शरीर के किसी अंग अथवा उपांग के हिलने-डुलने को संचलन (Movement) कहते हैं, जबकि प्राणी के संपूर्ण शरीर के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्वैच्छिक विस्थापन को गमन (Locomotion) कहा जाता है। मानव शरीर की कोशिकाओं में मुख्य रूप से तीन प्रकार के संचलन देखे जाते हैं:
• कार्यप्रणाली: कोशिकाद्रव्य के प्रवाह (सॉल-जेल परिवर्तन) तथा कोशिकीय कंकाल के एक्टिन माइक्रोफिलामेंट्स के बहुलकीकरण से बनने वाले कूटपादों (पादभ / Pseudopodia) द्वारा होता है।
• उदाहरण: रुधिर में संचरित होने वाले श्वेताणु (मुख्यतः न्यूट्रोफिल) तथा ऊतक मैक्रोफेज, जो केशिका भित्ति को पार करके (डायपेडिसिस) रोगाणुओं का भक्षण करते हैं।
• कार्यप्रणाली: कोशिका झिल्ली से निकले रोम-सदृश पक्ष्माभों के ९+२ सूक्ष्मनलिका विन्यास में डाइनिन एटीपेज़ द्वारा उत्पन्न लयबद्ध तरंगित गति।
• मानव शरीर में स्थल:
- श्वसन मार्ग: श्वासनली (ट्रेकिया) तथा श्वसनी की पक्ष्माभी उपकला श्लेष्मा में फंसे धूलिकणों एवं जीवाणुओं को ग्रसनी की ओर बाहर निकालती है (म्यूकोसिलियरी एस्केलेटर)।
- मादा जनन मार्ग: डिंबवाहिनी (फैलोपियन नलिका) की पक्ष्माभी उपकला अचल अंडाणु अथवा युग्मनज को गर्भाशय की ओर धकेलती है।
- कशाभी गति: मानव शुक्राणु की पूंछ (कशाभ / फ्लैगेलम) चाबुक जैसी तरंगित गति द्वारा शुक्राणु को तैरकर अंडाणु तक पहुंचने में मदद करती है।
• कार्यप्रणाली: पेशी कोशिकाओं के उत्तेजनशीलता, संकुचनशीलता तथा प्रत्यास्थता गुणों के समन्वयन से पेशी संकुचन संपन्न होता है।
• महत्व: भुजाओं व टांगों की गति, जबड़ों व जिह्वा का हिलना, डायाफ्राम द्वारा श्वसन, हृदय द्वारा रुधिर पंप करना तथा आहारनाल में क्रमानुकुंचन।
| लक्षण | कंकाल पेशी (Skeletal) | चिकनी / अंतरंग पेशी (Smooth) | हृद पेशी (Cardiac) |
|---|---|---|---|
| स्थिति | कंकाल अस्थियों से टेंडन द्वारा जुड़ी होती हैं | खोखले आंतरिक अंगों की भित्ति में (आमाशय, आंत, रुधिर वाहिनियां, मूत्राशय) | केवल हृदय की मायोकार्डियम भित्ति में |
| कोशिका संरचना | लंबी, बेलनाकार, अशाखित तंतु (१–४० मिमी) | लंबी, तर्कुरूपी (फ्यूसीफॉर्म), नुकीले सिरों वाली | छोटी, बेलनाकार, शाखित एवं परस्पर जुड़ी हुई |
| रेखण व सार्कोमियर | स्पष्ट गहरे (A) तथा हल्के (I) पट्ट उपस्थित; सुस्पष्ट सार्कोमियर | अरेखित (चिकनी); मायोफिलामेंट्स अनियमित जाल में व्यवस्थित | रेखित; स्पष्ट गहरे व हल्के पट्ट तथा सार्कोमियर उपस्थित |
| केंद्रक व्यवस्था | बहुकेंद्रकी संकोशिका (Syncytium); केंद्रक परिधि की ओर स्थित | एकल अंडाकार केंद्रक कोशिका के मध्य में स्थित | एकल (कभी-कभी दो) केंद्रक मध्य में स्थित |
| अंतर्विष्ट डिस्क (Intercalated Discs) | अनुपस्थित | अनुपस्थित | उपस्थित; डेस्मोसोम तथा गैप जंक्शन युक्त विशेष संधियां |
| नियंत्रण एवं तंत्रिका तंत्र | ऐच्छिक; कायिक तंत्रिका तंत्र (SNS) द्वारा नियंत्रित | अनैच्छिक; स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS) द्वारा संचालित | अनैच्छिक; स्वायत्त तंत्रिका तंत्र एवं पेसमेकर द्वारा नियंत्रित |
| संकुचन गति व थकान | अत्यंत तीव्र व शक्तिशाली; शीघ्र थक (Fatigue) जाती हैं | धीमी, लयबद्ध व दीर्घकालिक; जल्दी नहीं थकतीं | लयबद्ध, निरंतर एवं जीवनपर्यंत बिना थके संकुचित होती हैं |