कहानी की शुरुआत एक बड़े संयुक्त परिवार के घरेलू वातावरण से होती है:
- नौकरों की फौज और आलस्य: घर में इतने सारे नौकर थे कि बच्चे दिन भर केवल शरारतें करते थे और खुद उठकर पानी भी नहीं पीते थे। वे खाते-पीते मोटे हो रहे थे और किसी काम के नहीं थे।
- अब्बा मियाँ का कठोर फरमान: घर के बड़ों ने तय किया कि सभी नौकरों को छुट्टी दे दी जाए और बच्चों को काम सिखाया जाए। अब्बा ने कड़ा अल्टीमेटम दिया—"जो काम नहीं करेगा, उसे रात का खाना नहीं मिलेगा!" इसके साथ ही काम करने पर जेबखर्च (तनख्वाह) देने का लालच भी दिया गया।
- काम की योजना का अभाव: बच्चों ने काम के बदले पैसे की बात सुनी तो वे तुरंत तैयार हो गए, परंतु उन्हें किसी काम की कोई तमीज या पूर्व-अनुभव नहीं था।