प्रोटीन (अमीनो अम्लों के वि-अमीनीकरण) तथा न्यूक्लिक अम्लों के अपचयी उपापचय के फलस्वरूप प्राणियों में हानिकारक नाइट्रोजनी अपशिष्ट बनते हैं। जल की उपलब्धता तथा अनुकूलन के आधार पर प्राणियों को तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
• प्रकृति एवं विषैलापन: अमोनिया (NH3) अत्यधिक विषैली, तीव्र क्षारीय तथा जल में अत्यंत विलेय गैस है।
• जल की आवश्यकता: 1 ग्राम नाइट्रोजनी अमोनिया के निष्कासन हेतु लगभग 300 से 500 mL जल की आवश्यकता होती है।
• उत्सर्जन विधि: देह सतह या क्लोमों (गिल्स) से सरल विसरण द्वारा अमोनियम आयनों (NH4+) के रूप में विसरित होती है; वृक्कों की भूमिका नगण्य होती है।
• उदाहरण: जलीय अकशेरुकी (प्रोटोजोआ, स्पंज, सीलेन्टरेटा), अस्थिल मछलियां (Teleosts), जलीय उभयचरों के टैडपोल लार्वा।
• प्रकृति: यूरिया [CO(NH2)2] अमोनिया की तुलना में लगभग 1,00,000 गुना कम विषैला तथा मध्यम विलेय है।
• संश्लेषण: यकृत में क्रेब्स-हेंसलीट ऑर्निथिन चक्र (Ornithine Cycle) द्वारा 3 ATP अणुओं का उपयोग कर 2 अणु NH3 तथा 1 अणु CO2 से यूरिया का निर्माण होता है।
• जल की आवश्यकता: 1 ग्राम नाइट्रोजन यूरिया के रूप में त्यागने हेतु केवल ~50 mL जल की आवश्यकता होती है।
• उदाहरण: मनुष्य सहित सभी स्तनधारी, वयस्क स्थलीय उभयचर (मेंढक, टोड), तथा उपास्थिमय समुद्री मछलियां (शार्क), जो अपने रुधिर में यूरिया संचित कर समुद्री जल के साथ समपरासारी रहती हैं।
• प्रकृति एवं विलेयता: यूरिक अम्ल (C5H4N4O3) व्यावहारिक रूप से अविषाक्त तथा जल में पूर्णतः अविलेय है।
• जल की आवश्यकता: 1 ग्राम नाइट्रोजन त्यागने में मात्र ~10 mL जल की हानि होती है; यह अर्ध-ठोस लेई या गोली (Pellet) के रूप में उत्सर्जित होता है।
• अनुकूलन: शुष्क स्थलीय आवासों में जल संरक्षण, पक्षियों में उड़ने हेतु शारीरिक भार कम करने, तथा अंडों के भीतर भ्रूण के संरक्षण हेतु अनिवार्य अनुकूलन है।
• उदाहरण: सरीसृप (छिपकली, सांप), पक्षी, स्थलीय घोंघे, तथा स्थलीय कीट (तिलचट्टा)।
| उत्सर्जी अंग | संरचनात्मक विशेषताएं | प्रतिनिधि प्राणी | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|---|
| आदिवृक्कक / ज्वाला कोशिकाएं (Flame Cells) | नलिकाओं के सिरों पर स्थित खोखली कोशिकाएं जिनमें सीलिया का गुच्छा ज्वाला की भांति स्पंदित होता है | प्लेटीहेल्मिन्थीज (प्लेनेरिया, फीताकृमि), रोटिफर्स, एम्फिऑक्सस | मुख्यतः परासरण नियमन (द्रव व आयनिक संतुलन); द्वितीयक रूप से अपशिष्ट निष्कासन |
| वृक्कक (Nephridia) | दोनों सिरों पर खुली कुंडलित नलिकाएं: नेफ्रोस्टोम सीलोम में तथा नेफ्रीडियोपोर बाहर खुलता है | एनेलिडा (केंचुआ: पटलीय, ग्रसनीय एवं अध्यावरणी) | देहगुहीय द्रव से नाइट्रोजनी अपशिष्टों का निष्कासन एवं परासरण नियमन |
| मैलपिगी नलिकाएं (Malpighian Tubules) | मध्य-आंत्र व पश्चांत्र के जोड़ पर स्थित 100-150 पतली, पीली अंधी नलिकाएं जो हीमोलिम्फ में तैरती हैं | कीट (तिलचट्टा) एवं अन्य स्थलीय आर्थ्रोपोड्स | हीमोलिम्फ से पोटेशियम यूरेट अवशोषित कर आंत्र में यूरिक अम्ल के रूप में छोड़ना |
| श्रृंगिक / हरित ग्रंथियां (Green Glands) | स्पर्शकों के आधार पर स्थित जोड़ीदार ग्रंथियां; एंड-सैक, लेबिरिंथ, मूत्राशय एवं उत्सर्जी छिद्र युक्त | क्रस्टेशिया (झींगा) | रुधिर से परानिस्यंदन तथा लवण-जल संतुलन |
| कॉक्सल ग्रंथियां (Coxal Glands) | चलने वाले पादों के आधार पर स्थित उत्सर्जी संरचनाएं | अरेकनिडा (मकड़ी, बिच्छू) | गुआनिन का उत्सर्जन एवं परासरण नियमन |