्वाभिमान और चरित्र काँच की तरह कमजोर और क्षणभंगुर नहीं, बल्कि लाख की तरह अटूट और फौलादी था।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर मान लेते हैं कि मशीनों ने सचमुच कारीगरों के हाथ काट दिए थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह एक लाक्षणिक व मुहावरेदार प्रयोग है। इसका अर्थ यह है कि मशीनों ने कारीगरों का हुनर, रोजगार और रोजी-रोटी छीनकर उन्हें अपंग बना दिया।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि बदलू लालची था क्योंकि वह शादियों में मनमाना मोल लेता था।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बदलू लालची नहीं था; वह साल भर चूड़ियाँ बिना पैसे लिए मुफ्त जैसी देता था। केवल विवाह के अवसर पर वह अपने सम्मान और परिवार के लिए कपड़े व अनाज की वाजिब मांग करता था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

काँच की चूड़ियों और लाख की चूड़ियों के महत्व में अंतर न समझ पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

काँच की चूड़ियाँ सस्ती और नाजुक हैं जो चोट पहुँचाती हैं; जबकि लाख की चूड़ियाँ प्राकृतिक, टिकाऊ, पवित्र और हस्तकला का उत्कृष्ट नमूना हैं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

कामतानाथ: "लाख की चूड़ियाँ" — मशीनीकरण बनाम हस्तकला कारीगर का स्वाभिमान और उजड़ते ग्रामीण कुटीर उद्योग की मर्मस्पर्शी गाथा 1. पारंपरिक लाख शिल्प (बदलू मनिहार) • भट्टी व मुँगेरियाँ: धधकती भट्टी में लाख पिघलाना, मुँगेरियों पर गढ़ना हाथों की अनूठी साधना • सुहाग का पवित्र जोड़ा • वस्तु-विनिमय प्रथा: पैसे का लोभ नहीं; अनाज व कपड़ों के बदले चूड़ियाँ • अडिग आत्मसम्मान: दस आने में अंतिम जोड़ा नहीं बेचा; कला का मान रखा 2. मशीनी युग का क्रूर प्रहार • काँच की चमकीली चूड़ियाँ: कारखानों में लाखों का उत्पादन • सस्ता व क्षणभंगुर नाजुकी ज्यादा परंतु टूटने पर कलाई जख्मी • "मशीनों ने हाथ काट दिए": लाखों कुशल कारीगरों का बेरोजगार व लाचार होना • मौन सामाजिक त्रासदी: गाय बिकी, फसल उजड़ी, पर स्वाभिमान काँच सा नहीं टूटा कहानी का केंद्रीय संदेश: मानवीय मूल्य एवं श्रम की प्रतिष्ठा • विकास और मशीनीकरण आवश्यक है, परंतु वह पारंपरिक कारीगरों के जीवन की कीमत पर नहीं होना चाहिए। • बदलू मनिहार का चरित्र सिखाता है कि भीषण आर्थिक संकट में भी अपने सिद्धांतों और आत्मसम्मान से समझौता न करें। • निष्कर्ष: "बदलू का व्यक्तित्व काँच की चूड़ियों जैसा न था कि आसानी से टूट जाए।"

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. "लाख की चूड़ियाँ" प्रसिद्ध कथाकार कामतानाथ द्वारा रचित एक संवेदनशील और यथार्थवादी आंचलिक कहानी है।
मुख्य बिंदु 2
  1. कहानी का मुख्य पात्र बदलू मनिहार है जो गाँव में लाख की सुंदर और मनमोहक चूड़ियाँ बनाने का पैतृक कार्य करता था।
मुख्य बिंदु 3
  1. बदलू चूड़ियों के बदले पैसे नहीं लेता था, बल्कि वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter) के तहत अनाज और कपड़े लेता था।
मुख्य बिंदु 4
  1. लेखक बचपन में छुट्टियों में मामा के गाँव जाता था जहाँ बदलू उसे लाख की रंग-बिरंगी गोलियाँ, ताजी मलाई और मीठे आम खिलाता था।
मुख्य बिंदु 5
  1. बदलू स्वभाव से सीधा और शांत था, परंतु विवाह के शुभ अवसर पर वह मुँहमाँगी नेग लिए बिना चूड़ियों का जोड़ा नहीं देता था।
मुख्य बिंदु 6
  1. मशीनी युग आने से शहर की सस्ती और चमकीली काँच की चूड़ियों का प्रचलन बढ़ा जिससे बदलू का व्यवसाय पूरी तरह बर्बाद हो गया।
मुख्य बिंदु 7
  1. "मशीनों ने हाथ काट दिए हैं"—इस कथन से लेखक ने मशीनीकरण द्वारा कारीगरों के उजड़ते रोजगार और भुखमरी की त्रासदी को दर्शाया है।
मुख्य बिंदु 8
  1. काम छिनने से बदलू गरीब, लाचार और दमा का मरीज हो गया और उसकी प्यारी गाय भी बिक गई।
मुख्य बिंदु 9
  1. जमींदार द्वारा दस आने दिए जाने पर बदलू ने अपनी कला का अपमान नहीं सहा और अंतिम लाख का जोड़ा बेचने से साफ इनकार कर दिया।
मुख्य बिंदु 10
  1. बदलू का व्यक्तित्व काँच की चूड़ियों जैसा कमजोर नहीं था जो आसानी से टूट जाए; उसने गरीबी में भी अपना स्वाभिमान जीवित रखा।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
"लाख की चूड़ियाँ" कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कामतानाथ
कामतानाथ हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार हैं जिन्होंने ग्रामीण जीवन और औद्योगिकीकरण के द्वंद्व पर यह कहानी लिखी।
2
कहानी में बदलू का पुश्तैनी पेशा क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मनिहार (लाख की चूड़ियाँ बनाना)
बदलू जाति से मनिहार था और वह अपने हाथों से लाख की चूड़ियाँ बनाने का पारंपरिक कार्य करता था।
3
बदलू चूड़ियों की बिक्री के लिए किस विनिमय पद्धति का उपयोग करता था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System)
वह चूड़ियों के बदले पैसे न लेकर ग्राहकों से अनाज, कपड़े और अन्य दैनिक वस्तुएँ लेता था।
4
"मशीनों ने हाथ काट दिए हैं" पंक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मशीनों ने कारीगरों का रोजगार और आजीविका छीन ली है
यह मुहावरा कारीगरों की बेरोजगारी, लाचारी और भुखमरी की ओर संकेत करता है।
5
बदलू की बेटी का क्या नाम था जिसने लाख की चूड़ियों का अंतिम जोड़ा पहना था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रज्जो
रज्जो बदलू की बेटी थी, जिसकी कलाई पर जमींदार की बेटी के लिए बना अंतिम लाख का जोड़ा सज रहा था।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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