"नहीं, यह सबसे कठिन समय नहीं! / अभी भी दबा है चिड़िया की / चोंच में तिनका / और वह उड़ने की तैयारी में है!"
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि यह सबसे बुरा समय नहीं हो सकता। देखो, वह छोटी सी चिड़िया हताश होकर बैठी नहीं है; उसने अपनी चोंच में एक तिनका दबा रखा है और वह आकाश में उड़ने को तैयार है। वह नया घोंसला बनाएगी और नए अंडों को सेहेगी। यह तिनका निर्माण, कर्मण्यता और भविष्य की अटूट आशा का प्रतीक है।
"अभी भी झरती हुई पत्ती / थामने को बैठा है हाथ एक / अभी भी भीड़ है स्टेशन पर / अभी भी एक रेलगाड़ी जाती है / गंतव्य तक..."
व्याख्या: पेड़ से गिरती हुई पत्ती समाज के उस असहाय और गिरे हुए व्यक्ति का प्रतीक है जो संकट में है। परंतु उसे थामने और सहारा देने के लिए आज भी कोई न कोई हमदर्द हाथ मौजूद है। समाज से दया और करुणा समाप्त नहीं हुई है। रेलवे स्टेशन पर आज भी चहल-पहल है और रेलगाड़ी मुसाफिरों को उनकी मंजिल (गंतव्य) तक पहुँचाने को तैयार खड़ी है।
"जहाँ कोई कर रहा होगा प्रतीक्षा / अभी भी कहता है कोई किसी को / जल्दी आ जाओ कि अब / सूरज डूबने का वक्त हो गया / अभी कहा जाता है / उस कथा का आखिरी हिस्सा..."
व्याख्या: दुनिया में आज भी प्रेम और आत्मीयता जिंदा है। शाम होते ही घर पर कोई न कोई अपने परिजन के लौटने का इंतजार करता है और कहता है कि सूरज डूबने वाला है, घर आ जाओ। सदियों से नानी जो परियों की कहानी सुनाती आई हैं, उसका सुखद अंत अभी बाकी है। अंतरिक्ष के पार से आने वाली बस बचे हुए साहसी लोगों की खबर लाएगी। अतः निराश होने का कोई कारण नहीं है।